महाराष्ट्र का लातूर जिला सूखे की मार झेल रहा है. हालात से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने चार सूत्रीय योजना तैयार की है, जिसमें पेयजल, पशुओं के लिए चारा, रोजगार और मौजूदा वाटर सोर्स को फिर से जिलाने पर जोर दिया गया है. कलेक्टर डॉ. भरत बस्तेवाड़ ने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है.
कलेक्टर के मुताबिक, हर गांव में पहले सरकारी कुओं और बोरवेल की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा. इसके बाद जरूरत के अनुसार निजी जल स्रोतों की पहचान कर उनका अधिग्रहण किया जाएगा. अगर इससे भी पानी की जरूरत पूरी नहीं होती है तो अतिरिक्त कुएं और बोरवेल तलाशे जाएंगे. इसके बाद भी जरूरत पड़ने पर टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाएगी.
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को बारिश की कमी के बीच राज्य की 358 तहसीलों में से 265 यानी करीब 74 फीसदी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था. सरकार ने फसल ऋण के पुनर्गठन, भू-राजस्व में रियायत और बिजली बिल में सब्सिडी समेत राहत उपायों की घोषणा की है.
गांवों में वाटर सोर्स का होगा आकलन
कलेक्टर बस्तेवाड़ ने मंगलवार को चाकुर तहसील के वडवल नागनाथ में पेयजल की स्थिति का जायजा लिया. करीब 15 हजार की आबादी वाले इस इलाके में ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर लगभग 30 बोरवेल हैं, जिनमें 11 ठीक तरीके से काम करते पाए गए. कई घरों में निजी बोरवेल भी हैं.
प्रशासन की योजना वडवल नागनाथ में पांच से छह प्रमुख स्थानों पर पानी की टंकियां लगाने और जरूरत के अनुसार नल उपलब्ध कराने की है. इन व्यवस्थाओं के संचालन के लिए ग्राम पंचायत कर्मचारियों के साथ चार लोगों को तैनात किया जाएगा. लोगों को दो-दो घंटे के स्लॉट में पानी उपलब्ध कराया जाएगा.
पशुओं के चारे और रोजगार पर भी फोकस
योजना के दूसरे हिस्से में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था की जाएगी. गांववार मौजूदा चारा भंडार का डेटा जुटाकर यह आकलन किया जाएगा कि वह कितने समय तक चलेगा. जिन ग्रामीणों के पास पानी उपलब्ध है, उन्हें चारा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. प्रशासन केवल चारा शिविरों पर निर्भर रहने के बजाय चारा डिपो बनाने पर भी विचार कर रहा है.
तीसरा फोकस ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत लोकल लेवल पर रोजगार उपलब्ध कराने पर है. इसके तहत तालाबों और नालों से गाद निकालने, कुओं को पुनर्जीवित करने और पुराने बोरवेल को रिचार्ज करने जैसे काम कराए जाएंगे. योजना का चौथा हिस्सा जल संरक्षण और जल स्रोतों को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाने पर केंद्रित है, ताकि गांवों को लंबे समय तक आपातकालीन टैंकर आपूर्ति पर निर्भर न रहना पड़े.
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