आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरुक हो गए हैं. हल्की-सी परेशानी होने पर भी कई लोग खुद ही ब्लड टेस्ट या फुल बॉडी हेल्थ चेकअप पैकेज बुक करा लेते हैं. कुछ लोग हर 6 महीने, तो कुछ 3 महीने में ही पूरे शरीर की जांच कराना अपनी आदत बना चुके हैं. इसे बढ़ती स्वास्थ्य जागरुकता भी कहा जा सकता है और बीमारियों का डर भी, लेकिन सवाल यह है कि क्या एक पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति को भी हर साल फुल बॉडी चेकअप कराना चाहिए, या कुछ चुनिंदा टेस्ट ही काफी होते हैं?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए आजतक.इन ने पद्म श्री पुरस्कार विजेता और महाजन इमेजिंग एंड लैब्स, नई दिल्ली के संस्थापक व चेयरमैन डॉ हर्ष महाजन से बातचीत की है. डॉ महाजन बताते हैं कि किसी स्वस्थ व्यक्ति को हर 3 या 6 महीने में नहीं, लेकिन सालभर में एक बार कुछ बेसिक हेल्थ टेस्ट जरूर करा लेने चाहिए. टेस्ट के प्रकार और संख्या व्यक्ति की उम्र और रिस्क प्रोफ़ाइल पर निर्भर करेगी, लेकिन कुछ बेसिक टेस्ट ज़रूरी हैं. इनमें ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज़, लिपिड प्रोफ़ाइल, लिवर और किडनी फ़ंक्शन टेस्ट, थायरॉइड टेस्ट और एनीमिया के लिए हीमोग्लोबिन टेस्ट के साथ-साथ विटामिन D और विटामिन B12 की जांच शामिल है.
ब्लड टेस्ट के अलावा चेस्ट का एक्स-रे और पेट का अल्ट्रासाउंड भी करवाना चाहिए. अल्ट्रासाउंड एक आसान टेस्ट है और इससे पेट के अंदर के अंगों में कोई गड़बड़ी पता चल सकती है और लिवर में फैट का भी पता लगाया जा सकता है. मोटापा कई बीमारियों का कारण बन सकता है, इसलिए मोटे लोगों को समय पर टेस्ट करवाते रहना चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ वाले लोगों को नियमित रूप से जांच करवानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैरामीटर्स नियंत्रण में हैं.
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इन लोगों को CT कोरोनरी एंजियोग्राफी और CT कैल्शियम स्कोर टेस्ट कराने चाहिए
डॉ महाजन बताते हैं कि उम्र के हिसाब से, दिल की बीमारी के अधिक रिस्क वाले लोगों में 40 साल की उम्र में और औसत रिस्क वाले लोगों में 50 साल की उम्र में हर 5 साल में एक बार CT कोरोनरी एंजियोग्राफी और CT कैल्शियम स्कोर टेस्ट किया जा सकता है. 40 साल की उम्र से ECG, इकोकार्डियोग्राफी और स्ट्रेस टेस्ट भी किए जा सकते हैं.
महिलाओं में कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने के लिए हर 3 साल में सर्विक्स के कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट और 40 साल की उम्र से हर साल एक्स-रे मैमोग्राफी करवाने की सलाह दी जाती है. जिन महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस होने का अधिक रिस्क है, उन्हें 50 साल की उम्र में DEXA बोन डेंसिटोमेट्री स्कैन करवाना चाहिए.
एमआरआई और सीटी स्कैन किनको कराना चाहिए
CT स्कैन का इस्तेमाल CT कैल्शियम स्कोर और CT कोरोनरी एंजियोग्राफी के जरिए हार्ट की नसों में रुकावट का पता लगाने के लिए किया जाता है. फेफड़ों के कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए ज़्यादा धूम्रपान करने वालों में लो-डोज़ CT का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. पूरे शरीर की स्क्रीनिंग के लिए CT स्कैन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है क्योंकि CT स्कैन में रेडिएशन का इस्तेमाल होता है.
डॉ महाजन कहते हैं कि पश्चिमी देशों में, बिना लक्षणों वाले स्वस्थ लोगों में, खासकर जिन्हें कैंसर होने का ज़्यादा खतरा है, कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए पूरे शरीर का MRI स्कैन करवाने का चलन बढ़ रहा है. यह एक नॉन-इनवेसिव (बिना चीर-फाड़ वाला) आसान स्कैन है जो शुरुआती कैंसर का पता लगा सकता है और इसकी पहचान करने की दर 1.5-2% के बीच बताई जाती है. यह टेस्ट व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से करवाता है और इसके लिए डॉक्टर की सलाह की ज़रूरत नहीं हो सकती है क्योंकि यह एक हेल्थ चेकअप है.
अभी का चलन साल में एक बार यह स्कैन करवाने का है. यह टेस्ट जेनेटिक टेस्ट और होल एक्सोम सीक्वेंसिंग के साथ भी किया जा सकता है, जिससे कई तरह के कैंसर, अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों और दिल की बीमारियों के खतरे का पता लगाया जा सकता है.
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सीटी स्कैन या एमआरआई कौन सा टेस्ट बेहतर है
CT स्कैन और MRI, दोनों के अपने-अपने इस्तेमाल के तरीके हैं. CT का इस्तेमाल आम तौर पर सिर्फ़ दिल और फेफड़ों की स्क्रीनिंग के लिए किया जाता है क्योंकि इसमें X-रे रेडिएशन का इस्तेमाल होता है. MRI पूरी तरह से सुरक्षित स्कैन है जिसमें कोई रेडिएशन नहीं होता और इसका इस्तेमाल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए पूरे शरीर की जांच करने में किया जाता है.अगर हेल्थ चेकअप के दौरान किसी टेस्ट में कोई गड़बड़ी का पता चलता है, तो व्यक्ति को डॉक्टर से सही मेडिकल सलाह लेनी चाहिए, जो आगे के इलाज या मैनेजमेंट के बारे में सलाह दे सकें.
अभिषेक पांचाल