केमिस्ट्री टीचर से ड्रग लॉर्ड तक! क्राइम, परिवार और अहंकार में जकड़ा शो, 13 साल से टीवी की गद्दी पर बैठा

आखिर ब्रेकिंग बैड में ऐसा क्या है कि नई पीढ़ी भी इसे देख रही है और पुरानी पीढ़ी दोबारा लौट रही है? इसकी पहली वजह शायद इसकी कहानी नहीं, बल्कि कहानी का सवाल है कि अगर एक बेहद साधारण आदमी को यह यकीन हो जाए कि दुनिया ने उसे उसकी काबिलियत के मुताबिक कुछ नहीं दिया, तो वह कितनी दूर तक जा सकता है?

Advertisement
ब्रेकिंग बैड क्यों है सदी का सबसे महान शो. (Photo: ITG) ब्रेकिंग बैड क्यों है सदी का सबसे महान शो. (Photo: ITG)

रितु तोमर

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:53 PM IST

पहली नजर में टीवी शो ब्रेकिंग बैड का वॉल्टर व्हाइट ऐसा शख्स नहीं लगता जिसकी कहानी दुनिया सालों बाद भी याद रखेगी. वह कोई गैंगस्टर नहीं है और ना ही जिंदगी में बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर चुका शख्स. वो बस एक केमिस्ट्री टीचर है, बेहद टैलेंटेड लेकिन अपनी ही जिंदगी में जैसे पीछे छूट गया आदमी. कभी जिस हुनर के दम पर वह दुनिया बदल सकता था, उसी हुनर के बावजूद उसके पुराने दोस्त उससे कहीं आगे निकल चुके हैं. ऐसे में जब उसे एक दिन पता चलता है कि उसे कैंसर है और उसके पास सिर्फ कुछ महीने बचे हैं तो परिवार की चिंता उसे एक रास्ते पर ले जाती है, जहां से वापस मुड़ना आसान नहीं है. लगभग 13 साल पहले खत्म हो चुकी इस सीरीज की बात इसलिए हो रही है क्योंकि न्यूयॉर्क टाइम्स के सर्वे में ब्रेकिंग बेड को 21वीं सदी का सबसे महान शो बताया गया है. 

Advertisement

2008 में शुरू हुई इस टीवी सीरीज का आखिरी सीजन 2013 में रिलीज हुआ था. ब्रेकिंग बैड की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शो खत्म होने के 13 साल बाद भी ये दर्शकों में रिलेवेंट बना हुआ है. लोग बार-बार इस शो को देखने ओटीटी की तरफ लौटते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि यह शो अभी भी इतना पॉपुलर क्यों है और इसे सदी का सबसे महान शो क्यों कहा जा रहा है?

ब्रेकिंग बैड बाकी क्राइम शो की तरह कोई आम क्राइम शो नहीं है. यहां हर पल ये रोमांच बना रहता है कि अब वॉल्टर का अगला कदम क्या होगा? घर-परिवार और दोस्तों में आदर्श समझे जाने वाला शख्स अपने भीतर के अंधेरे को कितने दूर तक जाने देगा. सवाल ये भी है कि आखिर ब्रेकिंग बैड में ऐसा क्या है कि नई पीढ़ी भी इसे देख रही है और पुरानी पीढ़ी दोबारा लौट रही है? इसकी पहली वजह शायद इसकी कहानी नहीं, बल्कि ये सवाल है कि अगर एक बेहद साधारण आदमी को यह यकीन हो जाए कि दुनिया ने उसे उसकी काबिलियत के मुताबिक कुछ नहीं दिया, तो वह कितनी दूर तक जा सकता है?

Advertisement

वॉल्टर व्हाइट की शुरुआत किसी गैंगस्टर की तरह नहीं होती. वह कोई ताकतवर आदमी नहीं है. वह हाईस्कूल में केमिस्ट्री पढ़ाने वाला टीचर है, परिवार आर्थिक दबाव में है और वो खुद कैंसर की बीमारी का सामना कर रहा है. सवाल ये भी है कि क्या वॉल्टर व्हाइट सचमुच परिवार के लिए अपराध की दुनिया में जाता है या परिवार सिर्फ उस फैसले को सही ठहराने का बहाना है, जिसे वह भीतर से करना चाहता है? 

ब्रेकिंग बेड का पोस्टर.

शो की खूबी यह है कि वह इसका आसान जवाब नहीं देता. शुरुआत में दर्शक वॉल्टर के फैसलों को समझता है. फिर उन्हें स्वीकार करने लगता है. उसके बाद उन्हें लेकर असहज होता है और धीरे-धीरे एक ऐसी जगह पहुंचता है जहां उसे खुद तय करना पड़ता है कि वह वॉल्टर को समझ रहा है या उसका सपोर्ट कर रहा है.

वॉल्टर व्हाइट एक दिन में हाइजनबर्ग नहीं बनता. वह छोटे-छोटे फैसला करता है. एक झूठ, फिर दूसरा झूठ. एक अपराध, फिर उससे बचने के लिए दूसरा अपराध. हर अगला कदम पिछले कदम को बचाने की कोशिश में उठाया जाता है. यही धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व को बदल देता है इसलिए वॉल्टर का सफर सिर्फ एक ड्रग डीलर बनने की कहानी नहीं है, बल्कि एक इंसान के भीतर मौजूद अहंकार के धीरे-धीरे पावर में आने की कहानी है.

Advertisement

और शायद इसी वजह से ब्रेकिंग बैड आज भी प्रासंगिक लगता है क्योंकि इसके केंद्र में ड्रग्स नहीं, मानवीय कमजोरी है. वॉल्टर का सबसे बड़ा दुश्मन आखिर में कोई कार्टेल, पुलिस या राइवल नहीं है. उसका सबसे बड़ा दुश्मन उसका अपना अहंकार है. उसे पैसा चाहिए, लेकिन एक समय के बाद पैसा पर्याप्त नहीं रह जाता. उसे सम्मान चाहिए, फिर पहचान चाहिए. फिर डर पैदा करने की क्षमता चाहिए. जिस आदमी को जिंदगीभर लगता रहा कि उसके साथ अन्याय हुआ है, वह आखिरकार खुद ऐसी दुनिया बना लेता है जहां दूसरे लोग उससे डरते हैं. यह बदलाव इसलिए प्रभावी है क्योंकि शो इसे भाषण देकर नहीं समझाता, बल्कि घटनाओं के जरिए दिखाता है.

यही वजह है कि ब्रायन क्रैंस्टन का वॉल्टर व्हाइट टेलीविजन के यादगार किरदारों में गिना जाता है. टेलीविजन अकेडी के रिकॉर्ड के मुताबिक ब्रेकिंग बैड को कुल 58 एमी नॉमिनेशन मिले और वह 16 एमी जीतने में सफल रही. लेकिन केवल पुरस्कार किसी शो को अमर नहीं बनाते. ब्रेकिंग बैड की असली ताकत उसके किरदारों की जटिलता है.

ब्रेकिंग बैड का एक सीन.

वॉल्टर के सामने जेसी पिंकमैन को रखकर देखिए. एक तरफ वॉल्टर है, जो खुद को बेहद तार्किक और नियंत्रित समझता है. दूसरी तरफ जेसी है, जो शुरुआत में अपरिपक्व, लापरवाह और अपराध की दुनिया में फंसा हुआ लड़का लगता है लेकिन कहानी आगे बढ़ती है तो समीकरण बदलने लगते हैं. दर्शक वॉल्टर से सवाल करने लगता है और जेसी के प्रति सहानुभूति बढ़ती जाती है यानी शो लगातार दर्शक की नैतिक स्थिति बदलता रहता है.

Advertisement

यहां स्काइलर व्हाइट का किरदार भी अहम है. वह वॉल्टर की पत्नी है. जैसे-जैसे उसे वॉल्टर की असलियत सामने आती है, परिवार, झूठ, डर और नैतिकता के बीच उसका संघर्ष सामने आता है. दर्शकों के रिएक्शन से भी रियलिटी चेक मिलता है कि हम एंटी हीरो के साथ कितनी आसानी से जुड़ जाते हैं, लेकिन सवाल करने वाले किरदार को अलग नजर से देखने लगते हैं. इस लिहाज से ब्रेकिंग बैड सिर्फ वॉल्टर की कहानी नहीं, बल्कि उसके आसपास मौजूद लोगों पर उसके फैसलों की कीमत की कहानी भी है. 

ब्रेकिंग बैड आपको सिर्फ यह नहीं बताता कि आगे क्या होगा, बल्कि बार-बार यह डर पैदा करता है कि अब सब कुछ बिगड़ने वाला है. एक छोटी सी गलती से पूरी दुनिया तबाह हो सकती है. एक झूठ पकड़ा जा सकता है. कोई गलत व्यक्ति सही जगह पहुंच सकता है. कोई फोन कॉल पूरी कहानी बदल सकती है. यही लगातार बना रहने वाला खतरा दर्शक को स्क्रीन से बांधे रखता है.

दिलचस्प बात यह है कि नेटफ्लिक्स ने 2015 में अपने शुरुआती स्ट्रीमिंग डेटा के आधार पर बताया था कि ब्रेकिंग बैड के दर्शक पायलट एपिसोड के बजाय सीजन के दूसरे एपिसोड तक आते-आते खासतौर पर शो से हुक हो रहे थे. वॉल्टर की हर छोटी हरकत बाद में नया अर्थ लेने लगती है. उसके संवाद, पिंकमैन के साथ उसका व्यवहार, परिवार से कही गई बातें, उसके छोटे-छोटे फैसले सब कुछ उस अंत की रोशनी में अलग दिखाई देता है जिसे दर्शक पहले से जानता है. यही कारण है कि शो रिवॉच फ्रेंडली बनता है. आप बार-बार इस शो की तरफ कहानी की वजह से नहीं लौटते बल्कि किरदारों को समझने वापस आते हैं.

Advertisement
ब्रेकिंग बैड का एक सीन.

इस शो की विजुअल लैंग्वेज भी इसकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है. फिर चाहे वह पीले हैजमेट सूट हो, रेगिस्तान, आरवी, नीला मेथ, न्यू मेक्सिको का रेगिस्तान और हाइजनबर्ग की हैट ब्रेकिंग बैड ने अपने किरदारों और दुनिया को ऐसे विजुअल सिंबल दिए जो शो के बाहर भी पहचान में आने लगे.

अगर वॉल्टर व्हाइट शुरुआत से ही खलनायक होता तो कहानी इतनी परेशान करने वाली नहीं होती. परेशानी इसलिए होती है क्योंकि हम उसमें अपने समाज के बहुत परिचित भाव देखते हैं. कम आंका जाना, सम्मान की इच्छा, आर्थिक असुरक्षा, परिवार के लिए कुछ करने की बेचैनी, अपनी प्रतिभा के साथ हुए कथित अन्याय की भावना और आखिर में यह विश्वास कि मैं जो कर रहा हूं, उसके पीछे एक वजह है. इंसान अपने गलत फैसलों को अक्सर गलत फैसला मानकर नहीं लेता. वह उन्हें जरूरी फैसला समझकर लेता है.

ब्रेकिंग बैड इसी मनोविज्ञान को पकड़ता है और शायद आज के दर्शक के लिए यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. हम ऐसे दौर में रह रहे हैं जहां एंटी हीरो कल्चर नया नहीं रहा. दो सोपरानोज, द वायर और सक्सेशन जैसे शो ने अपने-अपने तरीके से जटिल किरदारों को केंद्र में रखा है  फिर भी वॉल्टर व्हाइट की यात्रा इसलिए अलग खड़ी होती है क्योंकि उसका ट्रांसफोर्मेशन बेहद स्पष्ट है कि एक आदमी धीरे-धीरे वह बनता जा रहा है, शुरुआत में जो हम सोच भी नहीं सकते थे.

Advertisement

वॉल्टर हमेशा अपने फैसलों के लिए कोई वजह ढूंढ लेता है. परिवार, पैसा, बीमारी या परिस्थितियां लेकिन धीरे-धीरे दर्शक समझने लगता है कि वजह और बहाना एक ही चीज नहीं होते. यही वह बिंदु है जहां ब्रेकिंग बैड एक क्राइम सीरीज से आगे निकल जाता है. यह सत्ता, पुरुष अहंकार, महत्वाकांक्षा, परिवार, अपराध और नैतिकता पर बनी कहानी बन जाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »