उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है. यह सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है. 2027 के विधानसभा चुनाव की दशा और दिशा तय करने वाला पहला बड़ा राजनीतिक अखाड़ा मॉनसू सत्र बनने जा रहा है. योगी सरकार अपने साढ़े 9 साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड लेकर सदन में उतरेगी, तो विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए सवालों की लंबी फेहरिस्त के उतर रही है.
यूपी में चार दिन तक चलने वाले मॉनसत्र सत्र में योगी सरकार अनुपूरक बजट पेश करने के साथ-साथ कई विधेयक को पास कराने की जुगत में है. वहीं, सपा और कांग्रेस ने राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा चोरी से लेकर छात्र आंदोलन के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है.
2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार इस सत्र के दौरान कई लोकलुभावन घोषणाएं और महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है, वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने मानसून सत्र को लेकर अपने तेवर जाहिर कर दिए हैं.
योगी सरकार सदन से सेट करेगी एजेंडा
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वित्त मंत्री 4 अगस्त को अनुपूरक बजट पेश करेंगे. इसके अगले दिन अन्य विधायी कार्यों को निपटाया जाएगा, और 6 अगस्त को अनुपूरक बजट पर विस्तृत चर्चा के बाद सरकार इसे पास कराएगी. सत्र के दौरान सरकार पिछले सत्र के बाद लाए गए 9 अध्यादेशों के स्थान पर उनके प्रतिस्थानी विधेयक और कुछ नए विधेयक पारित कराएगी.
सरकार विभिन्न विभागों के CAG (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) के प्रतिवेदन और संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी सदन में पेश की जाएगी. संभल को योगी सरकार 2027 के लिए सियासी प्रयोगशाला बनाने के जुगत में है. ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले संभल हिंसा की रिपोर्ट को पेश कर सपा को सियासी कठघरे में खड़े करने का प्लान है.
बीजेपी विधायक और योगी सरकार के मंत्रियों ने अपने बयान से साफ कर दिया है कि सपा को सियासी कठघरे में खड़ा करने का काम करेंगे. बीजेपी विधायक ने साफ कहा कि मॉनसून सत्र में 2017 से पहले ही सपा सरकार के दौरान हुई मुद्दों को उठाएंगे और बताएंगे कि कैसे बीजेपी सरकार में शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है. कानून व्यवस्था बेहतर हुई है.
चंदा चोरी के साय में यूपी का मॉनसून सत्र
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का पारा अभी से चढ़ने लगा है. राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा और सत्ताधारी बीजेपी के बीच सियासी संघर्ष देखने को मिल रहा है. 'चंदा चोरी' के आरोपों और 'छात्रों-युवाओं के आंदोलनों' को लेकर सपा और बीजेपी के बीच सियासी रार विधानसभा में देखने को मिल सकता है. सपा ने सदन से सड़क तक सरकार को घेरने का प्लान बना रखा है.
यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने मानसून सत्र को लेकर कहा कि हम इस दौरान सभी मुद्दों को उठाने की कोशिश करेंगे. प्रदेश में मुख्य मुद्दा बिजली का है. हर गांव तक बिजली नहीं पहुंचती है. अभी किसानों को खाद की जरूरत है और यह मुद्दा भी उठाया जाएगा. बेरोजगारी की समस्या भी है. इन सभी मुद्दों पर अन्य विषयों के साथ चर्चा की जाएगी. चंदा चोरी के मुद्दे पर सपा ने सरकार को घेरने का प्लान बना रखा है. सपा अयोध्या में राममंदिर में चढ़ावा चौरी के मुद्दे को भी सपा प्रमुखता से उठाएगी.
पेपर लीक को सपा बनाएगा सियारी हथियार
नीट के पेपर लीक के बाद दिल्ली में उपजे आंदोलन की गूंज यूपी के सदन में भी सुनाई पड़ सकती है. विपक्ष भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को हवा देने के लिए तैयार है, रामपुर में आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय पर मंडरा रहे संकट के बदल को लेकर भी विपक्ष सरकार पर बरसने को तैयार है. इसलिए, सदन में तीखी बहस और कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल सकता है.
सपा विधायक अताउर्रहमान ने मानसून सत्र को लेकर कहा कि पिछले एक साल से अधिक समय से बीजेपी सरकार ने शिक्षा, महंगाई, डीजल और पेट्रोल की कीमतों और E20 मुद्दे पर केवल झूठे वादे किए हैं. मॉनसून सत्र में हमारे मुख्य मुद्दे किसान, शिक्षा (जिसमें स्कूलों को बंद करने का प्रस्ताव) भी शामिल है) बीजेपी सरकार जनता से जुड़े मुद्दों जैसे सामाजिक न्याय, भ्रष्टाचार और अन्य अहम चिंताओं पर विपक्ष के सवालों से बचना चाहती है, जिसके लिए ही सदन को महज 4 दिन का ही रखा है. सपा विधायक ने कहा कि हम सदन में यूपी में बंद किए गए सरकारी स्कूलों का मुद्दा उठाएंगे.
बंद हुए 26 हजार स्कूल बंद का मुद्दा गर्माएगा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार से शुरू हो रहे विधानमंडल सत्र से एक दिन पहले योगी सरकार को घेरा है. उन्होंने प्रदेश में बंद हुए बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का आंकड़ों पेश किया. अखिलेश ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए मर्जर के नाम पर 26,386 स्कूल बंद किए हैं. इसी प्रकार कक्षा एक से आठ तक के 1.40 लाख शिक्षकों के स्वीकृत पदों को सरकार ने कम कर दिया है. प्राइमरी स्कूलों के 62,465 शिक्षकों की संख्या कम हुई है.
अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य के सात हजार स्कूलों में बिजली नहीं हैं. 23 हजार स्कूलों में छात्राओं के लिए सक्रिय शौचालय की व्यवस्था नहीं है. 576 स्कूलों में पेयजल की सुविधा नहीं है. करीब 23 हजार स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा विद्यार्थियों को उपलब्ध नहीं है. अखिलेश यादव ने सरकारी डेटा के साथ योगी सरकार को कठघरे में खड़े करते नजर आए.
उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार में 26000 सरकारी स्कूल बंद किए गए और 20 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं. इतना ही नहीं 12000 से अधिक पिछड़ों व दलितों के लिए आरक्षण पद की भी चोरी हुई है. सपा प्रमुख ने कहा कि राज्य में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. इस मुद्दे को सपा विधान सभा में उठाकर सरकार की दावों की पोल खोलेगी. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में 28.32 लाख विद्यार्थियों का नामांकन घटा है, इनमें 16 लाख छात्राएं भी शामिल हैं. भाजपा सरकार ने एक भी शिक्षक की भर्ती साढ़े नौ वर्षों नहीं की है, जबकि 81,821 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं.
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