उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और जनसत्ता दल के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की मुलाकात ने नए सियासी समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है. 18 अक्टूबर को पंकज चौधरी अचानक लखनऊ स्थित राजा भैया के आवास ‘रामायण’ पहुंचे. दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को लेकर भले ही कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और राजा भैया के बीच नजदीकियां बढ़ने की संभावनाओं को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है.
MLC चुनाव के बीच मुलाकात के क्या मायने?
इस मुलाकात की तात्कालिक वजह 11 सीटों पर हो रहे विधान परिषद सदस्य (MLC) चुनाव को माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि कई सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है. ऐसे में राजनीतिक दलों और प्रभावशाली नेताओं के बीच संपर्क और समर्थन की संभावनाएं अहम हो जाती हैं. राजा भैया की शिकायत थी कि बीजेपी उन्हें उतनी तवज्जो नहीं देती जबकि वह बसपा और कांग्रेस से बड़े दल हैं. राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल के पास दो विधायक और एक एमएलसी हैं. वहीं, कांग्रेस के पास दो विधायक है, पहले बसपा के पास सिर्फ एक विधायक थे, हालांकि रसड़ा से विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन के बाद बसपा के पास एक भी विधायक नहीं है . इस लिहाज से जनसत्ता दल की राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज करना भाजपा के लिए आसान नहीं माना जा रहा है. ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष का खुद उनके आवास पर पहुंचना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हिंदुत्व के मुद्दे पर राजा भैया का रुख बना अहम
राजा भैया और भाजपा के संभावित समीकरणों की चर्चा केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ समय में हिंदुत्व और हिंदू हितों से जुड़े मुद्दों पर राजा भैया का रुख भी चर्चा में रहा है. राम मंदिर से जुड़े विषयों से लेकर हिंदुत्व के समर्थन में उनके बयानों तक, विधानसभा में भी वह इन मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखते रहे हैं. राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा के लिए राजा भैया के साथ बेहतर तालमेल की संभावनाएं तलाशने के पीछे यह पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकता है. हालांकि, दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
2027 से पहले गठबंधन की जमीन तैयार करने की कोशिश?
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने समीकरण मजबूत करने की कोशिश करेंगे. ऐसे में पंकज चौधरी और राजा भैया की मुलाकात को भविष्य की संभावनाओं के लिहाज से भी देखा जा रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजा भैया के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारे थे. दो सीटों पर भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी. यह स्थिति बताती है कि कुछ क्षेत्रों में जनसत्ता दल की मौजूदगी भाजपा के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद बढ़ना आने वाले समय में राजनीतिक तालमेल का रास्ता खोल सकता है. हालांकि, अभी इसे किसी औपचारिक गठबंधन का संकेत मानना जल्दबाजी होगी. फिलहाल इस मुलाकात को राजा भैया तक भाजपा की पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. एमएलसी चुनाव के बीच शुरू हुई यह चर्चा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी.
कुमार अभिषेक