उत्तर प्रदेश में बढ़ती चुनावी सरगर्मी के बीच समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आजम खान से मुलाकात करने सपा महासचिव शिवपाल यादव ने बुधवार को रामपुर पहुंचे. रामपुर की जेल में बंद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से शिवपाल यादव ने मुलाकात किया. इस दौरान शिवपाल और आजम के बीच एक घंटे तक बातचीत हुई.
रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद शिवपाल यादव सीधे रामपुर में उनके घर पहुंचे. यहां उन्होंने आजम खान की पत्नी पूर्व सांसद तंजीन फातिमा और उनके बड़े बेटे अदीब आजम से मुलाकात की है. इसके बाद शिवपाल यादव रामपुर में मौलाना अली जौहर युनिवर्सिटी भी पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बैठक कर रहे.
यूपी की चुनावी तपिश के बीच शिवपाल यादव का अचानक रामपुर जाना और आजम परिवार से मुलाकात करने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. शिवपाल ने ऐसे समय में मिलने रामपुर पहुंचे हैं, जब आजम खान और उनके समर्थक इन दिनों अखिलेश यादव से नाराज बताए जा रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आजम और अखिलेश के बीच चल रहे 'कोल्ड वॉर' को खत्म कराने के लिए शिवपाल रामपुर पहुंचे हैं?
आजम खान से शिवपाल यादव ने की मुलाकात
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम लंबे समय से रामपुर जेल में बंद है. आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ 17 नवम्बर 2025 को कोर्ट ने फर्जी पैन कार्ड मामले में फैसला सुनाया था. कोर्ट ने 7-7 साल की सजा सुनाई थी.सपा के महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने बुधवार को अचानक रामपुर जेल पहुंचे, जहां समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने उनका स्वागत किया.
शिवपाल यादव सीधे जिला जेल के अंदर गए, जहां उन्होंने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की. सुबह साढ़े दस बजे से साढ़े 11 बजे तक शिवपाल और आजम खान की मुलाकात रही. रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद शिवपाल यादव रामपुर उनके घर पहुंचे, जहां पर आजम के परिवार से मिले. इसके बाद शिवपाल यादव जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों के साथ वार्ता की. हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
आजम खान-शिवपाल यादव के मुलाकात के मायने
आजडम खान से शिवपाल यादव ऐसे समय रामपुर जेल मिलने पहुंचे हैं, जब रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा मामला गर्म है. इसके अलावा आजम खान और सपा सांसद मोहिबुल्लाह गुट में तनाव चल रहा है. आजम खान की नाराजगी के बावजूद अपना दल के कुछ नेताओं को मोहिबुल्लाह नदवी ने डिंपल यादव के जरिए सपा में शामिल करा दिया है, जिसे लेकर आजम के समर्थक नाराज है.
सपा में शामिल होने वालों में एक नाम अपना दल एस के प्रदेश महासचिव मोहम्मद वकील एडवोकेट का है. जो आजम खान के विरोधी माने जाते. इस बात की जानकारी आजम के करीबियों को लगी उन्होंने इस पर आपत्ति जताई. उनके समर्थकों का कहना है कि आजम खान के दुश्मनों को इस तरह पार्टी में शामिल किया जाना और उनके समानांतर सिस्टम तैयार करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
आजम गुट की सपा सांसद डिंपल यादव से नाराजगी के बीच शिवपाल यादव रामपुर दौरे पर पहुंचे. इस दौरान आजम खान के साथ-साथ उनके परिवार से मुलाक़ात किया. इसके अलावा जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी मुलाक़ात कर यह संदेश दिया कि आजम खान के साथ मजबूती से खड़े हैं. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने शिवपाल के जरिए आजम खान को अपने मैसेज भेजा है. इसीलिए शिवपाल की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है.
आजम-अखिलेश का 'कोल्ड वॉर' खत्म होगा?
आजम खान और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच उपजी सियासी कड़वाहट या 'कोल्ड वॉर' को खत्म कराने के लिए शिवपाल सिंह यादव की भूमिका अहम हो सकती है. शिवपाल यादव के रिश्ते अखिलेश यादव और आजम खान, दोनों से ही काफी गहरे और पुराने रहे हैं. शिवपाल यादव एक तरह अखिलेश यादव के चाचा हैं तो दूसरी तरफ मुलायम सिंह के दौर से आजम खान के पुराने साथी है.
आजम खान से लगातार जेल में मिलने पहले भी शिवपाल जाया करते थे, क्योंकि आजम खान के साथ उनकी दशकों पुरानी व्यक्तिगत और राजनीतिक नजदीकी रही है, जबकि अखिलेश यादव के साथ वे पार्टी संगठन में वरिष्ठ नेता के तौर पर मजबूती से खड़े हैं. ऐसे में वे दोनों पक्षों के बीच संवाद का जरिया बनकर दूरियां मिटाने के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा माने जा रहे हैं. रामपुर जेल में जाकर आजम खान से मिलकर अखिलेश यादव के साथ उनके रिश्ते को सियासी पटरी पर लाना चाहते हैं.
मुस्लिम वोट बैंक और पार्टी में एकजुटता का संदेश
उत्तर प्रदेश की सियासत में आजम खान आज भी मुसलमानों के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. आगामी चुनावों को देखते हुए सपा किसी भी सूरत में अपने पारंपरिक मुस्लिम समीकरण को कमजोर नहीं होने देना चाहती. आजम खान और सपा शीर्ष नेतृत्व के बीच नाराजगी की खबरें बाहर आती हैं,तो इससे पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाता है. शिवपाल की कोशिश इस कड़वाहट को दूर कर पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने की है.
अखिलेश यादव भी यह अच्छी तरह समझते हैं कि आजम खान की वरिष्ठता और रामपुर व रुहेलखंड क्षेत्र में उनके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. शिवपाल यादव को आगे करके वे न सिर्फ आजम खान को सम्मानजनक स्थिति देना चाहते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने न आएं. शिवपाल यादव के जरिए वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर कर सपा के कुनबे को एक साथ बांधे रखने का प्रयास माना जा रहा है.
कुबूल अहमद