डिलीवरी पार्टनर बनने के लिए कैसे मिलती है किराये की स्कूटी? होगा घाटा या नुकसान

कई डिलीवरी पार्टनर या राइडर्स के पास अपना वाहन नहीं होता है, ऐसे में वो किराये की स्कूटी से भी ये काम कर सकते हैं. कई शहरों में इस तरह की स्कूटी की सर्विस होती है, अक्सर क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ही अपनी तरफ से आपको किराये पर स्कूटी या बाइक दिलवाते हैं, जिसकी एक फीस लगती है.

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दिल्ली-एनसीआर में कई कंपनी किराये पर स्कूटी देती हैं. (AI Generated Image) दिल्ली-एनसीआर में कई कंपनी किराये पर स्कूटी देती हैं. (AI Generated Image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

मेट्रो सिटीज़ में साइड इनकम या तुरंत इनकम के लिए लोग डिलीवरी पार्टनर की जॉब भी कर रहे हैं और बाइक टैक्सी भी चला रहे हैं. लेकिन डिलीवरी पार्टनर्स या गिग वर्क शुरू करने वाले ड्राइवरों के सामने एक बड़ा सवाल रहता है कि अपनी बाइक इस्तेमाल करें या किराए या लीज़ पर वाहन लें. इस तरह का काम शुरू करने से पहले दोनों विकल्पों का हिसाब समझना जरूरी है, क्योंकि शुरुआती लागत, रोज का खर्च, दस्तावेज़ और कमाई पर असर, सब कुछ इसी फैसले से जुड़ा है.

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अगर आपके पास पहले से बाइक, स्कूटर या साइकिल है, तो अलग से शुरुआती शुल्क नहीं देना पड़ता. वहीं अगर अपना वाहन नहीं है, तो स्विगी जैसी कई कंपनियां वेंडर्स के जरिए बाइक, ई-बाइक या साइकिल किराए पर लेने का विकल्प देती हैं. ऐसे में शुरुआत आसान हो सकती है, लेकिन किराए की रकम आपकी कमाई से जुड़ जाती है.

किराये की स्कूटी से फायदा या घाटा?
अपनी बाइक के साथ सबसे बड़ा फायदा यह है कि किराए या दैनिक लीज़ का अलग बोझ नहीं होता. लंबी अवधि में यह ज्यादा लाभदायक और बचत वाला विकल्प बताया गया है. वैसे इसका मतलब ये भी है कि पेट्रोल, रोज का रखरखाव और सर्विसिंग का खर्च आपको खुद उठाना होगा. इसके साथ वाहन के वैध दस्तावेज़ रखना भी जरूरी है. इनमें आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र या पीयूसी शामिल हैं.

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एक दूसरा मॉडल किराए का है. किराए या ईवी या ई-बाइक वाले विकल्प में बिना वाहन के भी काम शुरू किया जा सकता है. इस मॉडल में आपको दैनिक या साप्ताहिक आधार पर तय किराया, यानी रेंट या लीज़ फी देनी होती है. कई ई-बाइक और ई-स्कूटर के मामलों में पेट्रोल का खर्च बच जाता है, और बैट्री स्वैपिंग या मेंटेनेंस का खर्च रेंटल कंपनी संभालती है. लेकिन इसका नुकसान ये है कि हर हफ्ते किराए की तय रकम आपकी कमाई से घटती है, जिससे कुल शुद्ध आय, यानी नेट प्रॉफिट, कम हो सकता है.

अलग-अलग प्लेटफॉर्म के नियमों के हिसाब से डिलीवरी या राइड सर्विस शुरू करने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र या निवास प्रमाण, जैसे वोटर कार्ड या पैन कार्ड, और बैंक खाते की जरूरत होती है. स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म में ऑनबोर्डिंग फी लगभग ₹1500 बताई गई है, जो अलग-अलग शहरों के हिसाब से बदल सकती है, और यह किस्तों में कमाई से कटती है. 

किस तरह मिलती है स्कूटी?

ज़ेप्टो, रैपिडो, उबर और स्विगी जैसी कंपनियां वीकली आधार पर कमाई सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर करती हैं. इसके साथ सभी यातायात नियमों का पालन अनिवार्य है. इसमें हमेशा हेलमेट पहनना, वैध लाइसेंस और बीमा रखना, और किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन न करना शामिल है. कुल मिलाकर, अगर आपके पास पहले से बाइक है तो उसी से शुरुआत करना ज्यादा फायदे का बताया गया है. लेकिन अगर शुरुआती पूंजी या वाहन नहीं है, तो ई-बाइक या किराए की बाइक से काम शुरू करके बाद में अपनी बाइक खरीदना एक बेहतर रणनीति हो सकती है.

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दिल्ली-एनसीआर जैसी जगहों पर Bounce Daily or Zypp Electric जैसी कंपनी हैं, जो क्विक कॉमर्स कंपनियों के साथ जुड़ी होती हैं और प्रति दिन के हिसाब से इलेक्ट्रिक स्कूटी वगैरह किराए पर देती हैं. यहां करीब 250 रुपये प्रति दिन या इसके आसपास हर रोज़ का किराया शुरू होता है.

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