क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) यानी ऐसी ऑनलाइन डिलीवरी सर्विस, जिसमें ग्राहक रोजमर्रा का सामान बहुत कम समय में घर मंगवा सकते हैं. इसमें दूध, ब्रेड, फल, सब्जियां, स्नैक्स, किराना सामान, पर्सनल केयर प्रोडक्ट और घर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें शामिल होती हैं.
आज के समय में लोगों की जिंदगी काफी तेज हो गई है. ऐसे में खरीदारी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है. पहले घर का सामान लेने के लिए बाजार जाना पड़ता था या ऑनलाइन ऑर्डर करने के बाद कई दिन तक इंतजार करना पड़ता था. अब क्विक कॉमर्स ने इस पूरी प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है.
क्विक कॉमर्स कंपनियां आमतौर पर शहर के अलग-अलग इलाकों में छोटे स्टोर या डार्क स्टोर बनाकर रखती हैं. इन जगहों पर रोजमर्रा की जरूरत का सामान पहले से रखा जाता है. जैसे ही ग्राहक ऐप पर ऑर्डर करता है, पास के स्टोर से सामान पैक किया जाता है और डिलीवरी पार्टनर उसे ग्राहक के घर तक पहुंचाता है.
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेजी है. अगर घर में अचानक दूध, आटा या कोई दूसरा जरूरी सामान खत्म हो जाए, तो बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती. मोबाइल से ऑर्डर करके कुछ ही समय में सामान घर पहुंच सकता है.
हालांकि क्विक कॉमर्स की सुविधा के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं. तेज डिलीवरी के लिए कंपनियों को ज्यादा डिलीवरी पार्टनर और छोटे-छोटे स्टोर की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा ग्राहक को कई बार डिलीवरी फीस, प्लेटफॉर्म फीस या दूसरे अतिरिक्त चार्ज भी देने पड़ सकते हैं.
बड़े शहरों में क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. खासकर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और ऐसे परिवारों के बीच इसकी मांग देखी जाती है, जिन्हें कम समय में जरूरी सामान चाहिए.
स्विगी, जेप्टो से लेकर रैपिडो और उबर तक हर प्लेटफॉर्म अपने डिलीवरी पार्टनर को कई सुविधाएं देते हैं. मेडिकल सुविधाएं हर प्लेटफॉर्म अपनी ओर से उपलब्ध नहीं कराता है. इसके लिए आपको हर प्लेटफॉर्म के नियमों की जानकारी होनी चाहिए...
गिग वर्कर इकॉनोमी पिछले कुछ वक्त में काफी बूम कर रही है. अगर आपके पास स्मार्टफोन है, तो आप भी बेहद आसानी से इसका हिस्सा बन सकते हैं. एक बड़ी संख्या में मेट्रो सिटीज़ में लोग कई तरह के प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे हैं, जिसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह की है.
डिलीवरी बॉय का काम इतना भी आसान नहीं है, क्यूंकि आपको लगातार 8 से 10 घंटे फील्ड पर रहना पड़ता है. किसी भी डिलीवरी बॉय या बाइक टैक्सी राइडर को प्लेटफॉर्म के कई नियमों को फॉलो करना पड़ता है, ऐसा नहीं करने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है.
डिलीवरी पार्टनर या गिग वर्कर की जॉब इतनी आसान भी नहीं हैं. भले ही ऐसी कहानियां मिलती हैं कि कोई व्यक्ति सिर्फ ये काम करके हज़ारों कमा रहा है, लेकिन कंपनी की नियम और शर्तों को ध्यान से पड़ने पर कई तरह की चीज़ें सामने आती हैं.
जेप्टो, रैपिडो और स्नैबिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम शुरू करने से पहले वर्कर्स के लिए 5 जरूरी नियम समझना जरूरी है. इन नियमों में धोखाधड़ी, कागजात, सुरक्षा, व्यवहार और निजी जानकारी से जुड़ी शर्तें शामिल हैं, जिनकी अनदेखी पर आईडी ब्लॉक, बैन या कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
घरेलू कामकाज करके भी महिलाओं के लिए अब कमाई के बेहतर रास्ते खुल रहे हैं. गिग वर्कर इकॉनोमी ने मेट्रो सिटीज़ में ऐसे कई मौके दिए हैं, यहां करीब 2 से 3 दिन की ट्रेनिंग के बाद ये अवसर आता है.
हाउसहेल्प का काम अब पूरी तरह से प्रोफेशनल और एप बेस्ड हो गया है. मेट्रो सिटीज़ में ऐसी एप जो दस मिनट के भीतर आपके घर पर हाउसहेल्प को भेजती हैं, वो ट्रेंड में हैं. कई महिलाएं, लड़कियां और पुरुष भी इनके ज़रिए अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं और ये कमाई का बेहतर ज़रिया बना है.
कभी टेक्निशियन और मज़दूरी का काम करने वाले डिलीवरी राइडर्स ने अपनी कहानी बताई है. किस तरह इस फील्ड से जुड़कर वो रेगुलर 40 हज़ार से ज्यादा की कमाई कर पा रहे हैं. एक इंटरव्यू में इन्होंने कमाई के पूरे प्रोसेस को समझाया.
डिलीवरी पार्टनर के सामने किराये की बाइक लेकर काम करने का ऑप्शन हमेशा रहता है. ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म खुद ही थर्ड पार्टी के ज़रिए ये सुविधा मुहैया कराते हैं, हालांकि एक सवाल ये है कि अपनी बाइक या किराये की बाइक में क्या ज्यादा फायदेमंद है.
डिलीवरी बॉय बनकर कई लोग अपने परिवार की मदद कर रहे हैं, क्योंकि यहां आसानी से कमाई का एक मौका मिल जाता है. ऐसी ही एक कहानी बिहार के लक्ष्मण कुमार की है, जो एक महीने के करीब 50 से 60 हज़ार रुपये कमा रहे हैं.
ब्लिंकिट, जेप्टो, फ्लिपकार्ट जैसे कई क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपने राइडर्स को अच्छी खासी कमाई का मौका देते हैं. डिलीवरी पार्टनर एक दिन में 1000 से 1500 की कमाई कर सकते हैं, लेकिन तमाम खर्चों के बाद उनकी जेब में कितना रुपया बचता है, इसका गणित आप यहां समझ सकते हैं.
गिग वर्कर्स को अलग-अलग प्लेटफॉर्म के अनुसार हर हफ्ते या हर 15 दिन में पेमेंट मिलती है. एक ऑर्डर की पूरी कमाई में प्लेटफॉर्म का कमीशन, टैक्स वगैरह चीज़ें शामिल होती हैं और उसके बाद डिलीवरी पार्टनर के हाथ में कुछ आता है.
डिलीवरी पार्टनर या बाइक टैक्सी राइडर्स के कई ऐसे खर्च होते हैं, जो प्लेटफॉर्म शुरुआत में सामने नहीं रखते हैं. कई जगह खर्च खुद से भी करना पड़ता है, ऐसे में महीने में होने वाली नेट कमाई ग्रॉस कमाई से काफी अलग हो सकती है.
डिलीवरी पार्टनर की ज़िंदगी आसान भी नहीं है और ना ही बहुत ज्यादा बंपर कमाई है. कई यूट्यूब वीडियोज़ में और प्लेटफॉर्म्स पर दी गई जानकारी में रोज़ाना की कमाई और सामने आने वाले खर्च, मुश्किलों पर बात की गई है.
ब्लिंकिट, जेप्टो, रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म किसी भी डिलीवरी पार्टनर को कमाई का भरपूर मौका देते हैं. हर रोज़ 8-10 घंटे बाइक टैक्सी चलाने के बाद आखिर कमाई कितनी होती है और कितना कमीशन कटता है, ये सवाल हर किसी के मन में रहता है. यहां समझने की कोशिश करते हैं...
डिलीवरी पार्टनर या राइडर का काम आसान नहीं है लेकिन यहां पर आपके पास एक बढ़िया ऑप्शन है. आप कितनी कमाई और कितनी देर काम करना चाहते हैं, ये आपके हाथ में है. कई डिलीवरी राइडर एक महीने में 50 हज़ार तक की कमाई कर रहे हैं, कमाई और कमीशन को लेकर क्या नियम हैं जानिए...
देश के अलग-अलग हिस्सों में रोज़गार की भाषा बदल गई है. अब सिर्फ सरकारी या प्राइवेट ऑफिस ही नहीं बल्कि गिग वर्कर बनकर भी लोग कमाई कर रहे हैं. कई प्लेटफॉर्म हैं जो किसी भी व्यक्ति को उनके साथ जुड़ने का मौका देते हैं, इसकी क्या प्रक्रिया होती है आप यहां समझ सकते हैं...
स्विगी, जोमैटो से लेकर ब्लिंकिट और जेप्टो तक कई कंपनियां अपने डिलीवरी पार्टनर को टीशर्ट, बाइक और बैग से लेकर कई सामान देते हैं. लेकिन क्या हो अगर डिलीवरी पार्टनर से ये सामान ही खराब हो जाए या फिर टूट जाए. तब उसकी भरपाई के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं.
कई डिलीवरी पार्टनर या राइडर्स के पास अपना वाहन नहीं होता है, ऐसे में वो किराये की स्कूटी से भी ये काम कर सकते हैं. कई शहरों में इस तरह की स्कूटी की सर्विस होती है, अक्सर क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ही अपनी तरफ से आपको किराये पर स्कूटी या बाइक दिलवाते हैं, जिसकी एक फीस लगती है.
डिलीवरी पार्टनर या राइडर बनना मौजूदा वक्त में मेट्रो सिटीज़ में तुरंत और आसानी से कमाई का ज़रिया बन गया है. लेकिन पहली कमाई से पहले ही बहुत से प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है, जैसे कि जॉइनिंग फीस से लेकर सिक्योरिटी डिपोज़िट तक. आप भी इनके बारे में जानिए…
डिलीवरी ऐप्स हो या फिर बाइक टैक्सी, दोनों ही प्लेटफॉर्म आपको फुल टाइम और पार्ट टाइम रोज़गार देने का ऑप्शन देते हैं. अलग-अलग प्लेटफॉर्म ने अपने हिसाब से कुछ नियम तय किए हैं, जिनका पालन करना ज़रूरी हो जाता है.