जेप्टो (Zepto) भारत की एक लोकप्रिय quick-commerce (त्वरित डिलीवरी) कंपनी है, जो शुरुआत में “10-मिनट में डिलीवरी” के वादे के लिए जानी जाती थी. लेकिन सरकार ने इस 10-मिनट टैगलाइन को हटाने का आदेश दिया है, ताकि डिलीवरी ब्वॉयज पर असुरक्षित दबाव न बने और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिले. इसके बाद Zepto और अन्य कंपनियों ने अपने ब्रांडिंग से “10-मिनट” का वादा हटा दिया है, हालांकि डिलीवरी की गति अभी भी तेज रखी जा रही है.
Quick-commerce सेक्टर में Blinkit, Swiggy Instamart, Flipkart Minis और Zepto जैसी कंपनियां लगातार तेजी से काम कर रही हैं, लेकिन अब उन्होंने 10-मिनट की मार्केटिंग हटाकर ब्रांडिंग अपडेट की है, जिसका मतलब यह है कि ग्राहक अब “निश्चित मिनटों में सामान” का वादा ऐप में नहीं देखेंगे.
Zepto का बिजनेस मॉडल ई-कॉमर्स और किराना सामान की आपूर्ति को ग्राहकों तक बहुत तेज और सुविधाजनक तरीके से पहुंचाने पर आधारित है. कंपनी देश के कई शहरों में तेजी से विस्तार कर रही है और अपने डार्क स्टोर्स और डिलीवरी नेटवर्क को बड़ा कर रही है. इसी वजह से Zepto को भारत में एक प्रमुख यूनिकॉर्न स्टार्ट-अप के रूप में देखा जाता है ला रहे हैं।
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto ने फ्री डिलीवरी के लिए मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़ाकर ₹199 कर दी है. अब इससे कम के ऑर्डर पर ग्राहकों से ₹30 डिलीवरी फीस ली जा रही है. यह बदलाव फिलहाल चुनिंदा शहरों और पिन कोड में लागू होता दिख रहा है. कंपनी का फोकस छोटे ऑर्डर्स की लागत घटाने और ऑर्डर इकोनॉमिक्स सुधारने पर है.
मुंबई में FDA ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता नियमों में गंभीर खामियां मिलने पर खार के Prince of Wales Restaurant, अंधेरी ईस्ट के Café Sifarish और चेंबूर के Zepto Limited के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिए.
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे ग्राहकों को दोहरी परेशानी हो रही है. जेप्टो, ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने चीनी की खरीद पर सीमा तय कर दी है. डीमार्ट और रिलायंस जैसे ऑफलाइन स्टोर्स ने भी ग्राहकों के लिए 2 से 3 किलो की सीमा लगाई है.
त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है. कई क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और ऑफलाइन स्टोर्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट दिखाई दे रही है. यानी ज्यादा कीमत चुकाने के बावजूद ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक चीनी नहीं खरीद पा रहे हैं.