रैपिडो (Rapido) भारत में इस्तेमाल होने वाला एक राइड बुकिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए लोग शहर के अंदर आने-जाने के लिए बाइक, ऑटो और कैब बुक कर सकते हैं. कंपनी की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. इसके संस्थापकों में ऋषिकेश एसआर, पवन गुन्टुपल्ली और अरविंद सांका शामिल हैं.
Rapido की पहचान शुरुआत में बाइक टैक्सी सेवा के तौर पर बनी. इसका मकसद शहरों में कम समय में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के लिए दोपहिया राइड उपलब्ध कराना था. ट्रैफिक वाले समय में बाइक से सफर करने का विकल्प कई लोगों के लिए उपयोगी रहा. समय के साथ प्लेटफॉर्म पर ऑटो और कैब की सुविधा भी जोड़ी गई. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, Rapido अब 400 से ज्यादा शहरों में मौजूद है.
Rapido पर राइड बुक करने के लिए यूजर मोबाइल ऐप में अपनी पिकअप और ड्रॉप लोकेशन डालता है. इसके बाद उपलब्ध राइड विकल्पों में से बाइक, ऑटो या कैब का चुनाव किया जा सकता है. ऐप पर किराये का अनुमान और राइड से जुड़ी जानकारी दिखाई जाती है. कई जगहों पर राइड की लाइव लोकेशन देखने और यात्रा की जानकारी साझा करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.
Rapido के साथ काम करने वाले ड्राइवरों को Captain कहा जाता है. कंपनी के अनुसार Captains स्वतंत्र सेवा प्रदाता होते हैं और प्लेटफॉर्म उन्हें ग्राहकों से जोड़ने का काम करता है. बाइक से जुड़ी सेवाओं के अलावा प्लेटफॉर्म पर पैकेज, फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं.
Rapido का एक अलग Captain ऐप भी है. इसके जरिए ड्राइवर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और जरूरी दस्तावेज जमा करके प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं. कंपनी के अनुसार Captains के लिए काम के घंटे तय नहीं हैं और वे अपनी सुविधा के हिसाब से काम कर सकते हैं.
जिस रैपिडो या उबर बाइक पर बैठकर हम अपने घर या ऑफिस जाते हैं. उन राइडर्स की कमाई कितनी होती है? उन्हें कितना मेहनत करना पड़ता है? क्या यह काम वो मजबूरी में कर रहे हैं या फिर अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए यह उनकी एक्स्ट्रा कमाई का जरिया है. कुछ राइडर्स से बातचीत के बाद ऐसी ही बेहद दिलचस्प बातें सामने आई हैं.
हैदराबाद के अमीरपेट में एक बस और एक रैपिडो बाइक की जोरदार टक्कर हो गई. इस टक्कर में रैपिडो सवार महिला की मौके पर ही मौत हो गई जबकि ड्राइवर को गंभीर चोटें आई हैं. वहीं, बस ड्राइवर को हिरासत में लिया गया है.
CCPA ने रैपिडो चलाने वाली कंपनी रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन पर डार्क पैटर्न और भ्रामक टिपिंग प्रॉम्प्ट के लिए 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. जांच में पता चला कि ऐप पर यात्रियों को बुकिंग के दौरान ज्यादा पैसे देने के लिए मानसिक दबाव डाला जाता था, जिसे "कन्फर्म शेमिंग" कहा गया.