देश के बड़े शहरों में 10-15 मिनट में राशन और सामान पहुंचाने का चलन तेजी से बढ़ा है. जेप्टो और ब्लिंकिट जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियां आज लाखों युवाओं को काम का मौका दे रही हैं. अगर आपके पास टू-व्हीलर और स्मार्टफोन है, तो आप इन ऐप्स पर डिलीवरी पार्टनर बनकर पार्ट-टाइम या फुल-टाइम कमाई कर सकते हैं.
लेकिन ये इतना आसान भी नहीं है, इन प्लेटफॉर्म्स के साथ काम शुरू करने से पहले नियम, जरूरी कागज, जॉइनिंग का तरीका और एग्रीमेंट की शर्तें समझना जरूरी है. ऑन-बोर्डिंग के समय कौन से डॉक्यूमेंट्स लगते हैं और कंपनी का लीगल स्ट्रक्चर क्या कहता है, यह जानना भी उतना ही जरूरी है.
जेप्टो/ब्लिंकिट जैसी वेबसाइट्स पर डिलिवरी पार्टनर बनने के लिए तमाम शर्तें दी गई हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद ही आप उनके साथ जुड़ सकते हैं. आप भी इन नियमों को ज़रूर जान लीजिए…
पते और पहचान के सत्यापन के लिए केवाईसी से जुड़े दस्तावेज भी जरूरी होते हैं. अगर आप मोटरबाइक का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है. वाहन का बीमा कराना भी जरूरी होता है.
किसी भी क्विक कॉमर्स ऐप सर्विस में जॉइनिंग की प्रक्रिया आम तौर पर ऐप डाउनलोड करने से शुरू होती है.
सबसे पहले स्मार्टफोन में डिलीवरी पार्टनर ऐप, जैसे जेप्टो पार्टनर ऐप, डाउनलोड करना होता है और मोबाइल नंबर के साथ बेसिक प्रोफाइल भरनी होती है.
इसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया में पैन, बैंक डिटेल्स और ड्राइविंग लाइसेंस अपलोड किए जाते हैं. फिर प्रतिनिधि से मुलाकात के जरिए बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है.
कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
ऑन-बोर्डिंग के समय डिलीवरी से जुड़ी जरूरी ट्रेनिंग दी जाती है. ट्रेनिंग और ऑन-बोर्डिंग फीस, टैक्स सहित, पेआउट से काटी या एडजस्ट की जा सकती है. इसके साथ डिलीवरी बैग, टी-शर्ट और जैकेट जैसे मर्चेंडाइज भी दिए जाते हैं. अकाउंट एक्टिवेट होने के बाद राइडर अपनी सुविधा के हिसाब से ऐप पर लॉगिन का समय, यानी शिफ्ट, चुनकर ऑर्डर पूरे करना शुरू कर सकता है.
अगर आप भी ऐसा कुछ करने की सोच रहे हैं तो क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर काम शुरू करने से पहले एग्रीमेंट की शर्तों को समझना बहुत जरूरी है. कंपनियों के टर्म्स एंड कंडीशंस में साफ लिखा होता है कि डिलीवरी पार्टनर कंपनी का कर्मचारी नहीं, बल्कि एक इंडिपेंडेंट सर्विस प्रोवाइडर होता है.
इसका मतलब ये है कि राइडर को सैलरी या पीएफ जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं. उसका पेआउट दूरी, टाइम, ट्रैफिक, मौसम और ऑर्डर्स के आधार पर तय होता है. कुल मिलाकर, डिलीवरी पार्टनर बनने के लिए पात्रता, दस्तावेज, जॉइनिंग प्रक्रिया और एग्रीमेंट की शर्तों को पहले से समझना जरूरी है.
(नोट: सभी जानकारी क्विक कॉमर्स वेबसाइट्स पर उपलब्ध डॉक्यूमेंट्स के आधार पर है.)
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