डिलीवरी पार्टनर या गिग वर्कर्स का काम भले ही आसान दिखता हो, लेकिन ये इतना भी आसान है नहीं. ट्रैफिक, धूप, बारिश और कोहरे के बीच लगातार कई घंटे सड़कों पर रहना और सामान डिलीवर करने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं. प्लेटफॉर्म से जुड़ने पर कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं, इन्हीं में से एक मेडिकल सुविधाएं भी हैं.
गिग वर्कर्स यानी डिलीवरी पार्टनर्स और कैप्टंस के इलाज, मेडिकल खर्च और इंश्योरेंस को लेकर सभी प्लेटफॉर्म्स पर एक जैसे नियम नहीं हैं. किसी भी प्लेटफॉर्म पर सभी वर्कर्स को मुफ्त मेडिकल या कैशलेस इलाज मिलने की गारंटी नहीं है.
इलाज और हॉस्पिटल के बिल की जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करती है कि पार्टनर किस कंपनी और किस योजना से जुड़ा है. कुछ प्लेटफॉर्म इंश्योरेंस या हेल्थ कवरेज देते हैं, जबकि कुछ के नियमों में वर्कर को अपने खर्च पर पॉलिसी खरीदनी पड़ती है.
क्या डिलीवरी पार्टनर को मुफ्त इलाज मिलता है?
सभी डिलीवरी पार्टनर्स को मुफ्त इलाज नहीं मिलता है. मुफ्त मेडिकल या कैशलेस इलाज की सुविधा कंपनी और उसकी योजना पर निर्भर करती है. अगल-अलग प्लेटफॉर्म कई तरह का दावा करते हैं.
प्रोंटो और स्नैबिट की व्यवस्था:
इनके डेटा के मुताबिक, दोनों प्लेटफॉर्म अपने पार्टनर्स को ₹2 लाख से लेकर ₹6 लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस या हेल्थ कवरेज देते हैं.
यस मैडम की व्यवस्था:
होम सर्विस प्लेटफॉर्म यस मैडम अपने पार्टनर्स को ₹1 लाख का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस और ₹5 लाख का लाइफ इंश्योरेंस देता है.
स्विगी का दावा:
स्विगी अपने पार्टनर्स और उनके परिवारों को ₹12 लाख तक का बीमा देने का दावा करता है.
जेप्टो के नियम:
जेप्टो के एग्रीमेंट के मुताबिक, डिलीवरी पार्टनर्स को अपने खर्च पर पर्सनल एक्सीडेंटल डेथ कवरेज और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदनी पड़ती है. इसके नियमों के अनुसार, डिलीवरी पार्टनर को अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का खर्च खुद उठाना होता है.
हॉस्पिटल का बिल कौन भरेगा?
अगर स्विगी, प्रोंटो या स्नैबिट जैसे किसी प्लेटफॉर्म ने अपने बेनिफिट प्रोग्राम के तहत हेल्थ या एक्सीडेंटल इंश्योरेंस दिया है, तो हॉस्पिटल के बिल का भुगतान पॉलिसी के दायरे और क्लेम के आधार पर होगा. यह भुगतान बीमा कंपनी या प्लेटफॉर्म से समर्थित माध्यम के जरिए किया जाएगा.
जेप्टो और रैपिडो में वर्कर की जिम्मेदारी
जेप्टो के नियमों के मुताबिक, डिलीवरी पार्टनर को हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अपने खर्च पर खरीदनी होती है. रैपिडो के बीमा क्लॉज अठारह के मुताबिक, कंपनी अपने फैसले पर कैप्टन का एक्सीडेंट इंश्योरेंस करवा सकती है. हालांकि, कंपनी बीमा पर खर्च की गई कोई भी रकम कैप्टन से वसूल सकती है.
इस तरह सभी गिग वर्कर्स के लिए मुफ्त इलाज या कंपनी की ओर से प्रायोजित बीमा तय नहीं है. जहां कंपनी की ओर से ऐसा बीमा नहीं मिलता, वहां दुर्घटना या बीमारी होने पर हॉस्पिटल का बिल वर्कर या उसके परिवार को अपनी जेब से भरना पड़ता है, जब तक उनके पास कोई व्यक्तिगत मेडिकल पॉलिसी न हो.
aajtak.in