रूस में नॉर्थ कोरियाई सैनिक तैनात, जेलेंस्की ने साउथ कोरिया से मांगा डिफेंस सिस्टम

यूक्रेन ने साउथ कोरिया से एयर-डिफेंस सिस्टम मांगे हैं क्योंकि नॉर्थ कोरिया रूस को और सैनिक भेज रहा है. जेलेंस्की ने रूस में 30-50 हजार नॉर्थ कोरियाई सैनिकों की तैनाती की आशंका जताई है.

Advertisement
रूस में नॉर्थ कोरियाई सैनिकों के तैनात होने से परेशान जेलेंस्की ने साउथ कोरिया से मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मांग रखी है. (Photo: Getty) रूस में नॉर्थ कोरियाई सैनिकों के तैनात होने से परेशान जेलेंस्की ने साउथ कोरिया से मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मांग रखी है. (Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हाल ही में साउथ कोरिया से एयर-डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की अपील की है. उनका कहना है कि रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है. यह मांग ऐसे समय आई है जब नॉर्थ कोरिया रूस के युद्ध में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है. 

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर बताया कि रूस के क्षेत्र में 30 से 50 हजार नॉर्थ कोरियाई सैनिकों को तैनात करने का फैसला हो चुका है. यह आंकड़ा उनके जुलाई के अनुमान 30 हजार से ज्यादा है. उन्होंने साउथ कोरिया से नजदीकी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यूक्रेन एयर-डिफेंस सिस्टम चाहता है. बदले में ड्रोन तकनीक तथा युद्ध के अनुभव साझा कर सकता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: तेजस फाइटर जेट के लिए अमेरिकी इंजन आने में हुई देरी तो DRDO ने पलट दी बाजी

नॉर्थ कोरिया रूस के साथ अपने सैन्य सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है. 2024 में किम जोंग-उन और व्लादिमीर पुतिन के बीच रणनीतिक साझेदारी समझौते के बाद प्योंगयांग ने करीब 20 हजार सैनिक और इंजीनियर भेजे थे, खासकर कुर्स्क क्षेत्र में. 

साउथ कोरियाई खुफिया अनुमान के अनुसार इनमें से करीब 6,000 मारे या घायल हुए हैं. अब यूक्रेनी सैन्य खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि नॉर्थ कोरियाई मिसाइल यूनिट पश्चिमी रूस में तैनात हो रही है, जिसमें करीब 90 कर्मी, छह लॉन्चर और 120 बैलिस्टिक मिसाइल शामिल हो सकते हैं. 

विशेषज्ञों का मानना है कि नॉर्थ कोरिया रूस से आधुनिक सैन्य तकनीक हासिल करना चाहता है. अगर और 30-50 हजार सैनिक भेजे गए तो खासकर विशेष बलों को नुकसान होने से प्योंगयांग की अपनी क्षमता कमजोर हो सकती है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: ईरान जंग में ट्रंप को 1.23 लाख करोड़ का नुकसान, 20 अमेरिकी अड्डों पर तबाही

साउथ कोरिया की दुविधा

साउथ कोरिया के लिए यह फैसला आसान नहीं है. सियोल ने यूक्रेन को ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा में मदद दी है, लेकिन घातक हथियारों की आपूर्ति पर कानूनी और नीतिगत प्रतिबंध हैं. घरेलू कानून युद्ध में शामिल देशों को हथियार बेचने पर रोक लगाते हैं. उत्पादन क्षमता भी सीमित है. 

साउथ कोरिया अपनी जरूरतों और अन्य देशों की मांग को पूरा करते हुए यूक्रेन के लिए अतिरिक्त सिस्टम जल्दी नहीं बना सकता. भू-राजनीतिक रूप से भी जोखिम है. यूक्रेन युद्ध पर प्रतिबंधों के बाद रूस के साथ सियोल के संबंध बिगड़े हैं, जबकि मास्को-प्योंगयांग गठबंधन और गहरा रहा है. एयर-डिफेंस सिस्टम देने से रूस से संबंध और खराब हो सकते हैं. 

यह स्थिति एशिया और यूरोप दोनों के लिए चिंता का विषय है. नॉर्थ कोरिया युद्ध का अनुभव हासिल कर अपनी क्षमता बढ़ा रहा है, जो बाद में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है. जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि नॉर्थ कोरिया आधुनिक युद्ध सीख रहा है. यह एशियाई देशों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है. 

साउथ कोरिया को यूक्रेन का समर्थन, अपनी सुरक्षा जरूरतें, उत्पादन सीमाएं और रूस-नॉर्थ कोरिया गठबंधन के बीच संतुलन बनाना होगा. राजनयिक संपर्क जारी हैं, लेकिन सियोल अभी सतर्क रुख अपनाए हुए है. यह घटना दिखाती है कि यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ यूरोपीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहा है.  

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »