ईरान के पास सबसे ज्यादा स्पीड वाली मिसाइल! ये हैं दुनिया की टॉप 10 हाइपरसोनिक हथियार

दुनिया की टॉप 10 हाइपरसोनिक मिसाइलों की लिस्ट में चीन का डीएफ-17 सबसे ऊपर है. रूस के जिरकॉन-किंझल, अमेरिका के ARRW-CPS, भारत का ब्रह्मोस-2 शामिल है. गति, रेंज और स्टील्थ क्षमता आधुनिक युद्ध को बदल रही है.

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ये है ईरानी की हाइपरसोनिक मिसाइल फत्तह, जिससे वह कई बार जंग में इस्तेमाल कर चुका है. (File Photo: AFP) ये है ईरानी की हाइपरसोनिक मिसाइल फत्तह, जिससे वह कई बार जंग में इस्तेमाल कर चुका है. (File Photo: AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:25 AM IST

हाइपरसोनिक मिसाइलें आज की सैन्य दुनिया की सबसे तेज और घातक तकनीक मानी जाती हैं. ये मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना या उससे ज्यादा तेज उड़ती हैं. इनकी खासियत यह है कि ये न सिर्फ बहुत तेज होती हैं बल्कि रास्ते में दिशा भी बदल सकती हैं. इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है. चीन, रूस, अमेरिका, भारत, फ्रांस, उत्तर कोरिया, ईरान और ब्रिटेन जैसी ताकतें इन पर तेजी से काम कर रही हैं. 

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1. डीएफ-17 (चीन)

चीन की यह मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी रेंज करीब 1800 से 2500 किलोमीटर है. अधिकतम गति 12348 km/hr तक पहुंचती है. ठोस ईंधन से चलने वाली यह मिसाइल सड़क पर मोबाइल लॉन्चर से दागी जाती है. इसमें पारंपरिक या परमाणु वारहेड लगाया जा सकता है. 2019 से सेवा में है. इसकी मुख्य ताकत ग्लाइड स्टेज में दिशा बदलने की क्षमता है, जिससे इसे ट्रैक करना कठिन होता है.

2. जिरकॉन (रूस)

रूस की यह एंटी-शिप हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. आधिकारिक दावा अधिकतम स्पीड 1113 km/hr और 1000 किलोमीटर तक रेंज का है. जहाज और पनडुब्बी से दागी जा सकती है. स्क्रैमजेट या रैमजेट इंजन वाली यह मिसाइल समुद्री लक्ष्यों के लिए खास है. फिर भी यह आधुनिक नौसेना के लिए बड़ा खतरा मानी जाती है.

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3. किंझल (रूस)

यह एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है. मिग-31 या टीयू-22एम3 जैसे विमान से छोड़ी जाती है. गति 12348 km/hr तक और रेंज विमान की दूरी मिलाकर 2000 किलोमीटर तक बताई जाती है. ठोस ईंधन वाली यह मिसाइल पारंपरिक या परमाणु वॉरहेड ले जा सकती है. युद्ध में इस्तेमाल हो चुकी है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में इसे पूरी तरह हाइपरसोनिक ग्लाइडर नहीं बल्कि एरोबैलिस्टिक माना जाता है.

4. एजीएम-183ए एआरआरडब्ल्यू (अमेरिका)

अमेरिका की एयर-लॉन्च्ड बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक मिसाइल. रेंज करीब 1600 किलोमीटर और गति 6174 km/hr से ज्यादा बताई जाती है. बी-52 जैसे बॉम्बर से छोड़ी जाती है. अब खरीद की दिशा में काम चल रहा है. यह समय-संवेदी लक्ष्यों पर तेज हमले के लिए विकसित की गई है.

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5. सीपीएस (अमेरिका)

कॉन्वेंशनल प्रॉम्प्ट स्ट्राइक (CPS) अमेरिका की नेवी और आर्मी के लिए बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक मिसाइल है. गति 6174 km/hr से ऊपर और लंबी रेंज (कई सौ से हजारों किलोमीटर) वाली. जमवाल्ट क्लास डिस्ट्रॉयर और वर्जीनिया क्लास पनडुब्बी से दागी जाएगी. काइनेटिक एनर्जी वॉरहेड पर आधारित है. यह तेजी से दूर के लक्ष्यों को भेदने की क्षमता देती है.

6. ब्रह्मोस-2 (भारत)

भारत-रूस का संयुक्त हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम. स्क्रैमजेट इंजन वाली यह मिसाइल 9878 km/hr  गति और 1000 से 1500 किलोमीटर रेंज का लक्ष्य रखती है. अभी इसे बनाया जा रहा है. जहाज, जमीन, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च हो सकेगी. मौजूदा ब्रह्मोस से कई गुना तेज होने के कारण यह भारत की स्ट्राइक क्षमता को नया आयाम देगी.

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7. एएसएन4जी (फ्रांस)

फ्रांस की एयर-लॉन्च्ड न्यूक्लियर हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल. 8643 km/hr की गति और 1000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली. राफेल एफ5 विमान पर लगाई जाएगी. 2035 के आसपास सेवा में आने की उम्मीद है. यह फ्रांस की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगी.

8. ह्वासोंग-8 (नॉर्थ कोरिया)

नॉर्थ कोरिया की हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वाली मिसाइल. रेंज 2000 से 4000 किलोमीटर तक अनुमानित है. लिक्विड फ्यूल वाली और रोड-मोबाइल लॉन्चर से दागी जाती है. 2021 में टेस्ट हुई. यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.

9. फत्तह (ईरान)

ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, जिसे हाइपरसोनिक बताया जाता है. रेंज करीब 1400 किलोमीटर और गति 18522 km/hr का दावा है. ठोस और लिक्विड स्टेज वाली. इसकी वास्तविक हाइपरसोनिक ग्लाइड क्षमता पर विशेषज्ञों में मतभेद है, लेकिन मैन्यूवरेबिलिटी इसकी खासियत है.

10. स्टॉर्म शैडो (ब्रिटेन)

यह मूल रूप से सबसोनिक क्रूज मिसाइल है (गति 1173 km/hr, रेंज 250-560 किलोमीटर). स्टील्थ और सटीक हमले के लिए जानी जाती है. हाइपरसोनिक नहीं होने के बावजूद कुछ सूचियों में शामिल की जाती है क्योंकि यह आधुनिक सटीक स्ट्राइक क्षमता का उदाहरण है.

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ये मिसाइलें युद्ध के तरीके को बदल रही हैं. तेज गति, दिशा बदलने की क्षमता और लंबी रेंज के कारण पारंपरिक डिफेंस सिस्टम चुनौती में हैं. भारत जैसे देश स्वदेशी तकनीक पर जोर दे रहे हैं तो बड़ी ताकतें पहले से आगे हैं. भविष्य में इनकी भूमिका और बढ़ेगी.

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