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'पीछे हटिए, यह हवाना नहीं...', संयुक्त राष्ट्र में भिड़े अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधि

संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा सरकार पर भ्रष्टाचार और आलीशान जीवनशैली के आरोप लगाए.

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यूएन में अमिरका और क्यूूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई ( Photo- X/@USAmbUN)
यूएन में अमिरका और क्यूूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई ( Photo- X/@USAmbUN)

संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हो गई. संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिला के बीच उस समय विवाद बढ़ गया, जब पारिला अमेरिकी राजदूत की स्पीच के दौरान उनके पोडियम के पास पहुंच गए और उन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया. दोनों नेताओं के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि महासभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा.

यह घटना क्यूबा के खिलाफ दशकों पुराने अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध की निंदा करने वाले प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान से पहले हुई. इस दौरान माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा की सरकार पर भ्रष्टाचार और उसके नेताओं की आलीशान जीवनशैली को लेकर गंभीर आरोप लगाए. दूसरी ओर क्यूबा के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने के लिए दूसरे देशों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया.

फिदेल कास्त्रो की रोलेक्स घड़ी दिखाकर लगाए आरोप
अपने संबोधन के दौरान माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा के पूर्व नेता फिदेल कास्त्रो की एक तस्वीर दिखाई, जिसमें वह दो रोलेक्स घड़ियां पहने नजर आ रहे थे. वॉल्ट्ज ने दावा किया कि प्रत्येक घड़ी की कीमत करीब 40 हजार अमेरिकी डॉलर थी. उन्होंने क्यूबा सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों घड़ियों की संयुक्त कीमत क्यूबा के एक औसत नागरिक की 55 साल की कमाई के बराबर थी.

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इसके बाद अमेरिकी राजदूत ने क्यूबा के मौजूदा राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल की तस्वीर दिखाई. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राष्ट्रपति भी रोलेक्स घड़ी पहनते हैं. वॉल्ट्ज ने कहा, 'यह सिर्फ कास्त्रो के समय से शुरू नहीं हुआ था. यह क्यूबा के वर्तमान राष्ट्रपति हैं और इन्होंने भी रोलेक्स पहन रखी है.'

'आप झूठे हैं', क्यूबा के विदेश मंत्री ने लगाया आरोप
अमेरिकी राजदूत के भाषण के दौरान क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिला पोडियम के पास पहुंच गए और उन पर झूठ बोलने का आरोप लगाने लगे.

पारिला ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रक्रिया संबंधी नियमावली के नियम 71 का हवाला देते हुए व्यवस्था का प्रश्न उठाया. इस नियम के तहत प्रतिनिधि प्रक्रियात्मक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं, जिस पर पीठासीन अधिकारी को विचार करना होता है.

हालांकि, माइक वॉल्ट्ज ने उनकी आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि क्यूबा के विदेश मंत्री उनकी बातों से नाराज हैं. वॉल्ट्ज ने कहा, 'उन्हें कड़वी सच्चाई पसंद नहीं है.' इसके बाद उन्होंने पारिला से कहा, 'आप जितना चाहें डराने की कोशिश कर सकते हैं. मैं आपसे कह रहा हूं कि इस पोडियम से पीछे हट जाइए.'

'यह अमेरिका है, पीछे हटिए'
विवाद बढ़ने पर माइक वॉल्ट्ज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान की ओर मुड़कर कहा कि क्यूबा के विदेश मंत्री उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने मांग की कि पारिला को पोडियम से पीछे हटाया जाए.

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वॉल्ट्ज ने कहा, 'मैं संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रतिनिधि हूं. पीछे हटिए.'

इस पर क्यूबा के विदेश मंत्री ने जवाब दिया, 'आप झूठे हैं.'

इसके बाद अमेरिकी राजदूत ने कहा, 'पीछे हटिए! क्या आप समझते हैं कि आप किससे बात कर रहे हैं? यह संयुक्त राज्य अमेरिका है. पीछे हटिए.'

दोनों प्रतिनिधियों के बीच बढ़ते विवाद के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई.

अमेरिकी राजदूत के प्रवक्ता से भी बदसलूकी का आरोप
यह विवाद केवल महासभा के पोडियम तक सीमित नहीं रहा. न्यूयॉर्क पोस्ट को मिले एक वीडियो के मुताबिक, अमेरिकी राजदूत के प्रवक्ता जेपी फ्रेरे के साथ भी कथित तौर पर हाथापाई हुई. आरोप है कि क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल के एक अन्य सदस्य ने फ्रेरे पर उस समय हमला किया, जब वह घटना की रिकॉर्डिंग कर रहे थे. संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर उनका आईफोन छीनने की भी कोशिश की.

अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर क्यूबा ने क्या कहा?
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिला ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दूसरे देशों पर क्यूबा के खिलाफ लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का विरोध करने के लिए दबाव बना रहा है.

पारिला ने यह भी कहा कि अमेरिका की ओर से हाल में लगाए गए ईंधन संबंधी प्रतिबंधों ने क्यूबा के आर्थिक और मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है. उनके मुताबिक, इन प्रतिबंधों के कारण देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा है और पूरे द्वीप में लोगों की जान को खतरा पैदा हो रहा है. इस तरह संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर शुरू हुई बहस दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सीधे टकराव में बदल गई.

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