चीन ने अपनी सेना के लिए साउथ चाइना सी में बना दिया पूरा मैन मेड आइलैंड

चीन ने पैरासेल में एंटीलोप रीफ पर 6 KM लंबा मैन मेड द्वीप बनाया है. सैटेलाइट तस्वीरें रनवे और घाट दिखाती हैं. विशेषज्ञ इसे सबसे बड़ी सैन्य चौकी मानते हैं. चीन नागरिक उपयोग बताता है.

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ये है एंटीलोप रीफ पर बना चीन का मैन मेड आइलैंड. (Photo:X/demien symen detresfa) ये है एंटीलोप रीफ पर बना चीन का मैन मेड आइलैंड. (Photo:X/demien symen detresfa)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST

चीन ने दक्षिण चीन सागर के विवादित पैरासेल द्वीपसमूह में एंटीलोप रीफ पर विशाल मैन मेड द्वीप बनाने का पहला स्टेज पूरा कर लिया है. सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि यह लगभग छह किलोमीटर लंबा द्वीप अब तैयार हो चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीजिंग की क्षेत्रीय सबसे बड़ी सैन्य चौकी का आधार बनेगा. 

छह महीने से ज्यादा समय तक चले ड्रेजिंग और भूमि दोबारा हासिल करने के काम के बाद जहाज और मशीनें हटा ली गई हैं. यह विकास दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ा रहा है, जहां अमेरिका, चीन और क्षेत्रीय देशों के बीच शक्ति संतुलन की लड़ाई चल रही है.

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सैटेलाइट तस्वीरों में दिखता है कि एंटीलोप रीफ पर बनाया गया नया द्वीप लगभग छह किलोमीटर लंबा है. इसकी एक सीधी तीन किलोमीटर लंबी तटीय रेखा है, जो संभावित विमान रनवे हैं. 680 मीटर लंबा घाट गहरे पानी वाले बंदरगाह के सामने बना है, जहां चीनी कोस्ट गार्ड का जहाज भी देखा गया. 

द्वीप के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में इमारतों का निर्माण शुरू हो चुका है, जिसमें हेलीपैड शामिल है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार रनवे के लिए खुदाई का काम भी शुरू हो गया है. यह आकार पड़ोसी वुडी द्वीप से काफी बड़ा है, जो फिलहाल चीन का प्रशासनिक केंद्र है.

ताइवान संघर्ष के लिए बेस्ट प्लेस

दक्षिण चीन सागर अमेरिका और चीन के बीच बड़े रणनीतिक टकराव का क्षेत्र है, खासकर ताइवान को लेकर. ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म PLATracker के संस्थापक बेन लुईस के अनुसार, दक्षिण चीन सागर का उत्तरी हिस्सा ताइवान संघर्ष में बेहद महत्वपूर्ण होगा. एंटीलोप रीफ इसी क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यह बेस्ट प्लेस है. 

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स्प्रैटली द्वीपसमूह के दक्षिणी ठिकानों की तुलना में यहां सुरक्षा परिधि बनाना आसान है. पूरा आधार बनने पर चीन यहां H-6 रणनीतिक बॉम्बर तैनात कर सकता है. साथ ही परमाणु मिसाइल वाले पनडुब्बियों के लिए सुरक्षित क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी, जिससे अमेरिकी और वियतनामी नौसेना की पानी के नीचे गतिविधियां मुश्किल हो जाएंगी.

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चीन का दावा और वियतनाम का विरोध

बीजिंग 1974 से पैरासेल द्वीप समूह पर नियंत्रण रखता है, जब उसने तत्कालीन दक्षिण वियतनाम से संघर्ष के बाद इसे अपने कब्जे में ले लिया था. वियतनाम पूरे द्वीपसमूह पर अपना संप्रभुता का दावा करता है. स्प्रैटली में अपने ठिकाने बढ़ा रहा है. वियतनामी विदेश मंत्रालय ने मार्च में एंटीलोप रीफ पर काम की निंदा की थी. विरोध दर्ज कराया था. चीन के रक्षा मंत्रालय ने नई द्वीप पर कोई टिप्पणी नहीं की है. 

स्टेट मीडिया इसे नागरिक वैज्ञानिक अनुसंधान और मौसम पूर्वानुमान के लिए बता रहा है. लेकिन रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि यह निर्माण अमेरिकी और सहयोगी बलों के लिए क्षेत्रीय संचालन को जटिल बना रहा है. ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स एकेडमी के प्रोफेसर कार्ल थेयर के अनुसार, यह एक और चीज है जिसकी अमेरिका को चिंता करनी होगी और चीन मुख्य भूमि से इसकी रक्षा कर सकता है.

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दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण जलमार्ग है. चीन पहले स्प्रैटली में कई मैन मेड द्वीप बना चुका है. एंटीलोप रीफ पर यह नया निर्माण लगभग दस साल के अंतराल के बाद हुआ है. यह बीजिंग की सैन्य उपस्थिति को मजबूत करता है और क्षेत्र में उसकी पहुंच बढ़ाता है. 

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विश्लेषक मानते हैं कि पूरा द्वीप बनने पर यहां मिसाइल सुविधाएं, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और निगरानी व्यवस्था स्थापित की जा सकती है. इससे चीन की नौसेना और वायु सेना मुख्य भूमि से दूर तक संचालित हो सकेगी. यह विकास दिखाता है कि दक्षिण चीन सागर में सैन्यीकरण तेज हो रहा है. विवादित जलक्षेत्र में मैन मेड द्वीप बनाने से न केवल क्षेत्रीय देशों बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ रही है. 

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