भारत के राफेल-सुखोई कर सकते हैं चीन के जे-20 माइटी ड्रैगन स्टेल्थ जेट का गेम फिनिश

चीन ने भारतीय सीमा के पास होटन और दमजंग एयरबेस पर जे-20 माइटी ड्रैगन स्टेल्थ जेट तैनात किए हैं. भारत के राफेल और Su-30MKI इससे मुकाबला कर सकते हैं, लेकिन AMCA अभी तैयार नहीं.

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ये है चीन का जे-20 माइटी ड्रैगन फाइटर जेट. (Photo: Reuters) ये है चीन का जे-20 माइटी ड्रैगन फाइटर जेट. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:58 PM IST

हाल के दिनों में सैटेलाइट तस्वीरों ने एक महत्वपूर्ण सैन्य खुलासा किया है. चीन ने अपनी सबसे एडवांस पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट चेंगदू जे-20 को भारतीय सीमा यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास के एयरबेसों पर तैनात किया है. इसे माइटी ड्रैगन कहा जाता है.  

जुलाई 2026 के आसपास ली गई तस्वीरों में शिनजियांग के होटन एयरबेस पर आठ और तिब्बत के दमजंग एयरबेस पर चार जे-20 जेट दिखे. होटन लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी से करीब 245 और लेह से 389 किलोमीटर दूर है, जबकि दमजंग अरुणाचल प्रदेश के तवांग से लगभग 344 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है. 

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यह भारतीय सीमा के सामने जे-20 की सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है. यह कदम सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि चीन की पीएलएएएफ की नियमित हाई एल्टीट्यूड वाले ऑपरेशन की क्षमता को दिखाता है. अब सवाल यह है कि इस जेट की असली ताकत क्या है. भारत के पास इससे मुकाबला करने लायक विमान हैं या नहीं.

जे-20 माइटी ड्रैगन की खासियत  

जे-20 चीन का पहला स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ मल्टीरोल फाइटर है. इसकी पहली उड़ान 2011 में हुई. 2017 से सेवा में है. अनुमानित संख्या 300 से अधिक है. इसकी डिजाइन कम रडार क्रॉस सेक्शन पर बनी है. इंटरनल वेपन बे, एंग्युलर आकार और विशेष कोटिंग्स इसे रडार से बचने में मदद करते हैं.  

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खास स्पेसिफिकेशन इस प्रकार हैं... 

  • लंबाई लगभग 21.2 मीटर, पंखों का फैलाव 13 मीटर और ऊंचाई 4.7 मीटर.
  • खाली वजन 17,000 किलोग्राम और अधिकतम टेकऑफ वजन 37,000 किलोग्राम के आसपास.
  • इंजन पहले रूसी एएल-31 या डब्ल्यूएस-10सी थे, अब एडवांस डब्ल्यूएस-15 इंजन लगाए जा रहे हैं जो बेहतर थ्रस्ट और सुपरक्रूज क्षमता देते हैं.
  • अधिकतम स्पीड- 2469 किलोमीटर प्रति घंटा
  • सर्विस सीलिंग- 20 हजार मीटर
  • रेंज- 5500 किलोमीटर
  • कॉम्बैट रेंज- 2000 किलोमीटर

इसमें एईएसए रडार, इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम और सेंसर फ्यूजन है. हथियारों में आंतरिक बे में पीएल-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल (200 किलोमीटर से अधिक रेंज), पीएल-10 शॉर्ट रेंज मिसाइल और प्रेसिजन गाइडेड बम शामिल हैं. 

बाहरी पाइलन पर भी हथियार ले जा सकता है. यह लंबी दूरी के इंटरसेप्शन, एयर सुपीरियरिटी और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया गया है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी इसे संचालित करने की क्षमता विकसित की गई है, जो तिब्बत और शिनजियांग जैसे क्षेत्रों में फायदेमंद है.

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भारत के पास मुकाबला करने वाले विमान और तुलना

भारत के पास अभी कोई एक्टिव पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर नहीं है. AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) परियोजना चल रही है, जिसका प्रोटोटाइप बाद में और पूर्ण तैनाती 2030 के दशक में हो सकती है. तब तक भारत चौथी और 4.5 पीढ़ी के विमानों पर निर्भर है. भारत के पास टक्कर देने के लिए राफेल, Su-30MKI और तेजस एमके1ए हैं.  

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राफेल फ्रांसीसी 4.5 पीढ़ी का ओम्नीरोल फाइटर है. भारत के पास 36 हैं. और आने वाले हैं. इसकी खासियत स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, मेट्योर बीवीआर मिसाइल (बहुत लंबी रेंज और एक्टिव रडार होमिंग) और सेंसर फ्यूजन है. गति 2222 किलोमीटर प्रति घंटा, कॉम्बैट रेडियस लगभग 1,850 किलोमीटर.

यह स्टेल्थ नहीं है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और कई क्षमताओं में मजबूत है. जे-20 की स्टेल्थ के खिलाफ राफेल अपनी डिटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स से मुकाबला कर सकता है.   

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SU-30MKI भारी मल्टी-रोल वाला विमान है. भारत के पास 250 से अधिक हैं. थ्रस्ट वेक्टरिंग कंट्रोल से यह अत्यधिक मैन्यूवरेबल है. सुपर-30 अपग्रेड में स्वदेशी एईएसए रडार, बेहतर एवियोनिक्स और अस्त्र मिसाइल लगाई जा रही हैं. पेलोड क्षमता बहुत अधिक है. ब्रह्मोस मिसाइल ले जा सकता है. रेंज और क्लीयरेंस में मजबूत, लेकिन स्टेल्थ की कमी है. जे-20 के खिलाफ यह संख्या और पेलोड के बल पर काम आ सकता है.  

तेजस एमके1ए हल्का स्वदेशी विमान है. लागत कम, मैन्यूवरेबल और आधुनिक रडार वाला. यह मात्रा बढ़ाने में मदद करता है लेकिन जे-20 जैसे भारी स्टेल्थ जेट से सीधी टक्कर में सीमित है.   

जे-20 स्टेल्थ और फर्स्ट-लुक-फर्स्ट-शॉट लाभ रखता है. यह दुश्मन को पहले देखकर हमला कर सकता है. भारत के विमान बेहतर पायलट ट्रेनिंग, हथियार सिस्टम (मेट्योर, ब्रह्मोस मिसाइल) और जमीनी एयर डिफेंस (एस-400 सहित) पर निर्भर हैं. उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम, ऊंचाई और लॉजिस्टिक्स भी भूमिका निभाते हैं. भारत की रणनीति नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर, एईडब्ल्यूसी विमान और मल्टी-लेयर डिफेंस पर आधारित है.

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रणनीतिक प्रभाव और आगे की राह

यह तैनाती चीन की एलएसी पर एयरपावर बढ़ाने की मंशा दिखाती है. यह भारत के लिए अपनी काउंटर-स्टेल्थ क्षमताएं, लंबी दूरी के सेंसर और एएमसीए को तेज करने का संकेत है. विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ विमान नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम- रडार, सैटेलाइट, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और पायलट कौशल फैसला करते हैं. भारत राफेल की संख्या बढ़ाने, सु-30 अपग्रेड और स्वदेशी कार्यक्रमों पर जोर दे रहा है.  

अंत में, जे-20 एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है लेकिन युद्ध सिर्फ एक विमान से नहीं जीता जाता. भारत की मिश्रित ताकत और भौगोलिक फायदे इसे संतुलित रखते हैं. दोनों देशों को तनाव कम रखने और कूटनीति पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सैन्य वृद्धि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती है.  

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