ईरान पर अगले हमले में अमेरिका गिराएगा 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब', बन गई है योजना

अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा और परमाणु ठिकानों पर हमले में ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) के इस्तेमाल पर विचार कर रही है. ट्रंप के आदेश पर यह बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन प्रभावशीलता पर संदेह है.

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ये है GBU-43/B Massive Ordnance Air Blast (MOAB)  बम जिसका इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं ट्रंप. (Photo: Reuters) ये है GBU-43/B Massive Ordnance Air Blast (MOAB) बम जिसका इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं ट्रंप. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

15 अक्टूबर 2026 को CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए स्ट्राइक प्लान तैयार किए हैं. इनमें GBU-43/B मासिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बम, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ या MOAB का इस्तेमाल शामिल हो सकता है. यह अमेरिकी शस्त्रागार का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है.

ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों, खासकर पिकएक्स माउंटेन जैसे गहरे दबे स्थलों को निशाना बनाने की योजना हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर मिडटर्म चुनाव से पहले या बाद में युद्ध अभियान फिर शुरू करने का आदेश देते हैं तो ये योजनाएं एक्टिव हो सकती हैं.

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अधिकारी बताते हैं कि ट्रंप ने अतिरिक्त स्ट्राइक पैकेज तैयार करने को कहा था, जिसमें ऊर्जा सुविधाएं और परमाणु साइटें शामिल हैं. व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप सभी विकल्प खुले रखते हैं ताकि ईरान परमाणु हथियार न बना सके. पेंटागन ने व्यापक योजनाओं की पुष्टि की लेकिन संवेदनशील विवरणों पर टिप्पणी नहीं की.

MOAB क्या है और इसकी क्षमताएं

MOAB लगभग करीब 9,800 किलोग्राम वजन का GPS-गाइडेड बम है. इसमें करीब 8482 किलोग्राम H-6 विस्फोटक भरा होता है, जिसकी शक्ति लगभग 11 टन TNT के बराबर है. यह 30 फीट लंबा और सतह पर विस्फोट के लिए डिजाइन किया गया है. यह बड़े क्षेत्र को साफ करने, सुरंगों या खुले ठिकानों को नष्ट करने के लिए उपयुक्त है, लेकिन गहरे दबे हुए कठोर ठिकानों को भेदने के लिए नहीं बनाया गया. इसे आमतौर पर MC-130 जैसे ट्रांसपोर्ट विमान से गिराया जाता है.

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इसका पहला और एकमात्र युद्धकालीन इस्तेमाल अप्रैल 2017 में अफगानिस्तान में ISIS के सुरंग परिसर के खिलाफ हुआ था. विशेषज्ञों का कहना है कि यह मनोवैज्ञानिक प्रभाव और बड़े क्षेत्र को साफ करने में प्रभावी है, लेकिन ईरान के ग्रेनाइट से सुरक्षित परमाणु ठिकानों के खिलाफ सीमित साबित हो सकता है.

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सैन्य योजनाकारों में संदेह है कि MOAB वॉशिंगटन के रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा कर पाएगा या नहीं. ईरान के कई परमाणु स्थल गहरे भूमिगत हैं, जहां यह बम पर्याप्त गहराई तक नहीं पहुंच सकता. एक अधिकारी ने इसे 'सूचना ऑपरेशन वाला हथियार' बताया जो बड़े क्षेत्र की सफाई के लिए अच्छा है लेकिन ज्यादा कुछ नहीं. ईरान की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली भी बड़े और धीमे विमानों को चुनौती दे सकती है.

यह चर्चा 2026 में जारी अमेरिकी-ईरान संघर्ष के बीच आई है. ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव (3 नवंबर) से पहले नए हमले न करने की घोषणा की थी, लेकिन योजनाएं तैयार रखी गई हैं. ऊर्जा ठिकानों पर हमले वैश्विक तेल आपूर्ति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि परमाणु साइटों पर हमला संघर्ष को और बढ़ा सकता है.

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संभावित परिणाम और चिंताएं

MOAB का इस्तेमाल संघर्ष को नया स्तर देगा. यह क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है, ईरान के जवाबी हमलों को बढ़ावा दे सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिला सकता है. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बड़े विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल रणनीतिक लक्ष्यों से ज्यादा प्रतीकात्मक संदेश देने वाला साबित हो सकता है. 

अमेरिका को सटीक और प्रभावी विकल्पों पर भी विचार करना होगा क्योंकि गहराई वाले ठिकानों के लिए अलग तरह के पेनिट्रेटर बम जरूरी होते हैं. कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दर्शाती है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सभी विकल्प तैयार रख रहा है, लेकिन MOAB जैसी बड़ी ताकत का इस्तेमाल सावधानी और रणनीतिक स्पष्टता की मांग करता है.

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