8वें वेतन आयोग की बैठक अक्टूबर में बेंगलुरु और मुंबई में तय की गई हैं. आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करने से पहल यात्राओं के दौरान कर्मचारी संघों, प्रतिनिधियों, ग्रुप, पेंशनर्स और अन्य हितकारों के साथ सुझाव पर चर्चा कर रहा है. चर्चा के बाद आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट तैयार करेगा.
आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को लाभ होने की उम्मीद है, जिनमें करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी, रक्षा, रेलवे कर्मियों और रिटायर्ड लोगों समेत करीब 65 लाख पेंशनर्स शामिल हैं.
बैठक के दौरान आयोग से कर्मचारी और पेंशनर्स सरकार से कई मांग रख रहे हैं. इसमें सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी, पेंशन में इजाफा और महंगाई भत्ता जैसी चीजें शामिल हैं. खास बात है कि कर्मचारी और पेंशनभोगी समूहों ने उच्च फिटमेंट फैक्टर (1.83 से लेकर 3.83 तक) की मांग रखी है.
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?
फिटमेंट फैक्टर, वह चीज होती है, जिस आधार पर सैलरी और पेंशन में इजाफा किया जाता है. अगर फिटमेंट फैक्टर 2 है तो बेसिक सैलरी करीब दोगुना बढ़ सकती है. 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, मूल वेतन ₹ 7,000 से बढ़कर ₹ 18,000 हो गया.
8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी?
अगर इसी आधार पर इतने ही फिटमेंट फैक्टर 8वें वेतन आयोग के तहत मानकर चलें तो कर्मचारियों की सैलरी में बंपर बढ़ोतरी हो सकती है. मान लीजिए सरकार 2.57 गुना फिटमेंट फैक्टर बढ़ाती है तो 18000 रुपये की मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़कर ₹ 46,260 रुपये हो जाएगी.
इसी तरह, लेवल 2 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹ 51143, लेवल-3 कर्मचारियों की सैलरी 55,769 रुपये, लेवल-4 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹ 65535, लेवल पांच कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹ 75,044 और लेवल-6 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹90,978 हो जाएगी.