केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर कई अहम सवाल हैं. क्या मौजूदा DA को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाएगा? क्या महंगाई भत्ते की गणना का फॉर्मूला बदलेगा? और क्या कर्मचारियों को महंगाई के हिसाब से ज्यादा राहत मिलेगी? इन सवालों के बीच कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें तेज कर दी हैं. पिछले वेतन आयोगों की सिफारिशों से समझिए कि DA को लेकर अब तक क्या होता रहा है और 8वें आयोग से क्या उम्मीदें हैं.
अभी कितना DA पा रहे हैं केंद्रीय कर्मचारी?
केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत बेसिक पे का 60% महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा है. पेंशनर्स को इसी तरह महंगाई राहत (DR) दी जाती है. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर DA की गणना किस आधार पर होगी, यह एक अहम सवाल है. अगर पिछली परंपरा जारी रहती है और नए वेतन ढांचे में DA को नए सिरे से तय किया जाता है, तो मौजूदा DA की दर रीसेट होकर शून्य से शुरू हो सकती है. हालांकि, यह अभी तय नहीं है. अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा.
5वें वेतन आयोग ने DA पर क्या कहा था?
5वें वेतन आयोग ने सभी वेतन स्तरों पर महंगाई की 100% भरपाई करने की सिफारिश की थी. आयोग ने यह भी कहा था कि जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बेस इंडेक्स के मुकाबले 50% बढ़ जाए, तो महंगाई भत्ते को महंगाई वेतन (Dearness Pay) में बदला जाए. इस महंगाई वेतन को रिटायरमेंट लाभ समेत दूसरे वित्तीय लाभों की गणना में भी शामिल करने की सिफारिश थी. आयोग ने अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए अलग महंगाई सूचकांक बनाने को अव्यावहारिक माना था. इसलिए उसने 1982 के बेस ईयर वाले अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर DA की गणना का सुझाव दिया.
6वें वेतन आयोग ने बेसिक पे में DA मर्ज नहीं किया
6वें वेतन आयोग ने महंगाई भत्ते को बेसिक पे में मिलाने की मांग स्वीकार नहीं की थी. आयोग का कहना था कि नई वेतन व्यवस्था में वेतनमान और भत्तों को समय-समय पर संशोधित करने का प्रावधान है, इसलिए DA को महंगाई वेतन में बदलने की जरूरत नहीं है. आयोग ने यह भी कहा था कि DA को महंगाई वेतन में बदलने के साथ बेस इंडेक्स में बदलाव करना तार्किक रूप से जरूरी होगा. इसके अलावा, उसने हर तीन महीने में DA संशोधित करने की मांग भी खारिज कर दी थी. आयोग ने साल में दो बार, 1 जनवरी और 1 जुलाई से DA मंजूर करने की व्यवस्था जारी रखने की सिफारिश की थी. इसका भुगतान प्रशासनिक सुविधा के लिए क्रमशः मार्च और सितंबर की सैलरी के साथ किया जाता रहा.
7वें वेतन आयोग ने DA का फॉर्मूला क्यों नहीं बदला
7वें वेतन आयोग ने DA की गणना के मौजूदा तरीके को जारी रखने की सिफारिश की थी. आयोग का मानना था कि यह फॉर्मूला लंबे समय से काम कर रहा है और इसे बदलने की कोई ठोस जरूरत नहीं है. इसका मतलब था कि DA की गणना के लिए पहले से इस्तेमाल हो रही पद्धति जारी रहे. अब 8वें वेतन आयोग के सामने भी यह सवाल है कि क्या वह इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाएगा या महंगाई की गणना और भरपाई के तरीके में कोई बदलाव करेगा.
8वें वेतन आयोग से DA मर्ज करने की मांग क्यों?
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई भत्ता एक निश्चित स्तर पर पहुंचने के बाद बेसिक पे में मिला दिया जाए. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) ने सुझाव दिया है कि DA या DR के 25% से ज्यादा होने पर इसे बेसिक पे या पेंशन में मर्ज करने पर विचार किया जाए. संगठन ने बिना राउंडिंग के सटीक महंगाई भरपाई यानी पॉइंट-टू-पॉइंट DA देने की मांग भी की है. भारत पेंशनर्स समाज ने भी DR को बेसिक पेंशन में मर्ज करने की संभावना पर विचार करने और महंगाई राहत में संशोधन की प्रक्रिया बदलने का सुझाव दिया है. हालांकि, ये कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं, आयोग की मंजूर सिफारिशें नहीं.
हर तीन महीने में DA संशोधन की मांग
कर्मचारी संगठनों के एक वर्ग ने DA और DR में हर तीन महीने में संशोधन करने की मांग उठाई है. भारत पेंशनर्स समाज का सुझाव है कि महंगाई राहत की गणना तीन महीने के औसत के आधार पर की जाए और महंगाई के असर की भरपाई में राउंडिंग के कारण अंतर न आए. मौजूदा व्यवस्था में DA साल में दो बार संशोधित किया जाता है. ऐसे में 8वें वेतन आयोग के सामने यह मांग भी है कि महंगाई तेजी से बढ़ने पर कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत देने के लिए संशोधन की प्रक्रिया में बदलाव किया जाए. इस पर आयोग क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
AICPI-IW फॉर्मूले पर क्यों उठ रहे सवाल?
महंगाई भत्ते की गणना में इस्तेमाल होने वाले AICPI-IW यानी औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के तरीके को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने सवाल उठाए हैं. कई संगठनों का कहना है कि सूचकांक में परिवार की इकाई तीन सदस्यों के बजाय पांच सदस्यों की मानकर गणना की जानी चाहिए, ताकि परिवार के वास्तविक खर्चों का बेहतर आकलन हो सके. इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) का तर्क है कि सूचकांक में इस्तेमाल होने वाली 'वर्किंग क्लास फैमिली' की परिभाषा सरकारी कर्मचारियों की खर्च संबंधी जरूरतों को पूरी तरह नहीं दर्शाती. संगठन ने 2016 की सीरीज में ज्योमेट्रिक एवरेजिंग अपनाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं. उसका कहना है कि इससे कीमतों में बढ़ोतरी का असर कम दिखाई दे सकता है.
क्या DA की गणना के लिए अलग इंडेक्स बनेगा?
IRTSA ने 6वें वेतन आयोग की उस सिफारिश की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के सर्वे के आधार पर अलग महंगाई सूचकांक बनाने की बात कही गई थी. संगठन के मुताबिक, अलग-अलग श्रेणी के शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों के खर्च और खपत के पैटर्न को भी गणना में ध्यान में रखना चाहिए. संगठन ने बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों में करीब 37% 'X' श्रेणी, 25.5% 'Y' श्रेणी और 37.5% 'Z' श्रेणी के शहरों में तैनात हैं. उसका कहना है कि DA का फॉर्मूला इन शहरों में कीमतों और खर्च के अंतर को बेहतर तरीके से दर्शाए. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन और रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने भी मौजूदा DA व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई है.
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं?
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर है. DA को बेसिक पे में मर्ज करने, महंगाई राहत में ज्यादा सटीक भरपाई और AICPI-IW की गणना में बदलाव जैसी मांगें चर्चा में हैं. लेकिन इनमें से किसी भी बदलाव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा कि DA का मौजूदा फॉर्मूला जारी रहेगा, उसमें बदलाव होगा या बेसिक पे में विलय जैसे किसी प्रस्ताव को स्वीकार किया जाएगा.