राबड़ी देवी ने 20 साल बाद खाली किया सरकारी बंगला, लालू परिवार अब निजी आवास में शिफ्ट

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना के सरकारी बंगले 10 सर्कुलर रोड को खाली कर दिया है. 20 साल बाद अब वो अपने निजी घर में शिफ्ट हो गई हैं. वहीं 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला अब बीजेपी नेता नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया है.

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राबड़ी देवी ने पहले सरकारी बंगले को खाली करने से मना कर दिया था. (Photo- ITGD) राबड़ी देवी ने पहले सरकारी बंगले को खाली करने से मना कर दिया था. (Photo- ITGD)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आखिरकार पटना स्थित अपना सरकारी बंगला '10 सर्कुलर रोड' खाली कर दिया है. राबड़ी देवी पिछले करीब 20 सालों से इस आलीशान बंगले में रह रही थीं. गुरुवार को लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार इस सरकारी आवास को छोड़कर कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी घर में शिफ्ट हो गया है.

साल 2005 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद, नीतीश कुमार की तत्कालीन सरकार ने राबड़ी देवी को '10 सर्कुलर रोड' का ये बंगला दिया था. ये बंगला मुख्यमंत्री आवास के ठीक सामने और राजभवन से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है.

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लगभग 20 सालों तक ये बंगला लालू परिवार का आशियाना रहा. इसके साथ ही आरजेडी का मुख्य कैंप ऑफिस भी बना रहा.

बीजेपी सरकार के दबाव के आगे झुका परिवार

राबड़ी देवी ने ये बंगला सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली मौजूदा बीजेपी सरकार के कड़े रुख और दबाव के बाद खाली किया है. सरकार ने अब ये बंगला बीजेपी नेता और मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है.

दरअसल, बंगला खाली कराने की प्रक्रिया पिछले साल नवंबर में ही शुरू हो गई थी. तब नीतीश सरकार ने '10 सर्कुलर रोड' को 'उपमुख्यमंत्री आवास' घोषित कर दिया था. इसके बदले राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते '39 हार्डिंग रोड' का बंगला दिया गया था.

क्यों खाली नहीं करना चाहती थीं बंगला?

राबड़ी देवी ने शुरुआत में हार्डिंग रोड वाले बंगले में जाने से साफ मना कर दिया था. इसके पीछे दो वजहें थीं. पहली ये कि नया बंगला आकार में '10 सर्कुलर रोड' जितना बड़ा नहीं था. दूसरी वजह अंधविश्वास से जुड़ी थी. राजनीतिक हल्कों में '39 हार्डिंग रोड' के बंगले को 'अशुभ' माना जाता है. ऐसी धारणा है कि जो भी नेता इस बंगले में रहा, उसका राजनीतिक करियर ढलान पर आ गया.

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बढ़ते विवाद के बाद बदला फैसला

पिछले महीने राज्य के भवन निर्माण विभाग ने एक नया आदेश जारी किया था. इसके तहत राबड़ी देवी को '38 हार्डिंग रोड' का बंगला अलॉट किया गया और 29 जून तक '10 सर्कुलर रोड' खाली करने का निर्देश दिया गया. इस आदेश पर राबड़ी देवी बेहद नाराज हो गईं. उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुली चुनौती दे दी थी कि वो उन्हें जबरन घर से निकाल कर दिखाएं.

वहीं NDA के नेताओं ने इसे लेकर आरजेडी पर चौतरफा हमले शुरू कर दिए. एनडीए नेताओं ने जनता के बीच ये संदेश फैलाया कि लालू परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग सरकारी बंगला चाहिए. इस नकारात्मक पब्लिसिटी और बढ़ते राजनीतिक नुकसान को देखते हुए आखिरकार राबड़ी देवी ने अपना रुख बदला और बंगला खाली करने का फैसला किया.

बेटों के पास अब भी हैं सरकारी बंगले

भले ही राबड़ी देवी अपने निजी आवास में चली गई हैं, लेकिन उनके बेटों के पास अब भी सरकारी आवास मौजूद हैं. आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. इस नाते उनके पास '2 पोलो रोड' का मंत्री स्तर का बंगला बरकरार है.

यह भी पढ़ें: बंगला तो खाली हो रहा, पर सामान कहां है? राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर क्यों फंसा 'लिस्ट' का पेंच!

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वहीं, आरजेडी से निष्कासित लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के पास भी अपना एक सरकारी बंगला है. तेज प्रताप ने अपनी नई पार्टी 'जनशक्ति जनता दल' चलाने के लिए सरकार से इस बंगले की मांग की थी.

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