पेट्रोल के बाद CNG में होगी ब्लेंडिंग, सरकार ने बनाया GOBARdhan प्लान

E20 फ्यूल के बाद जल्द ही देश में बायोगैस ब्लेंडिंग के साथ सीएनजी मिलेगी. सरकार ने इसके लिए 23,731 करोड़ रुपये की GOBARdhan योजना को मंजूरी दे दी है. इसके तहत देश में बायोगैस का प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा. इस गैस को सीएनजी के साथ ब्लेंड करके लोगों तक पहुंचाया जाएगा. आइए जानते है इस योजना का क्या असर होगा.

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GOBARdhan योजना का उद्देश्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस का प्रोडक्शन बढ़ाना है. (Photo: ITG) GOBARdhan योजना का उद्देश्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस का प्रोडक्शन बढ़ाना है. (Photo: ITG)

आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:39 PM IST

पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग के बाद सरकार ने सीएनजी में भी ब्लेंडिंग की तैयारी शुरू कर दी है. गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट ने 23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन (GOBARdhan) स्कीम को मंजूरी दी है. इस स्कीम का मकसद कंप्रेस्ड बायोगैस का प्रोडक्शन बढ़ाना और इंपोर्ट होने वाले फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना है. 

गोबरधन यानी गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन भारतीय बायो-सीएनजी सेक्टर में एक बड़ा कदम है. इस स्कीम को वित्तवर्ष 2027 से 2036 के बीच लागू किया जाएगा. आइए समझते हैं सीएनजी में बायोगैस को ब्लेंड करने को लेकर सरकार की क्या योजना है. 

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कैसे बनती है कंप्रेस्ड बायोगैस? 

सीबीजी यानी कंप्रेस्ड बायोगैस को ऑर्गेनिक वेस्ट जैसे गोबर, फसलों के बचे हुए हिस्से, मुनिसिपल वेस्ट, फुड वेस्ट और शुगर मील से निकलने वाले कचरे से तैयार किया जाएगा. प्यूरिफिकेशन के बाद ये केमिकली नैचुरल गैस के बहुत करीब पहुंच जाती है. जिसके बाद इसे मौजूदा सीएनजी और पीएनजी नेटवर्क के जरिए सप्लाई किया जाएगा. 

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इसकी वजह से मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और व्हीकल में कोई बदलाव नहीं करना होगा. सरकार को उम्मीद है कि नई स्कीम से घरेलू बायो-सीएनजी प्रोडक्शन बढ़ेगा. अगले दशक में इस स्कीम की वजह से बायो-सीएनजी का प्रोडक्शन 10 गुना तक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे नैचुरल गैस इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी. 

सीएनजी में ब्लेंडिंग से क्या होगा कारों पर प्रभाव?

नई योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के लिए बायोगैस ब्लेंडिंग जरूरी होगी. सरकार के रखे टार्गेट के हिसाब से वित्तवर्ष 2026-27 में ये ब्लेंडिंग 3 फीसदी होगी, जिसे अगले साल बढ़ाकर 4 फीसदी और वित्तवर्ष 2028-29 से 5 फीसदी किया जाएगा. 

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सरकार ने इस योजना का ऐलान ऐसे वक्त पर किया है, जब लोग सीएनजी व्हीकल पर तेजी से स्विच कर रहे हैं. पिछले कुछ सालों में सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ी है. जुलाई 2026 के डेटा के मुताबिक सीएनजी पैसेंजर व्हीकल की हिस्सेदारी 24.67 फीसदी पहुंच गई है. 

चूंकि बायो-सीएनजी केमिकली नैचुरली गैस से बहुत समान है, तो इसका असर मौजूदा सीएनजी कारों पर नहीं होगा. जिस तरह से पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग के बाद ई20 कंप्लायंट इंजन की जरूरत पड़ती है. उस तरह से बायो-सीएनजी के मामले में नहीं होगा. बिना किसी हार्डवेयर बदलाव के लोग इसका इस्तेमाल कर पाएंगे. यानी सीएनजी ब्लेंडिंग की वजह से आपकी कार पर कोई असर नहीं होगा.

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