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खेती से अलग चाहिए एक्स्ट्रा इनकम? लगाएं ये 5 पेड़... 5 से 7 साल में तैयार, करेंगे मालामाल

Tree Plantation for Income: अगर खेती से हर साल होने वाली कमाई के साथ कुछ साल बाद एकमुश्त रकम भी जुटानी हो, तो खेत में पेड़ों की खेती एक विकल्प बन सकती है. इनमें कुछ पेड़ 5 से 7 साल में तैयार हो जाते हैं, जबकि कुछ लंबा समय लेते हैं. हालांकि, ज्यादा समय लेने वाले पेड़​ बिकते भी लाखों में हैं.

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पेड़ों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का एक विकल्प बन सकती है. (File Photo)
पेड़ों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का एक विकल्प बन सकती है. (File Photo)

खेती से हर साल एक जैसी कमाई हो, यह जरूरी नहीं है. कभी मौसम साथ नहीं देता तो कभी फसल का भाव उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलता. ऐसे में किसान खेत के एक हिस्से में ऐसे पेड़ भी लगा सकते हैं, जिन्हें कुछ साल बाद बेचकर अच्छी रकम जुटाई जा सकती है.

पॉपुलर, सफेदा, मालाबार नीम, शीशम और यूकेलिप्टस ऐसे पेड़ हैं, जिनकी लकड़ी की अलग-अलग बाजारों में मांग रहती है. हालांकि इनमें पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि कौन सा पेड़ कितने समय में तैयार होता है और उससे कितनी कमाई हो सकती है.

1. पॉपुलर से 5-7 साल में कमाई

पॉपुलर की लकड़ी की मांग प्लाईवुड और दूसरे लकड़ी आधारित उद्योगों में रहती है. इसकी कीमत गुणवत्ता और पेड़ के आकार के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. मौजूदा बाजार भाव करीब 1,500 रुपये प्रति क्विंटल से शुरू बताया जा रहा है. एक पॉपुलर का पेड़ करीब 7 से 10 क्विंटल या उससे ज्यादा लकड़ी दे सकता है. इस हिसाब से अच्छी ग्रोथ वाले पेड़ से किसान को कई हजार रुपये की आमदनी हो सकती है. पॉपुलर को तैयार होने में आमतौर पर 5 से 7 साल लगते हैं.

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2. मालाबार नीम भी है एक विकल्प

मालाबार नीम एग्रो फॉरेस्ट्री के लिए इस्तेमाल होने वाले पेड़ों में शामिल है. इसकी लकड़ी की भी बाजार में मांग है. सामान्य बाजार में इसकी कीमत 700 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा बताई जाती है. यह पेड़ करीब 5 से 7 साल में तैयार हो सकता है. किसान खेत में फसल के साथ या उपलब्ध जमीन के हिसाब से पेड़ लगाकर कुछ वर्षों बाद लकड़ी बेचने से अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं. यहां भी कमाई का वास्तविक आंकड़ा पेड़ की ग्रोथ और बाजार भाव पर निर्भर करेगा.

3. यूकेलिप्टस में कम लागत का फायदा

यूकेलिप्टस को तेजी से बढ़ने वाला पेड़ माना जाता है और इसकी खेती में शुरुआती लागत भी अपेक्षाकृत कम हो सकती है. एक पौधे की कीमत करीब 7 से 8 रुपये बताई जाती है. एक हेक्टेयर में करीब 3,000 पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों पर शुरुआती खर्च करीब 25 हजार रुपये के आसपास बताया जाता है. करीब 5 साल में एक अच्छी ग्रोथ वाला पेड़ लगभग 400 किलो लकड़ी दे सकता है. अगर लकड़ी का भाव 6 रुपये प्रति किलो माना जाए, तो एक पेड़ की कीमत करीब 2,400 रुपये बैठती है. हालांकि वास्तविक कमाई बाजार भाव, पेड़ की ग्रोथ और खेती की लागत पर निर्भर करेगी.

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4. शीशम में इंतजार, पर पैसे ज्यादा

अगर किसान लंबे समय के लिए निवेश करना चाहता है तो शीशम का पेड़ एक विकल्प हो सकता है. हालांकि शीशम को तैयार होने में बाकी पेड़ों की तुलना में ज्यादा समय लगता है. शीशम का पौधा करीब 50 से 100 रुपये में मिलता है, लेकिन इसे बड़े पेड़ का आकार लेने में 30 से 40 साल तक लग सकते हैं. मौजूदा बाजार में अच्छी तरह तैयार शीशम के पेड़ की कीमत करीब 4 लाख रुपये या उससे ज्यादा बताई जाती है. पेड़ जितना बड़ा और अच्छी गुणवत्ता का होगा, उसकी कीमत उतनी ही बढ़ सकती है.

5. साखू-सागवान भी लंबे समय के पेड़

साखू और सागवान दोनों ही उपयोगी पेड़ हैं. किसान इन पेड़ों को भी अपने खेतों के किनारे लगा सकते हैं. लेकिन इन पड़ों को पूरी तरह तैयार होने में लंबा समय लगता है. साखू और सागवान दोनों जितने पुराने होते हैं, उनकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है. अगर दोनों पेड़ों को लगाने के बाद 30 से 40 साल के लिए छोड़ा जाए तो एक पेड़ 5 से 8 लाख रुपये दे सकता है. लेकिन इनसे बेहतर लाभ तभी मिल सकता है जब इन्हें सही स्थान और उचित परिस्थितियों में लगाया जाए. इसलिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण से पहले कृषि या वानिकी विशेषज्ञ से सलाह लेना किसानों के लिए फायदेमंद रहेगा.

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हमेशा बारिश के मौसम में लगाएं पौधे

पेड़ लगाने के लिए बारिश का मौसम काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मिट्टी में नमी रहती है और पौधों को शुरुआती ग्रोथ मिलने में मदद मिलती है. किसान आम, जामुन, नींबू, सहजन, कटहल और दूसरे उपयोगी पौधे भी लगा सकते हैं. हालांकि पेड़ों की खेती में एक जरूरी बात का ध्यान रखना चाहिए. सभी पेड़ों को काटने और बेचने के नियम एक जैसे नहीं होते. कुछ पेड़ संरक्षित श्रेणी में आते हैं और उनकी कटाई से पहले वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ सकती है. इसलिए किसी भी पेड़ की व्यावसायिक खेती शुरू करने से पहले स्थानीय नियम और कटाई की अनुमति से जुड़े प्रावधान जरूर जांच लेने चाहिए.

कमाई का हिसाब-किताब ऐसे समझें

पॉपुलर और मालाबार नीम जैसे पेड़ करीब 5 से 7 साल में तैयार हो सकते हैं, जबकि सफेदा को करीब 7 से 8 साल लग सकते हैं. यूकेलिप्टस करीब 5 साल में लकड़ी देने लायक हो सकता है. दूसरी तरफ शीशम लंबी अवधि का विकल्प है, जिसमें कई दशक लग सकते हैं. इसलिए पेड़ चुनते समय सिर्फ आज का बाजार भाव देखना पर्याप्त नहीं है. पौधे की लागत, जमीन, सिंचाई, देखभाल, तैयार होने का समय, लकड़ी की गुणवत्ता और भविष्य के बाजार भाव- इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर ही फैसला करना चाहिए.

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