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मधुमक्खियों के लिए घातक कीटनाशक बिल पर बवाल, फ्रांस की पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा

यूरोपीय संघ के नियमों के तहत इन कीटनाशकों के इस्तेमाल की अनुमति है, हालांकि, संघ में शामिल सदस्य देशों को इनके प्रयोग पर रोक या सीमा तय करने का अधिकार है. इसी अधिकार के तहत फ्रांस ने अपने स्तर पर इन पर कड़े प्रतिबंध लागू किए थे.

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मधुमक्खियों के लिए खतरनाक कीटनाशकों को मंजूरी मिलते ही पर्यावरण मंत्री ने छोड़ा पद (Photo: X (Cyril Adriaens-Allemand)
मधुमक्खियों के लिए खतरनाक कीटनाशकों को मंजूरी मिलते ही पर्यावरण मंत्री ने छोड़ा पद (Photo: X (Cyril Adriaens-Allemand)

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबुट ने एक विवादास्पद कृषि विधेयक के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है. यह विधेयक उन प्रतिबंधित कीटनाशकों के उपयोग में अस्थायी छूट देता है, जिन्हें वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों के लिए हानिकारक बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की, ये बिल पर्यावरण के लिए बड़ा झटका है. 

मंगलवार को फ्रांस की संसद में ऐसे कृषि कानून को मंजूरी मिल गई, जिसमें दो कीटनाशकों एसीटामिप्रिड (Acetamiprid) और फ्लूपाइराडिफ्यूरोन (Flupyradifurone)के इस्तेमाल की अनुमति दी गई. पहले इनको प्रतिबंधित किया गया था. बारबूट ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में लिखा, "पिछले नौ महीनों में, मैंने उन लोगों का बचाव किया है जो विरोध मार्च नहीं निकालते, जो वोट नहीं देते और जो चिल्लाते नहीं हैं, हमारे जंगलों की खामोशी, हमारे पानी की गुणवत्ता, हमारी हवा की शुद्धता, हमारी मिट्टी की उर्वरता और जीवन की विविधता. आज, मुझे यह स्वीकार करना होगा कि इन लक्ष्यों का विरोध करने वाली ताकतें इतनी शक्तिशाली हो गई हैं कि अब मेरे पास इस महत्वाकांक्षा को आगे ले जाने के साधन नहीं बचे हैं."

पहले लगा था प्रतिबंध

नियोनिकोटीनोइड्स (neonicotinoids) नाम के कृषि रसायनों की श्रेणी से संबंधित ये दोनों कीटनाशक यूरोपीय संघ के नियमों के तहत तो स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में फ्रांस में इन पर प्रतिबंध लगा हुआ है. अब इन्हें चीनी चुकंदर, सेब, हेज़लनट और चेरी की खेती में उपयोग के लिए अधिकृत किया जा रहा है. 

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इसका विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों के लिए खतरा हैं. साथ ही इनका उपयोग करने से इंसानों की सेहत औप पर्यावरण पर भी असर पड़ता है. मोनिक का कहना है कि फ्रांस ने साल 2016 में पर्यावरण और स्वास्थ्य को देखते हुए एसीटामिप्रिड पर रोक लगाने का फैसला किया था. कई वैज्ञानिक स्टडी में भी इसको लेकर चिंता जताई गई है. 

वहीं समर्थकों का कहना है कि फ्रांस के चीनी चुकंदर, सेब और हेज़लनट के किसानों को अपने यूरोपीय प्रतिस्पर्धियों का मुकाबला करने में मदद के लिए इन कीटनाशकों की आवश्यकता है, जिन पर फ्रांस में क्रमशः 2018 और 2019 से प्रतिबंध लगा हुआ था.

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