रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका भारत और चीन पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, यूरोपीय सहयोगियों ने इस मांग को ठुकरा दिया। अब ट्रंप प्रशासन ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ के आर्थिक असर का आकलन करने के लिए 60 दिनों का समय लिया है। आखिर यूरोप ने अमेरिका का साथ क्यों नहीं दिया? रूस से ऊर्जा खरीदने पर भारत की क्या मजबूरी है? और ट्रंप प्रशासन ने 60 दिनों का वक्त क्यों लिया? जानिए इस पूरे घटनाक्रम की कहानी।