ईरान की राजधानी तेहरान की सड़कों पर जश्न का माहौल है. दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद लोग रात से ही बाहर निकलकर खुशी मना रहे हैं. कई इलाकों में लोग झंडे लेकर सड़कों पर दिखाई दिए. लंबे वक्त से जारी तनाव और हमलों के बीच यह राहत भरा पल लोगों के लिए बड़ी बात माना जा रहा है.
लेकिन इस जश्न के बीच सवाल भी उठ रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अचानक दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया.
सीजफायर का ऐलान उस डेडलाइन से कुछ घंटे पहले हुआ, जिसमें तेहरान को स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ खोलने के लिए कहा गया था, वरना भारी हमलों की चेतावनी दी गई थी.
कई इलाकों में सीजफायर का विरोध
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद ईरान की राजधानी की सड़कों पर सरकार-समर्थक प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए. नारों में कहा गया, "अमेरिका का नाश हो, इज़रायल का नाश हो, समझौता करने वालों का नाश हो."
इस दौरान लोगों ने सड़क पर अमेरिका और इज़रायल के झंडे भी जलाए.
'अमेरिका ने शर्तें मान ली...'
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सीजफायर को अपनी जीत बताया है. उनका कहना है कि अमेरिका ने ईरान की शर्तें मान ली हैं, जिसके बाद यह समझौता हुआ. वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने अलग दावा किया. उन्होंने कहा कि असल में अमेरिका और उसकी सैन्य ताकत ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ खोलने के लिए राजी किया है और आगे बातचीत जारी रहेगी.
गौर करने वाली बात यह है कि सीजफायर तो हुआ है, लेकिन अभी कोई फाइनल समझौता नहीं हुआ है. ऐसे में अनिश्चितता और शक बना हुआ है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह शांति लंबे वक्त तक टिक पाएगी या यह सीजफायर सिर्फ एक अस्थायी विराम साबित होकर रह जाएगा.
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ऑस्ट्रेलिया ने सीजफायर का स्वागत किया
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ और विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए मिडिल-ईस्ट में चल रहे संघर्ष का समाधान निकालने के लिए बातचीत करने हेतु दो हफ़्ते के सीजफायर का स्वागत किया है.
उन्होंने कहा, “ईरान द्वारा होर्मुज़ स्ट्रेट को असल में बंद कर देना और इसके साथ ही व्यापारिक जहाज़ों, नागरिक बुनियादी ढांचे, तेल और गैस सुविधाओं पर उसके हमले, ऊर्जा आपूर्ति में अभूतपूर्व झटके पैदा कर रहे हैं और तेल तथा ईंधन की क़ीमतों पर असर डाल रहे हैं.”
“हमने यह साफ़ कर दिया है कि यह युद्ध जितना लंबा चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर उतना ही ज़्यादा होगा और इसकी मानवीय क़ीमत भी उतनी ही ज़्यादा चुकानी पड़ेगी.”
अल्बानीज़ और वोंग ने मध्यस्थों (पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये और सऊदी अरब) का आभार जताया और कहा कि ऑस्ट्रेलिया चाहता है कि संघर्ष-विराम का पालन हो और इस संघर्ष का कोई समाधान निकले.