अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तीन दिनों तक चली शिखर वार्ता शुक्रवार को खत्म हो गई. दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस में साथ चाय पी और इसके बाद नेशनल आर्काइव्स का दौरा किया. दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की इस मुलाकात में व्यापार समेत कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, हालांकि ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ईरान और व्यापार से जुड़े कई बड़े मतभेद बरकरार रहे.
बातचीत के बाद ट्रंप ने कहा कि बातचीत के नतीजों से अमेरिकी किसान खुश होंगे. हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी. ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका इस यात्रा से बहुत खुश है और मुझे यकीन है कि चीन भी बहुत खुश है.' वहीं शी जिनपिंग ने अमेरिका-चीन संबंधों को सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता के आधार पर 'रणनीतिक स्थिरता' की ओर बढ़ता हुआ बताया.
दो महीने बढ़ा ट्रेड ट्रूस
दोनों देशों के बीच बातचीत का एक अहम नतीजा ट्रेड ट्रूस को दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमति रही. यह व्यवस्था 10 नवंबर को समाप्त होने वाली थी. इसके विस्तार से दोनों देशों को व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए एक्स्ट्रा टाइम मिल गया है.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि यात्रा के दौरान हुए सीमित व्यापार समझौतों की विस्तृत जानकारी सोमवार को जारी की जाएगी. ग्रीर के मुताबिक, दोनों देश कुछ महत्वपूर्ण वस्तुओं को व्यापारिक विवादों से अलग रखने पर भी सहमत हुए हैं. इनमें अमेरिका से चीन जाने वाले कृषि उत्पाद और मेडिकल डिवाइस तथा चीन से आने वाली उपभोक्ता और गैर-संवेदनशील वस्तुएं शामिल हैं.
ट्रंप ने दावा किया कि द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था के तहत अमेरिकी किसानों और पशुपालकों के लिए चीनी बाजार तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में प्रगति हुई है. दोनों नेताओं ने AI को भी आगे की बातचीत का एक क्षेत्र बताया.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह इस साल शी जिनपिंग से दो बार और मुलाकात करेंगे. दोनों नेता नवंबर में चीन में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) फोरम और दिसंबर में मियामी में G20 समिट के दौरान मिलेंगे.
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ईरान और ताइवान पर भी चर्चा
व्हाइट हाउस के रेड रूम में चाय पीने के बाद ट्रंप और जिनपिंग नेशनल आर्काइव्स पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिका के डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस, संविधान और बिल ऑफ राइट्स को देखा. ट्रंप ने बताया कि जिनपिंग के साथ ईरान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू के मुताबिक, ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति से कहा कि ईरान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं होगा. चीन इससे पहले ईरान की मदद करने के अमेरिकी आरोपों को खारिज कर चुका है.
ताइवान का मुद्दा भी बातचीत में प्रमुखता से उठा. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. जिनपिंग ने अमेरिका से ताइवान के मुद्दे को 'सावधानी से संभालने' और ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने वाले रुख पर कायम रहने की उम्मीद जताई.
अमेरिका के ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन वह उसका प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समर्थक है. ट्रंप ने जिनपिंग की इस यात्रा के बाद ताइवान को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया. दोनों देशों के बीच तकनीक, रेयर अर्थ, कृषि व्यापार, ईरान और ताइवान जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं.