अमेरिका ने सीरिया को आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देशों की लिस्ट से औपचारिक रूप से हटा दिया है. ट्रंप प्रशासन का यह फैसला सीरिया के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इससे देश पर लगे कई आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों में राहत का रास्ता खुल सकता है और अमेरिका की तरफ से सैन्य मदद देने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह फैसला सीरियाई लोगों को बेहतर भविष्य और आर्थिक तरक्की का रास्ता देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. अमेरिका ने इसके साथ ही अल-शरा के हयात तहरीर अल-शाम यानी HTS को भी स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट की लिस्ट से हटा दिया है.
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ट्रंप ने शरा को बताया था 'फैंटास्टिक'
इस फैसले का सीधा फायदा सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा को मिल सकता है. शरा पहले HTS के नेता थे और अब सीरिया के राष्ट्रपति हैं. उनका पुराना नाम अबू मोहम्मद अल-जोलानी था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से शरा के प्रति काफी सकारात्मक रुख दिखाते रहे हैं. ट्रंप ने उन्हें 'फैंटास्टिक', 'हाईली रिस्पेक्टेड' और 'टफ' तक बताया है. दोनों नेताओं की मुलाकात भी हो चुकी है.
1979 से आतंकवाद की लिस्ट में था सीरिया
अमेरिका ने सीरिया को 1979 में स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म की लिस्ट में डाला था. इसके बाद दशकों तक सीरिया पर कई तरह के आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध बने रहे. अब अमेरिका का कहना है कि शरा सरकार ने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है. रुबियो के मुताबिक सीरिया ने ISIS और अल-कायदा समेत कई आतंकी नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाए हैं. ग्लोबल कोएलिशन टू डिफीट ISIS में भी शामिल हुआ है.
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सीरिया की अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
अमेरिका के इस फैसले से सीरिया में विदेशी निवेश और निजी कंपनियों के लिए रास्ते खुल सकते हैं. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि आतंकवाद प्रायोजित देश का दर्जा हटाने से सीरिया की आर्थिक रिकवरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी वापसी आसान होगी.
यह फैसला ऐसे समय आया है जब इजरायल और सीरिया के बीच तनाव भी बढ़ा हुआ है. हाल ही में इजरायल ने सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमला किया था. इसके बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था. ऐसे माहौल में अमेरिका का सीरिया को यह बड़ा आर्थिक और राजनीतिक राहत देना ट्रंप प्रशासन की पश्चिम एशिया नीति में अहम बदलाव माना जा रहा है.