
तुर्की और इजरायल के बीच इन दिनों तनाव काफी बढ़ गया है. दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं. गाजा से लेकर सीरिया तक कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर दोनों टकराव की स्थिति में हैं. हालांकि, अभी दोनों के बीच सीधे युद्ध की संभावना कम है. लेकिन सीरिया में हालात बिगड़े तो दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ सकती हैं.
तुर्की-इजरायल के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह गाजा युद्ध है. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन लगातार इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते रहे हैं. वह फिलिस्तीन के समर्थन में खुलकर बोलते हैं. इजरायल पर गाजा में आम लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाते रहे हैं.
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इजरायल को एर्दोगन का यह रुख बिल्कुल पसंद नहीं है. पहले दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी सामान्य थे, लेकिन गाजा युद्ध के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं. अब इजरायल तुर्की को सिर्फ आलोचना करने वाले देश के तौर पर नहीं देखता. उसे लगता है कि तुर्की पश्चिम एशिया में उसके लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.

सीरिया में हो सकता है असली टकराव
तुर्की और इजरायल के बीच फिलहाल सीरिया में तनाव बढ़ा हुआ है. सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद तुर्की ने वहां अपना असर बढ़ाया है. तुर्की नई सीरियाई सरकार के करीब है. वहां अपनी सैन्य मौजूदगी भी बनाए रखना चाहता है. तुर्की ने ही अमेरिका के साथ मिलकर बशर अल-असद की सत्ता को खत्म किया है.
दूसरी तरफ इजरायल भी सीरिया पर लगातार नजर रख रहा है. उसे डर है कि तुर्की की बढ़ती सैन्य मौजूदगी आगे चलकर उसके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. अगर तुर्की समर्थित गुट इजरायल की सीमा के आसपास मजबूत होते हैं, तो तनाव और बढ़ सकता है.

भूमध्यसागर में भी पुराना विवाद
तुर्की और इजरायल के बीच सिर्फ गाजा और सीरिया को लेकर ही तनाव नहीं है. पूर्वी भूमध्यसागर में समुद्री इलाकों और गैस के भंडार को लेकर भी दोनों देशों के हित टकराते हैं. इजरायल के ग्रीस और साइप्रस के साथ अच्छे रिश्ते हैं. वहीं तुर्की का इन दोनों देशों के साथ पहले से विवाद चलता रहा है. ऐसे में इजरायल की इन देशों के साथ बढ़ती नजदीकी तुर्की को परेशान करती है.
क्या दोनों के बीच सच में जंग हो सकती है?
फिलहाल ऐसा होना मुश्किल माना जा रहा है. तुर्की नाटो का सदस्य है और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के साथ उसके लंबे समय से रिश्ते हैं. दूसरी तरफ इजरायल भी अमेरिका का करीबी सहयोगी है. ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधी जंग शुरू होती है तो इसका असर सिर्फ तुर्की और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा. पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में आ सकता है. इसलिए दोनों देश सीधे युद्ध से बचना चाहेंगे.
लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अगर सीरिया में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के रास्ते में आती हैं, तो छोटे स्तर की सैन्य कार्रवाई, एयर स्ट्राइक या किसी दूसरे गुट के जरिए हमला हो सकता है. यानी सीधी जंग की जगह प्रॉक्सी वॉर का खतरा ज्यादा है.

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क्या दोनों के बीच सच में जंग हो सकती है?
फिलहाल ऐसा होना मुश्किल माना जा रहा है. तुर्की नाटो का सदस्य है और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के साथ उसके लंबे समय से रिश्ते हैं. दूसरी तरफ इजरायल भी अमेरिका का करीबी सहयोगी है. ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधी जंग शुरू होती है तो इसका असर सिर्फ तुर्की और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा. पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में आ सकता है. इसलिए दोनों देश सीधे युद्ध से बचना चाहेंगे.
लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अगर सीरिया में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के रास्ते में आती हैं, तो छोटे स्तर की सैन्य कार्रवाई, एयर स्ट्राइक या किसी दूसरे गुट के जरिए हमला हो सकता है. यानी सीधी जंग की जगह प्रॉक्सी वॉर का खतरा ज्यादा है.
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन इजरायल के खिलाफ लगातार सख्त बयान दे रहे हैं. लेकिन वह यह भी जानते हैं कि इजरायल से सीधे भिड़ना आसान नहीं होगा. इससे तुर्की की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है.