मैं इस वक्त दक्षिणी लेबनान के सैदा शहर में मौजूद हूं, जिसे सैदून भी कहा जाता है. यह दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है और इसका इतिहास करीब 6,000 साल पुराना माना जाता है. लेकिन हालिया इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष में इस शहर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है.
पिछले तीन हफ्तों में यहां भारी तबाही देखने को मिली है. इजरायल ने हिजबुल्लाह से जुड़ी कई इमारतों को निशाना बनाया है. इसके अलावा हिजबुल्लाह के कई नेताओं और लड़ाकों को भी एयरस्ट्राइक में टारगेट किया गया है.
सैदा शहर में फिलिस्तीनी शरणार्थियों का एक बड़ा कैंप भी है. यही वजह है कि यहां सिर्फ हिजबुल्लाह ही नहीं, बल्कि हमास और अन्य फिलिस्तीनी गुटों से जुड़े लड़ाकों को भी इजरायल लगातार निशाना बना रहा है.
रविवार के बाद इस युद्ध ने नया मोड़ लिया है. दक्षिणी लेबनान के कई हिस्से अब देश के बाकी इलाकों से कट चुके हैं. इजरायल ने ग्राउंड इन्वेजन शुरू कर दिया है, हालांकि कुछ रणनीतिक कस्बों जैसे खियाम पर अभी पूरी तरह कब्जा नहीं हो पाया है.
यह भी पढ़ें: कहानी मेरी जुबानी: बेरूत में जंग के बीच इंसानियत की मिसाल... लोग बांट रहे उम्मीद और भोजन, मौत के साये में जिंदगी
अल-कामिया ब्रिज पर भारी एयरस्ट्राइक के बाद दक्षिणी लेबनान को काफी हद तक बाकी देश से अलग कर दिया गया है. कई अहम रास्ते अब बंद हो चुके हैं.
इजरायल अब धीरे-धीरे पूरे दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है. रात भर बमबारी जारी है. इजराइल के रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक हिजबुल्लाह को खत्म नहीं कर दिया जाता.
यह आसान नहीं दिखता. 2006 में भी हिजबुल्लाह ने इजरायल को दक्षिणी लेबनान से पीछे हटने पर मजबूर किया था. आज भी हिजबुल्लाह को हमास से ज्यादा मजबूत माना जाता है. ऐसे में यह युद्ध लंबा चल सकता है और इजरायल के लिए पूरी तरह जीत हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा.