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ईरान को कर दिया किनारे, जंग के बीच सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान तीनों सुन्नी मुस्लिम देशों का गठजोड़

ईरान जंग के बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान जेद्दा में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी में दिख रहे हैं, और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, राष्ट्रपति एर्दोगन और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शुक्रवार को इस पर दस्तखत कर सकते हैं.

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क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, रेचेप तैय्यप एर्दोगन, शहबाज शरीफ. (Photo- ITG)
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, रेचेप तैय्यप एर्दोगन, शहबाज शरीफ. (Photo- ITG)

ईरान जंग के बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान एक बड़े रक्षा समझौते की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं. तीनों देशों के नेता शुक्रवार को जेद्दा में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच इस कदम पर नजर बनी हुई है.

रॉयटर्स और अन्य विदेशी मीडिया में इस बात की खासा चर्चा है. एक न्यूज एजेंसी से बात करने वाले सऊदी सेना के करीबी एक सूत्र ने कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शुक्रवार को जेद्दा में इस समझौते पर दस्तखत करने वाले हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्र ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की इजाजत नहीं थी. सूत्र के मुताबिक, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की शुक्रवार को जेद्दा में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इस पर लंबे समय से चर्चा चल रही थी, लेकिन क्षेत्र में हाल की घटनाओं ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया.

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सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान... तीनों मुस्लिम देशों का गठजोड़

पिछले कई महीनों से ऐसी अटकलें भी चल रही थीं कि ये तीनों सुन्नी मुस्लिम देश क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के बीच अपना गठजोड़ और मजबूत करना चाहते हैं. इस बीच शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंच गए हैं. उनकी यह यात्रा शनिवार तक चलेगी.

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन पहुंचे सऊदी अरब

तुर्की की राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, एर्दोगन शुक्रवार को जेद्दा पहुंचने वाले हैं. इससे पहले सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच 2025 में संयुक्त रक्षा समझौते का ऐलान हो चुका है. उस समझौते के बाद कई तरह की अटकलें तेज हुई थीं. खास तौर पर इस बात पर चर्चा हुई कि क्या उसमें परमाणु सहयोग से जुड़ी कोई शर्त हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद के पास परमाणु हथियार हैं.

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पिछले जनवरी में सऊदी सेना के करीबी एक सूत्र ने एक न्यूज एजेंसी को बताया था कि तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के रक्षा समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा. यह बात उस समय सामने आई थी, जब तुर्की के एक अधिकारी ने संकेत दिया था कि अंकारा इस गठबंधन में शामिल होने को लेकर बातचीत कर रहा है.

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