रूस की राजधानी मास्को में सोमवार को अफगानिस्तान के मुद्दे पर अहम बैठक हुई. इसमें तालिबान सरकार के प्रतिनिधियों के साथ भारत, पाकिस्तान, चीन, ईरान समेत कई देशों के अधिकारी शामिल हुए. बैठक ऐसे समय हुई है जब रूस काबुल के साथ अपने रिश्ते लगातार आगे बढ़ा रहा है. रूस ने जुलाई 2025 में तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता दी थी.
बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी का स्वागत किया. लावरोव ने सत्ता संभालने के बाद तालिबान के कामकाज की तारीफ की. उन्होंने इस्लामिक स्टेट और दूसरे चरमपंथी संगठनों के खिलाफ तालिबान की कार्रवाई का जिक्र किया. इसके अलावा, ड्रग्स के अवैध कारोबार पर रोक लगाने की कोशिशों की भी सराहना की.
लावरोव ने मुत्तकी को नाटो सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी की पांचवीं वर्षगांठ पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि पांच साल का समय कम है, लेकिन इस दौरान तालिबान सरकार के काम दिखाई देते हैं. रूस ने अफगानिस्तान को मानवीय मदद जारी रखने की बात भी कही.
रूस ने की नाटो की आलोचना
बैठक में लावरोव ने अफगानिस्तान को लेकर रूस का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान या उसके आसपास के देशों में नाटो की किसी भी तरह की सैन्य मौजूदगी रूस को मंजूर नहीं है. लावरोव ने कहा कि पुराने अनुभव बताते हैं कि ऐसी सैन्य मौजूदगी से इलाके में तनाव बढ़ सकता है.
लावरोव ने अमेरिका-नाटो की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अफगान लोगों के संघर्ष ने उनकी ताकत को तोड़ दिया. उन्होंने आतंकवाद, ड्रग्स के खिलाफ तालिबान की कार्रवाई की तारीफ की. इसे रूस-तालिबान के सैन्य तकनीकी सहयोग से भी जोड़ा.
अफगानिस्तान से रूस का रिश्ता पुराना है. पूर्व सोवियत संघ ने वहां करीब 10 साल तक युद्ध लड़ा था. 1989 में उसकी सेना वापस चली गई. पिछले कुछ वर्षों में मॉस्को ने क्षेत्रीय देशों के साथ अफगानिस्तान पर बातचीत बढ़ाई है.
भारत-पाकिस्तान समेत कई देश एक मंच पर
बैठक में चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के अधिकारी शामिल हुए. तालिबान के साथ क्षेत्र के कई अहम देश एक ही मंच पर नजर आए. बैठक में अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव पर भी बात हुई. दोनों देशों के बीच कई महीनों से सीमा पर तनाव है. रूस ने इसे कम करने में मदद की पेशकश की है.