नेपाल में आई भीषण बाढ़ को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं. मौतों का आंकड़ा 788 तक पहुंच गया है, जबकि 2,500 से ज्यादा लोग लापता हैं. हजारों परिवार अपनों की तलाश में जुटे हैं. इस बीच कई ऐसे शव भी मिले हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है. ऐसे शवों के मामले में पहचान से जुड़े सबूत सुरक्षित रखते हुए अंतिम प्रक्रिया पूरी की जा रही है. वहीं, कई इलाकों में पानी फिर बढ़ने से बचाव का काम भी मुश्किल हो रहा है.
रविवार को भी कई प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी रहा. अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. मगर पानी का स्तर फिर बढ़ने से राहत दलों की मुश्किल बढ़ गई है. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों को सावधानी बरतने की चेतावनी भी दी गई है.
इसी बीच मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी का पानी फिर उफान पर आया. करीब तीन घंटे तेज बहाव में घ्यालचोक-चारौदी पुल बह गया. करीब 130 मीटर लंबा यह पुल गोरखा जिले के घ्यालचोक इलाके को पृथ्वी हाईवे से जोड़ता था. पुल टूटने से आसपास के करीब 400 परिवारों का मुख्य रास्ता बंद हो गया है.
पुल टूटा तो किसानों की मुश्किल बढ़ी
यह पुल सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं था. आसपास के किसान इसी रास्ते से दूध और सब्जियां चारौदी की कृषि सहकारी संस्था तक पहुंचाते थे. अब पुल बहने से उनकी उपज को बाजार तक पहुंचाना मुश्किल होगा. इससे पहले 26 अगस्त की बाढ़ में धवादिघाट का पुल भी बह चुका था. ऐसे में स्थानीय लोग जिस दूसरे रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे, वह भी अब बंद हो गया है.
बाढ़ के साथ आई गाद और मलबे ने कई इलाकों की सूरत बदल दी है.रसुवा में कई मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं. चीन बॉर्डर को जोड़ने वाला अहम मार्ग टूट जाने से राहत और व्यापार दोनों पर ब्रेक लग गया था. राहत की बात यह है कि सड़क दुरुस्त करने के काम के तहत करीब 150 मीटर हिस्सा ट्रैफिक के लिए चालू कर दिया गया है, जबकि बाकी हिस्से पर काम चल रहा है.
सुरंगों में अब भी जिंदगी की तलाश
सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में चल रहा है. रसुवा के 'अपर त्रिशूली-1' प्रोजेक्ट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के एक्सपर्ट्स भी जुटे हुए हैं. वहीं, भारतीय विशेषज्ञों के सहयोग से रसुवा में दो दिनों के भीतर 250 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. भारतीय टीम सुरंग के करीब तीन किलोमीटर भीतर तक जाकर लोगों की तलाश कर रही है. इसके अलावा चिलिमे और लांगटांग के इलाकों में भी नेपाली सेना के साथ मिलकर साझा अभियान चलाया गया, जो आगे भी जारी रहेगा.
इसके अलावा, नुवाकोट के 'अपर त्रिशूली-3 ए' प्रोजेक्ट की सुरंग में भी जिंदगी बचाने की जद्दोजहद जारी है. रास्ता साफ करने के लिए सेना के इंजीनियर कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग का सहारा ले रहे हैं. मौके पर सेना, सशस्त्र पुलिस के स्निफर डॉग्स और नेपाल पुलिस के जानकारों समेत करीब 90 लोगों की टीम तैनात है.
सुरंग के भीतर शुरुआत में दो बाई तीन फीट का एक छोटा रास्ता बनाया गया था, लेकिन अंदर से कोई आवाज या हलचल नहीं मिली. इसके बाद भारी मशीनों की मदद से रास्ते को चौड़ा करने का काम शुरू किया गया है, ताकि रेस्क्यू टीम जल्द से जल्द भीतर दाखिल हो सके.
सामूहिक रूप से हो रहे अंतिम संस्कार
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने से नेपाल के सामने एक और मुश्किल खड़ी हो गई है. कई शवों की पहचान नहीं हो पा रही है. ऐसे में उनकी पहचान और जरूरी जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं. परिवार अपने लापता लोगों की तलाश में अब भी जुटे हैं, इसलिए शवों की पहचान करना बचाव अभियान का अहम हिस्सा बन गया है.
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, अब तक 9,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. इसके बावजूद नेपाल में हालात गंभीर बने हुए हैं. बाढ़ से मरने वालों की संख्या 788 पहुंच गई है, जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं. ऐसे में बचाव दल उन इलाकों तक पहुंचने में जुटे हैं, जहां पानी, कीचड़ और मलबे ने रास्ते बंद कर दिए हैं.
रसुवा में बाढ़ के निशान अब भी मौजूद
बाढ़ की सबसे भारी मार रसुवा पर पड़ी है, जहां नदियां गाद से भर चुकी हैं और कई पक्के मकान ढह गए हैं. इसके अलावा, चीन बॉर्डर की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह जाने से राहत काम बुरी तरह प्रभावित हुआ था.
रास्ते को दुरुस्त करने के काम में जुटी टीमों ने करीब 150 मीटर सड़क को ट्रैफिक के लिए खोल दिया है. बाकी हिस्से को ठीक करने की कोशिशें जारी हैं. वहीं दूसरी तरफ, इसी इलाके में हाइड्रोपावर टनल के भीतर फंसे मजदूरों की तलाश में बचाव दल दिन-रात जुटे हुए हैं.
9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
रेस्क्यू ऑपरेशन का ब्योरा देते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट किया गया है. इस काम के लिए 394 हवाई उड़ानें भरी गईं, जिसमें रविवार की 72 उड़ानें भी शामिल रहीं.
राहत अभियान के तहत हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट वाले इलाकों से 279 लोगों को सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया. वहीं जमीन पर मोर्चा संभाले नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के 20,618 जवान दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं.
राहत केंद्रों में हजारों लोगों को सहारा
बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए रसुवा और नुवाकोट में 26 अस्थायी राहत केंद्र चलाए जा रहे हैं. रविवार को इन केंद्रों के जरिए 3,454 लोगों को रहने की जगह और राहत सामग्री दी गई. जिन इलाकों में घर या रास्ते बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, वहां फिलहाल यही केंद्र लोगों के लिए बड़ा सहारा बने हुए हैं.
बाढ़ में घायल हुए 267 लोगों को निकालकर स्थानीय अस्पतालों तथा काठमांडू के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. इनमें से 156 लोगों को इलाज के बाद छुट्टी मिल चुकी है. वहीं, प्रभावित इलाकों में डॉक्टरों की टीमें भी भेजी गई हैं, ताकि लोगों को इलाज के साथ मानसिक मदद मिल सके.
भारत से लगातार पहुंच रही मदद
भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी है. शनिवार रात भारतीय वायुसेना का C-130 विमान 11 टन सामान लेकर नेपाल रवाना हुआ था. इसमें सुरंग बचाव के उपकरण, तकनीकी सामान तथा डीएनए जांच से जुड़े जरूरी उपकरण शामिल हैं.
भारत अब तक 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचा चुका है. इसमें दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, खाने के पैकेट, पानी साफ करने वाली गोलियां, कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल तथा हाइजीन किट जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं. इसके साथ ही बाढ़ से टूटे संपर्क रास्तों को फिर जोड़ने के लिए स्टील और बेली ब्रिज का सामान भी भेजा जा रहा है.
मोबाइल नेटवर्क बहाल करने की कोशिश
बाढ़ से नेपाल टेलिकॉम और एनसेल के कई टावर प्रभावित हुए थे. अब तक नेपाल टेलिकॉम के 106 और एनसेल के 75 टावर फिर से चालू किए जा चुके हैं. प्रभावित इलाकों में 20 सैटेलाइट फोन भी भेजे गए हैं, ताकि जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है वहां बचाव दल आपस में संपर्क बनाए रख सकें.
फिलहाल नेपाल में सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों तक पहुंचना है. कहीं मलबा रास्ता रोक रहा है, कहीं सुरंग के भीतर जाने का रास्ता बंद है तो कहीं नदी का बढ़ता पानी बचाव अभियान में बाधा बन रहा है. ऐसे में राहत दल एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाई जा सके.