दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश होगा जहां सबसे बड़े नेता को सत्ता संभाले हुए दो हफ्ते से ज्यादा हो जाए और उसने एक बार भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया हो. न कोई भाषण, न कोई तस्वीर, न कोई वीडियो. यही हाल है ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का.
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए. यह ईरान के लिए बहुत बड़ा झटका था. लेकिन ईरानी सिस्टम रुका नहीं. 9 मार्च को अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बना दिया गया. लेकिन तब से लेकर आज तक मोजतबा एक बार भी सामने नहीं आए. हुआ क्या है उनके साथ?
28 फरवरी के उसी हमले में जिसमें उनके पिता मारे गए, मोजतबा भी घायल हुए थे. इजरायली और अमेरिकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक वो जिंदा हैं. लेकिन चोट इतनी गंभीर है कि वो सार्वजनिक रूप से नहीं आ सकते. एक अमेरिकी अधिकारी ने Axios को बताया, "हमें नहीं लगता कि ईरानियों ने किसी मरे हुए शख्स को सुप्रीम लीडर बनाया होगा. लेकिन यह भी साबित नहीं है कि वो देश चला रहे हैं."
इजरायल के सुरक्षा मामलों के जानकार राज़ ज़िम्त ने कहा, "उनकी चोट इतनी गंभीर है कि वो वीडियो भी जारी नहीं कर सकते. क्योंकि उससे दुनिया को पता चल जाएगा कि हालत कितनी खराब है." तो अब तक क्या-क्या हुआ?
मोजतबा ने दो बार बयान दिए. लेकिन दोनों बार खुद नहीं, किसी और ने पढ़े. 12 मार्च को पहला बयान दिया. टीवी न्यूज प्रेजेंटर ने पढ़कर सुनाया. इसमें कहा गया कि अमेरिका के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी और होर्मुज बंद रहेगा. 20 मार्च को नवरोज यानी ईरानी नए साल पर दूसरा बयान. फिर से लिखित, फिर से किसी और ने पढ़ा. इसमें ईरानी जनता की तारीफ की गई. उसी दिन ईरानी सरकारी मीडिया ने एक पुराना वीडियो जारी किया जिसमें मोजतबा किसी मदरसे में धार्मिक शिक्षा दे रहे हैं. लेकिन यह वीडियो कब का है यह नहीं बताया गया.
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असली सत्ता किसके हाथ में है? यही सबसे बड़ा सवाल है. इजराय के अखबार जेरूसलम पोस्ट ने अमेरिकी-इजरायली खुफिया सूत्रों के हवाले से लिखा कि इस वक्त ईरान में असली ताकत IRGC यानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हाथ में है।मोजतबा नाम के सुप्रीम लीडर हैं. लेकिन जमीन पर IRGC अपने हिसाब से काम कर रही है. यही वजह है कि ट्रंप की खुफिया बैठकों में भी यह सवाल उठ रहा है, "तेहरान में आखिर कमान किसके हाथ में है?" अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम अभी तक इसका जवाब ढूंढ रही है.
ईरान के बड़े नेता एक-एक करके मारे जा रहे हैं. मोजतबा की गैरमौजूदगी के बीच इजरायल ने ईरान के बड़े नेताओं को निशाना बनाना जारी रखा है.
16 मार्च को IRGC के बड़े कमांडर गुलामरजा सुलेमानी इजरायली हमले में मारे गए. 17 मार्च को अली लारीजानी जो ईरान की सुरक्षा रणनीति के मुखिया थे और बातचीत की मेज पर ईरान का चेहरा बन सकते थे. वो भी इजरायली हमले में मारे गए. यानी ईरान अपने एक-एक बड़े नेता को खो रहा है. लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, "एक अकेले इंसान की मौजूदगी या गैरमौजूदगी से ईरान का सिस्टम नहीं टूटता. सुप्रीम लीडर तक शहीद हुए, लेकिन देश चलता रहा."
आम तस्वीर क्या है?
28 फरवरी से अब तक ईरानी सरकार के मुताबिक 1,270 लोग मारे जा चुके हैं. ईरान ने जवाब में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले किए. होर्मुज की खाड़ी बंद कर दी और लगातार इजरायल पर मिसाइलें दागती रही है.
असली सवाल
एक देश जिसका सबसे बड़ा नेता घायल है और छुपा हुआ है. जिसके एक-एक बड़े अफसर मारे जा रहे हैं. जिसकी असली कमान एक फौज के हाथ में है. और फिर भी वो देश लड़ रहा है. मिसाइलें दाग रहा है. होर्मुज बंद रखे हुए है. दुनिया के 20 फीसदी तेल को रोके बैठा है. यही ईरान की असली ताकत है या कमजोरी? यह सवाल आने वाले दिनों में और साफ होगा.