इजरायल ने इस्लामी गणराज्य को उखाड़ फेंकने की कोशिश में हवाई हमलों में एक के बाद एक कई सीनियर ईरानी नेताओं को मार गिराया है. लेकिन सीनियर नेताओं को निशाना बनाने के उसके पिछले एक्सपीरिएंस से पता चलता है कि यह रणनीति एक हद तक ही काम करती है. यह फाइनल सॉल्यूशन नहीं है और कभी-कभी यह उलटी भी पड़ सकती है. एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ईरान के टॉप लीडर्स के खत्म करना बैकफायर की वजह बन सकता है.
इजरायल ने हिज्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को मार गिराया था. यह समूह अभी भी रॉकेट दागता है.
इसके अलावा इजरायली मिलिट्री ने हमास के शीर्ष नेतृत्व को भी मार गिराया. यह समूह अभी भी गाजा के आधे हिस्से पर कंट्रोल रखता है और उसने हथियार डालने से इनकार कर दिया है.
'टार्गेटेड हत्याओं का असर...'
रणनीति के रूप में टार्गेटेड हत्या का प्रयोग किसी राज्य के खिलाफ शायद ही कभी किया गया है. हालांकि, इससे नेताओं को ठोस उपलब्धियां मिल सकती हैं, जिन्हें वे इस तरह के युद्धों में जीत के रूप में पेश कर सकते हैं, जिनमें फाइनल रिजल्ट न निकल रहा हो. लेकिन इससे शायद ही वे वजहें खत्म होती हैं, जो लड़ाई को जन्म देती हैं.
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में वैश्विक सुरक्षा और भू-रणनीति के अध्यक्ष जॉन अल्टरमैन ने कहा कि टार्गेटेड हत्याओं का असर अक्सर वक्त के साथ कम हो जाता है.
उन्होंने कहा कि ईरानी सरकार और सेना कई तरह के परस्पर संबंधित संस्थानों से बनी है, जो अब तक अमेरिका और इजरायल के कठोर हमलों की लहरों से बची हुई हैं. उन्होंने कहा, "तानाशाहों को भी अपने समर्थकों के पूरे नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ता है."
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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई जंग की शुरुआत में ही मारे गए. उनकी जगह उनके बेटे मोजतबा ने ली है, जिन्हें और भी कट्टर माना जाता है.
टॉप कमांडरों के मारे जाने या भूमिगत हो जाने के बाद भी, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इज़रायल और पड़ोसी खाड़ी देशों पर लगातार मिसाइलें दागी हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को करीब अवरुद्ध कर दिया है.