scorecardresearch
 

ब्राजील में फिर लूला का शासन... भारत और BRICS के लिए क्या हैं मायने?

लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने 4.4 मिलियन वोटों की बढ़त से ब्राजील का राष्ट्रपति चुनाव जीतकर चौथा कार्यकाल पक्का किया. उनकी जीत भारत के लिए ब्रिक्स में तालमेल, अमेरिका-चीन के बीच संतुलन और पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य के लिहाज से अहम है.

Advertisement
X
PM नरेंद्र मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा. (Photo- PIB)
PM नरेंद्र मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा. (Photo- PIB)

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने चुनाव में जीत हासिल कर एक बार फिर सत्ता में अपनी जगह पक्की कर ली है. रविवार, 25 अक्टूबर को हुए दूसरे चरण के मतदान में लूला को 51.8 फीसदी वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2 फीसदी वोट मिले. ब्राजील के चुनाव आयोग सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (TSE) के आंकड़ों के मुताबिक, दोनों उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर करीब 44 लाख रहा. यह चौथी बार है जब लूला राष्ट्रपति बने हैं.

लूला ने जीत के बाद कहा कि वह लंबे समय से उन्हें समर्थन देने वाले ब्राजील के लोगों का शुक्रिया अदा करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ब्राजील किसी का पिछलग्गू बनकर नहीं रहेगा. वहीं, बोल्सोनारो ने चुनाव नतीजों को 'समझ से परे' बताया और कहा कि वह वोट रद्द कराने की कोशिश करेंगे. 26 अक्टूबर तक उन्होंने हार स्वीकार नहीं की थी.

यह भी पढ़ें: ब्राजील चुनाव में ट्रंप की भी हार! अमेरिका का 50% टैरिफ भी नहीं रोक पाया लूला की जीत

भारत के लिए क्यों अहम है लूला की जीत?

ब्राजील की राजनीति में यह बदलाव भारत के लिए भी अहम है. भारत और ब्राजील दोनों ब्रिक्स के शुरुआती सदस्य रहे हैं. इस समूह में अब 11 देश हैं, जिनमें भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, क्रय शक्ति समानता यानी परचेजिंग पावर पैरिटी के आधार पर ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था दुनिया के कुल उत्पादन का करीब 40 फीसदी हिस्सा बनाती है. इसके मुकाबले जी-7 देशों का हिस्सा एक चौथाई से ज्यादा है.

Advertisement

IMF के अनुमानों के मुताबिक, 2031 तक ब्रिक्स की हिस्सेदारी बढ़कर 43.1 फीसदी हो सकती है, जबकि जी-7 की हिस्सेदारी 25.8 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि, अगर अर्थव्यवस्था का आकार सामान्य अमेरिकी डॉलर में मापा जाए, तो जी-7 अब भी बड़ा है. वहीं, केवल ब्रिक्स के शुरुआती पांच देशों को गिनने पर यह समूह 2020 में जी-7 से आगे निकला था.

ब्रिक्स में भारत और ब्राजील की भूमिका

लूला की विदेश नीति का एक अहम पहलू यह रहा है कि ब्राजील अमेरिका और चीन जैसी बड़ी ताकतों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है. भारत भी दोनों देशों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित रखने की कोशिश करता है. ऐसे में लूला की जीत ब्रिक्स के भीतर भारत और ब्राजील के सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका दे सकती है.

भारत ने इस साल ब्रिक्स की अगुवाई की थी. सितंबर में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 सितंबर को ब्रिक्स नेताओं की बैठक हुई थी. लूला इसमें शामिल नहीं हुए और उन्होंने अपनी जगह विदेश मंत्री को भेजा. उस समय ब्राजील में चुनाव अभियान चल रहा था. करीब छह हफ्ते बाद लूला ने घरेलू चुनाव जीत लिया.

भारत-ब्राजील के बीच 15.1 अरब डॉलर का व्यापार

भारत के लिए ब्राजील के साथ व्यापार सबसे अहम पहलुओं में से एक है. वाणिज्य मंत्रालय के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट डेटा बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्राजील के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 15.1 अरब डॉलर रहा. यह 2010-11 के मुकाबले करीब दोगुना है. लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में ब्राजील भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. इस क्षेत्र में पेरू करीब 10 अरब डॉलर के व्यापार के साथ दूसरे स्थान पर है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: लूला की जीत पर PM मोदी ने दी बधाई, भारत-ब्राजील की दोस्ती और मजबूत करने पर जोर

हालांकि, भारत के लिए व्यापार का संतुलन अब ब्राजील के पक्ष में चला गया है. 2025-26 में भारत ने ब्राजील को 7 अरब डॉलर का सामान बेचा, जबकि वहां से 8.1 अरब डॉलर का सामान खरीदा. इससे भारत को करीब 1 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ. एक साल में ब्राजील से भारत का आयात करीब आधा बढ़ा, लेकिन उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि किन वस्तुओं की वजह से इसमें इतनी बढ़ोतरी हुई.

20 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लूला ने दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले पांच साल में 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने इस लक्ष्य पर सहमति जताई थी.

डीयूआई की गणना के अनुसार, इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए व्यापार को हर साल करीब 5.8 से 7.3 फीसदी की दर से बढ़ना होगा. पिछले 15 साल में दोनों देशों के बीच व्यापार औसतन 4.7 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा है. ऐसे में तय लक्ष्य हासिल करने के लिए व्यापार की रफ्तार बढ़ानी होगी.

चुनाव में देश दो हिस्सों में बंटा दिखा

Advertisement

ब्राजील के 27 राज्यों में से 13 में लूला और 14 में बोल्सोनारो को जीत मिली. इसके बावजूद लूला कुल वोटों में आगे रहे. पूर्वोत्तर ब्राजील में उन्हें दो-तिहाई से ज्यादा मतदाताओं का समर्थन मिला, जबकि दक्षिण में पांच में से तीन से ज्यादा मतदाताओं ने बोल्सोनारो को वोट दिया. उत्तर क्षेत्र में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां लूला केवल 1,079 वोटों से आगे रहे.

पूर्वोत्तर में लूला को बोल्सोनारो के मुकाबले 1.37 करोड़ ज्यादा वोट मिले. इसी बड़े अंतर ने उन्हें देशभर में कुल 44 लाख वोटों से जीत दिलाने में मदद की. रियो डी जेनेरियो के रोसिन्हा इलाके में रहने वाली स्पा कर्मचारी एलेसांद्रा मिगेल ने कहा कि पहले चरण के बाद लोगों को बोल्सोनारो की सरकार से जुड़े जोखिम का एहसास हुआ.

लूला के सामने अब आगे की चुनौती

लूला की जीत के बाद भी ब्राजील की राजनीति में तनाव खत्म नहीं हुआ है. बोल्सोनारो ने नतीजों को चुनौती देने की बात कही है. मतदान के दिन भी अव्यवस्था की खबरें आईं. दोनों पक्षों ने मतदान के लिए ज्यादा समय मांगा था. सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाया, लेकिन कुछ मतदान केंद्रों पर मशीनें पहले ही बंद हो चुकी थीं.

भारत के लिए अब सबसे अहम सवाल यह होगा कि लूला की जीत के बाद ब्राजील के साथ व्यापार को कितनी तेजी से बढ़ाया जा सकता है. लूला ने चुनाव जीतने के लिए नई दिल्ली में ब्रिक्स की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. अब दोनों देशों के पास व्यापार बढ़ाने और ब्रिक्स के भीतर सहयोग को मजबूत करने पर बातचीत आगे बढ़ाने का मौका है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement