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गुलामी के इतिहास पर ब्रिटिश राजघराने से माफी की मांग, किंग चार्ल्स के कैरेबियाई दौरे पर फिर उठा मुद्दा

राजा चार्ल्स तृतीय बहामास, गयाना और एंटीगुआ एंड बारबुडा के नौ दिन के दौरे पर हैं, जहां गुलामी पर माफी और मुआवजे की मांग उठ रही है. महल के मुताबिक वे गुलामी को इतिहास पर दाग बताएंगे, पर माफी नहीं मांगेंगे. विशेषज्ञ कहते हैं कि राजा सरकार की ओर से बोलते हैं और सरकार की नीति मुआवजा न देने की है, जो सैकड़ों अरब पाउंड का हो सकता है.

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ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के कैरेबियाई दौरे के दौरान गुलामी के इतिहास और उसके लिए माफी और मुआवजे की मांग एक बार फिर चर्चा में है (Photo: AP)
ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के कैरेबियाई दौरे के दौरान गुलामी के इतिहास और उसके लिए माफी और मुआवजे की मांग एक बार फिर चर्चा में है (Photo: AP)

ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय अगले नौ दिन बहामास, गयाना और एंटीगुआ एंड बारबुडा के दौरे पर हैं. हर जगह उन्हें गुलामी के मुद्दे की याद दिलाई जाएगी, क्योंकि ब्रिटेन से माफी और मुआवजे की मांग हो रही है. महल के अधिकारियों के मुताबिक चार्ल्स पहले कही बात दोहराएंगे कि गुलामी एक ऐसा अत्याचार था जो इतिहास पर हमेशा दाग रहेगा, पर माफी नहीं मांगेंगे.

गुलामी के दौर में लाखों अफ्रीकियों को कैरेबियाई देशों और उत्तरी अमेरिका ले जाकर गन्ने, तंबाकू और कपास के खेतों में काम कराया गया. इसका मुनाफा मालिकों और ब्रिटिश साम्राज्य को मिला.

मंगलवार को नासाउ में युवाओं की रैली में किंग चार्ल्स ने कहा कि अतीत के बड़े दुख और अन्याय को मानना सही है. लेखिका ब्रुक न्यूमैन इसे खोखला बताती हैं. वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी की इस प्रोफेसर ने 464 पन्नों की किताब द क्राउन्स साइलेंस लिखी है. उनके मुताबिक इससे वंशजों से बातचीत नहीं बनती और लोग नाराज हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि मामला बंद कर दिया गया है.

किताब के मुताबिक राजघराने का रिश्ता 1563 से जुड़ता है. तब महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने कप्तान जॉन हॉकिंस की उस योजना का साथ दिया, जिसमें पश्चिम अफ्रीका के पुर्तगाली बंदरगाहों से लोगों को पकड़कर कैरेबियाई स्पेनिश उपनिवेशों में ले जाना था. महारानी ने हॉकिंस को शाही नौसेना का युद्धपोत दिया और बदले में मुनाफे का हिस्सा लिया. करीब सौ साल बाद चार्ल्स द्वितीय ने रॉयल अफ्रीकन कंपनी को पश्चिम अफ्रीकी तट पर व्यापार का खास हक दिया. यह कंपनी सोना, खाल और हाथीदांत से गुलामों के कारोबार तक पहुंच गई. किंग चार्ल्स और उनके भाई ड्यूक ऑफ यॉर्क, जो बाद में जेम्स द्वितीय बने, इसके निवेशकों में थे. ब्रिटिश साम्राज्य में गुलामों के व्यापार पर 1807 में और गुलामी पर उसके 26 साल बाद रोक लगी.

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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मार्च में पूरी माफी और मुआवजे की मांग वाला प्रस्ताव पास किया, जिस पर ब्रिटेन वोटिंग से दूर रहा. विशेषज्ञ क्रेग प्रेस्कॉट के मुताबिक किंग चार्ल्स सरकार की ओर से बोलते हैं, इसलिए माफी नहीं मांगेंगे. सरकार की नीति है कि गुलामी दाग है, पर मुआवजा नहीं मिलेगा. यह रकम सैकड़ों अरब पाउंड हो सकती है और महंगाई के बीच सरकार पहले ही खर्च से जूझ रही है.

कॉमनवेल्थ 56 आजाद देशों का संगठन है, जिसके प्रमुख चार्ल्स हैं. ब्रिटेन के अलावा 14 देशों में वही राष्ट्राध्यक्ष हैं. दौरे के आखिरी चार दिन एंटीगुआ एंड बारबुडा में होंगे, जहां कॉमनवेल्थ नेताओं की बैठक है. कैरेबियाई मुआवजा आयोग के अध्यक्ष हिलेरी बेकल्स ने उनसे किंग चार्ल्स नहीं, एक पिता और दादा की तरह जवाब देने की अपील की. उनके मुताबिक चार्ल्स जो दौलत अपने बच्चों को दे रहे हैं, वह गुलामी से आई है.

ब्रिटेन ने 2007 में गुलामों के व्यापार पर रोक की 200वीं सालगिरह पर विलियम विल्बरफोर्स और उनके साथियों को सराहा, जिन्होंने संसद को मनाने में 20 साल लगाए थे. वेस्टमिंस्टर एबे के समारोह में टोयिन अगबेतू ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए और माफी मांगनी चाहिए. ब्रुक न्यूमैन के मुताबिक गुलामी का असर आज भी है, इसे दो वाक्यों में निपटाया नहीं जा सकता.

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