इजरायल की राजधानी तेल अवीव में स्थित लवेन्स्की मार्केट को यहां का 'छोटा ईरान' या 'छोटा तेहरान' कहा जाता है. दिल्ली के खारी बावली की याद दिलाने वाले इस बाजार में ईरानी यहूदियों और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान से पलायन करने वाले लोगों की मसालों की दुकानें मौजूद हैं. यहां की दुकानों पर काजू, बादाम, पिस्ता और चिलगोजा जैसे ड्राई फ्रूट्स के साथ-साथ कई ईरानी मसाले और फूड्स मिलते हैं.
मौजूदा जंग और तनाव के बावजूद यहां के लोग इजरायल और ईरान के बीच आने वाले वक्त में शांति की उम्मीद करते हैं. स्थानीय व्यापारियों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह संघर्ष लोगों के बीच नहीं बल्कि मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ है.
बाजार में खुले रखे मसालों के बीच कबूतरों की मौजूदगी और दुकानों का माहौल बिल्कुल तेहरान के पारंपरिक बाजारों जैसी फीलिंग देता है. यहां रहने वाले ईरानी मूल के लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए इन्हीं मसालों और पकवानों का सहारा लेते हैं.
मसालों की दुकानों में तेहरान का एहसास
लवेन्स्की मार्केट अपनी मसालों की दुकानों और शुद्ध ईरानी फूड्स के लिए तेल अवीव में मशहूर है. यहां आपको अदरक और लहसुन के साथ-साथ ईरानी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले स्पेशल काले नींबू भी देखने को मिलेंगे. दुकानदार एज्रा, जिनके माता-पिता तेहरान से आए थे, बताते हैं कि यह बाजार उन्हें उन कहानियों की याद दिलाता है, जो उन्होंने अपने माता-पिता से सुनी थीं. यहां 'पोलो' (चावल का एक व्यंजन) और 'गोंडी' जैसे पारंपरिक ईरानी पकवानों का सामान आसानी से मिल जाते हैं.
बाजार में मौजूद राजनीतिक कार्यकर्ता और रजा पहलवी की समर्थक सबा कोही ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के झंडे थामे हुए अपनी बात रखी. लंदन में रहने वाली सबा ने बताया कि वे 2007 में ईरान छोड़कर आई थीं और वहां सरकारी मंत्रालय में काम करती थीं. उन्होंने कहा कि ईरान के लोग मौजूदा मुल्ला शासन के खिलाफ हैं और वे इजरायल, अमेरिका और भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं. सबा के मुताबिक, नई पीढ़ी ईरान के लिए एक बेहतर और अच्छे फ्यूचर की तलाश में है.
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युद्ध और वतन की यादों के बीच संघर्षय...
जब सबा से पूछा गया कि उनके वतन पर हो रहे हमलों के बारे में वे क्या सोचती हैं, तो उन्होंने कहा कि हमले नागरिकों पर नहीं बल्कि 'इस्लामिक शासन' के आतंकवाद पर हो रहे हैं. उन्होंने उत्तर ईरान में रहने वाले अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि वे डरे हुए हैं लेकिन उन्हें लगता है कि यह बदलाव के लिए जरूरी है. सबा का मानना है कि ईरान के लोग अच्छे हैं और उनका किसी भी देश के साथ कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है.
बाजार में खरीदारी कर रहे एज्रा ने बताया कि इजरायल और ईरान के बीच तनाव की वजह वहां की 'कट्टरपंथी सत्ता' है. उनका मानना है कि किसी भी विचारधारा को सेना की ताकत से नहीं बदला जा सकता, बल्कि ईरान के लोगों को खुद यह बदलाव लाना होगा. एज्रा ने कहा कि शाह के वक्त में दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध थे और भविष्य में वे फिर से लेबनानी, सीरियाई और ईरानियों के साथ शांति से सह-अस्तित्व में रहना चाहते हैं.
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ईरानी जायके का अनोखा एक्सपीरिएंस
बाजार में मिलने वाले मसाले और ड्राई फ्रूट्स न सिर्फ इजरायल के लोगों को पसंद हैं, बल्कि यहां आने वाले सैलानी भी इनके मुरीद हैं. यहां मिलने वाली ईरानी चॉकलेट, जिसे 'लवाशक' (बिना नमक वाली खट्टी पट्टी) कहा जाता है, बहुत लोकप्रिय है. इसके अलावा 'फौल' जैसी चीजें भी यहां मिलती हैं, जिन्हें उबालकर खाया जाता है. यह मार्केट दिखाता है कि सियासी सरहदों और जंगों के बावजूद तहज़ीब और स्वाद के जरिए लोग अपनी जड़ों को जिंदा रखते हैं.
बाजार की कई दुकानों के मालिक वे लोग हैं, जो 1979 के बाद इजरायल आए थे. एक दुकानदार ने बताया कि वे 1999 में ईरान छोड़कर आए थे और अब इजरायल में अपनी पहचान बना चुके हैं. इन लोगों के लिए यह बाजार सिर्फ व्यापार की जगह नहीं, बल्कि अपनी यादों को संजोने का एक जरिया है. यहां की हर गली और हर दुकान में ईरान के किसी न किसी शहर की कहानी छिपी हुई है.
सबा कोही ने सुझाव दिया कि भविष्य की क्रांति और उसके बाद के कार्यक्रमों के लिए प्रिंस रजा पहलवी के प्रोजेक्ट 'मेगा' के बारे में जानकारी लेनी चाहिए. यहां के लोगों का मानना है कि एक दिन ईरान फिर से ग्रेट बनेगा और क्षेत्र में शांति बहाल होगी. फिलहाल, लवेन्स्की मार्केट के ये व्यापारी और निवासी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और व्यापार के जरिए शांति का मैसेज दे रहे हैं.