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इजराइल में आइजेनकोट के लिए सरकार बनाने की राह क्यों नहीं आसान? समझें पूरा नंबर गेम

इजराइल में राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिया है. लेकिन आइजेनकोर्ट की राह इतनी आसान नहीं है. जानिए नेतन्याहू की सीटें, अरब पार्टियों का समर्थन और बहुमत का पूरा नंबर गेम.

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आइजेनकोट को राष्ट्रपति ने सरकार बनाने का न्यौता दिया है (फोटो-ITG)
आइजेनकोट को राष्ट्रपति ने सरकार बनाने का न्यौता दिया है (फोटो-ITG)

इजराइल में सत्ता की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत का आंकड़ा हासिल करने में नाकाम रही. दूसरी तरफ यशार पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है. राष्ट्रपति के सामने समर्थन के मामले में आइजेनकोट ने नेतन्याहू को पीछे छोड़ दिया है. हालांकि, राष्ट्रपति से सरकार बनाने का न्योता मिलना और संसद में बहुमत साबित करना दो अलग-अलग बातें हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या आइजेनकोट इजराइल में नई सरकार बना पाएंगे?

चुनाव में किसे मिलीं कितनी सीटें?

27 अक्टूबर को हुए इजराइल के चुनाव में लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलीं हैं. इसके बावजूद नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन कुल 53 सीटों पर सिमट गया. इजराइल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. इस लिहाज से नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से 8 सीट पीछे रह गया.

वहीं, गादी आइजेनकोट की यशार पार्टी ने 21 सीटों पर जीत दर्ज की. उनके चेंज ब्लॉक गठबंधन को कुल 48 सीटें मिलीं. इस तरह चुनाव नतीजों के बाद किसी भी गठबंधन को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला. सरकार बनाने के लिए दूसरे राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करना दोनों पक्षों की मजबूरी बन गया.

आइजेनकोट को ऐसे मिली बढ़त

सरकार गठन के इस मुकाबले में दो अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो गई. 19 सीटें जीतने वाली जॉइंट लिस्ट और राम (Ra'am) ने राष्ट्रपति के सामने गादी आइजेनकोट के नाम की सिफारिश की. जॉइंट लिस्ट के पास 12 और राम के पास 7 सीटें हैं. इन दोनों दलों के समर्थन से राष्ट्रपति के सामने आइजेनकोट की दावेदारी मजबूत हो गई.

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राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ राजनीतिक दलों की बातचीत के दौरान 67 सांसदों वाले गुटों ने आइजेनकोट को सरकार बनाने की जिम्मेदारी देने की सिफारिश की. वहीं, 46 सांसदों वाले गुटों ने नेतन्याहू के नाम का समर्थन किया. इसके अलावा नेतन्याहू के गठबंधन में शामिल यूनाइटेड तोराह जुदाइज्म (UTJ) ने किसी भी नेता के नाम की सिफारिश नहीं की। इस पार्टी के पास 7 सीटें हैं.

आइजेनकोट को सरकार बनाने का जिम्मा

इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों के साथ बातचीत और विचार-विमर्श के बाद यशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी. राष्ट्रपति के मुताबिक, इस प्रक्रिया के दौरान उन्होंने नेसेट के विभिन्न राजनीतिक गुटों से बातचीत की. साथ ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और आइजेनकोट से मुलाकात भी की.

हर्जोग ने बताया कि 67 सांसदों वाले गुटों ने आइजेनकोट के नाम की सिफारिश की, जबकि 46 सांसदों वाले गुटों ने नेतन्याहू का समर्थन किया. सात सांसदों वाले एक गुट ने किसी के नाम की सिफारिश नहीं की. राष्ट्रपति ने आइजेनकोट को औपचारिक रूप से जनादेश सौंपने के लिए राष्ट्रपति आवास पर आमंत्रित किया. इसके लिए रविवार, 28 चेशवान को समारोह आयोजित होना निर्धारित किया गया है.

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गठबंधन में मतभेद

राष्ट्रपति से जनादेश मिलने के बावजूद आइजेनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने गठबंधन को एकजुट रखने की है. उनके चेंज ब्लॉक के कई कट्टरपंथी सदस्य सार्वजनिक रूप से अरब पार्टियों के किसी भी तरह के समर्थन का विरोध कर चुके हैं. ऐसे में जॉइंट लिस्ट और राम का समर्थन हासिल करने के बावजूद आइजेनकोट के लिए इन दलों को साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा.

राष्ट्रपति के सामने 67 सांसदों के समर्थन की सिफारिश को संसद में सरकार के पक्ष में पक्का बहुमत नहीं माना जा सकता. आइजेनकोट को सरकार गठन के दौरान यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके समर्थक दल एक साथ बने रहें. इजराइल की संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं और इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें राजनीतिक सहमति बनानी होगी.

क्या ऐसा भी हो सकता है?

इस बीच शनिवार रात यशार पार्टी ने एक चौंकाने वाला बयान दिया. पार्टी ने संकेत दिया कि लिकुड और उसके सहयोगी दल आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो सकते हैं. लिकुड प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी है. यदि ऐसा होता है तो इजराइल में सरकार गठन का मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदल सकता है.

हालांकि, नेतन्याहू को आइजेनकोट की सरकार में शामिल होने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है. आइजेनकोट चुनाव से पहले कई बार साफ कर चुके हैं कि वह नेतन्याहू के साथ किसी गठबंधन सरकार में शामिल नहीं होंगे. ऐसे में लिकुड के साथ संभावित गठबंधन की चर्चा के बावजूद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद बड़ी बाधा बने हुए हैं.

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नेतन्याहू के खिलाफ रहा रुख

गादी आइजेनकोट का नेतन्याहू के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद सत्ता में जवाबदेही के मुद्दे से भी जुड़ा है. आइजेनकोट कई बार कह चुके हैं कि हमले के समय सत्ता के प्रमुख पदों पर मौजूद रहे लोगों को सार्वजनिक जीवन से हट जाना चाहिए. उनका यह रुख नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को लेकर उनके नजरिए को भी साफ करता है.

ऐसे में आइजेनकोट के सामने एक तरफ अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर अपने गठबंधन में सहमति बनाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ बहुमत के लिए जरूरी सांसदों को साथ लाने का दबाव है. नेतन्याहू के साथ गठबंधन नहीं करने के उनके पुराने रुख से राजनीतिक विकल्प भी सीमित होते हैं. यही वजह है कि राष्ट्रपति से सरकार बनाने का जनादेश मिलने के बावजूद नई सरकार का गठन आसान नहीं दिख रहा है.

इजराइल का नंबर गेम

इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. चुनाव और राष्ट्रपति के सामने हुई सिफारिशों से जुड़े प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

- लिकुड पार्टी: 27 सीटें
- नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन: 53 सीटें
- गादी आइजेनकोट की यशार पार्टी: 21 सीटें
- चेंज ब्लॉक गठबंधन: 48 सीटें
- जॉइंट लिस्ट: 12 सीटें
- राम (Ra'am): 7 सीटें
- यूनाइटेड तोराह जुदाइज्म (UTJ): 7 सीटें

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राष्ट्रपति के सामने आइजेनकोट के समर्थन में 67 सांसदों वाले गुटों ने सिफारिश की, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने समर्थन जताया. सात सांसदों वाले गुट ने किसी के नाम की सिफारिश नहीं की. अब देखना होगा कि आइजेनकोट इन राजनीतिक समर्थन को वास्तविक संसदीय बहुमत में बदल पाते हैं या नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता में बने रहने का रास्ता निकालते हैं.

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