घड़ी की टिक-टिक तेज हो चुकी है और बोर्ड परीक्षाओं के आने में अब सिर्फ 90 दिन का वक्त बाकी है. यूपी बोर्ड की थ्योरी परीक्षाएं जहां 5 फरवरी 2027 से शुरू होने जा रही हैं, वहीं सीबीएसई (CBSE) के इम्तिहान भी फरवरी-मार्च के दौरान ही आयोजित होने वाले हैं. जैसे-जैसे परीक्षा की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे घरों में तनाव का पारा चढ़ने लगा है.
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि छात्र दिन-रात किताबों में आंखें गड़ाए रहते हैं, घंटों पढ़ाई करते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्हें ऐसा महसूस होने लगता है कि वे पिछला सब कुछ भूल चुके हैं. इतिहास की तारीखें हों, विज्ञान के फॉर्मूले या फिर लिटरेचर के चैप्टर्स, दिमाग एकदम खाली सा लगने लगता है. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?
नंबरों का डर और परफॉर्मेंस प्रेशर
सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता का कहना है कि इसके पीछे बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक कारण है. बच्चों के मन में बोर्ड एग्जाम का डर कई साल पहले से ही इस तरह भर दिया जाता है जैसे यह कोई परीक्षा नहीं बल्कि पूरे परिवार की प्रतिष्ठा का पैमाना हो. इस 'परफॉर्मेंस प्रेशर' के साये में जीते हुए बच्चे अपनी प्राकृतिक क्षमता खो बैठते हैं. सबसे पहले हमें इस माहौल को बदलने और बोर्ड परीक्षाओं को सामान्य करने की जरूरत है.
जयपुर के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. अनिल सिंह शेखावत इस बात को आगे बढ़ाते हुए समझाते हैं कि जब छात्र तनाव में लगातार पढ़ते हैं, तो उनका ब्रेन बर्नआउट का शिकार हो जाता है. ऐसी स्थिति में पढ़ा हुआ दिमाग में स्टोर होना बंद हो जाता है. इस समस्या से पार पाने के लिए तीन बेहद आसान और वैज्ञानिक टूल्स अपनाए जा सकते हैं, जिससे बच्चे इतिहास की तारीखों से लेकर हर मुश्किल विषय को आसानी से क्रमबद्ध करके याद रख सकते हैं:
याददाश्त और तैयारी बढ़ाने वाले 3 जादुई टूल्स
भरपूर नींद: सबसे पहला और सबसे जरूरी टूल है पर्याप्त नींद. अगर कोई छात्र परीक्षा के दिनों में 8 से 9 घंटे भी सो रहा है, तो उसे टोकिए मत. दिनभर के बचे हुए 14-15 घंटे उसकी पढ़ाई के लिए बहुत हैं. नींद के दौरान ही हमारा दिमाग सीखी हुई चीजों को 'शॉर्ट-टर्म' से 'लॉन्ग-टर्म मेमोरी' में ट्रांसफर करता है. बच्चों को कभी भी नींद से जगाकर न पढ़ाएं.
सुपाच्य और हाइड्रेटिंग डाइट: लंबी पढ़ाई के दौरान दिमाग को ऊर्जा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. जंक फूड या भारी खाने के बजाय शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है. पानी के साथ-साथ नारियल पानी, फ्रेश जूस और प्रोटीन-विटामिन से भरपूर हल्का भोजन दें, ताकि सुस्ती न आए और फोकस बना रहे.
फिजिकल एक्सरसाइज या हॉबी: अक्सर परीक्षा के दिनों में बच्चे घर से निकलना बिल्कुल बंद कर देते हैं और किताबों में सिमट जाते हैं. यह सबसे बड़ी गलती है. दिनभर में कम से कम 30 मिनट अपनी पसंद का खेल खेलें या वॉक करें. जब शरीर एक्टिव रहता है, तो ब्रेन में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है, जिससे एकाग्रता और याद रखने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है.
एग्जाम स्ट्रेस को ऐसे कहें अलविदा
अपनी वास्तविकता स्वीकार करें और दूसरों की देखा-देखी कोई बड़ा और असंभव गोल न बनाएं. अपनी क्षमता के अनुसार योजना बनाएं.
आउटपुट नहीं, इनपुट्स पर फोकस करें. रिजल्ट क्या आएगा, इस पर माथापच्ची करने के बजाय आज के चैप्टर को बेहतर ढंग से समझने पर ध्यान दें.
खुद पर जबरन सख्त रूटीन न थोपें. ऐसा टाइमटेबल न बनाएं जिसे पूरा न कर पाने पर आप अपराधबोध (गिल्ट) में आ जाएं.
स्क्रीन टाइम घटाएं. सोशल मीडिया और रील्स की दुनिया से इन दिनों में दूरी बना लें, क्योंकि यह फोकस को सबसे ज्यादा तोड़ता है.
शॉर्टकट से बचें. एकाग्रता बढ़ाने के लिए किसी भी तरह की दवा, एनर्जी ड्रिंक्स या ब्लैक कॉफी पर निर्भर न हों.
दिल की बात कहें. अगर घुटन महसूस हो, तो अपने दोस्तों, माता-पिता या किसी काउंसलर से खुलकर बात करें.
याद रखिए, बोर्ड परीक्षा आपके जीवन का एक छोटा सा पड़ाव भर है, आपकी पूरी जिंदगी और सेहत से बढ़कर कुछ नहीं. इसलिए तनाव को छोड़िए, सही रणनीति अपनाइए और कॉन्फिडेंस के साथ अपनी तैयारी कीजिए!