गादी आईजेनकोट (Gadi Eisenkot) इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख और प्रमुख राजनेता हैं. वर्ष 2025 में उन्होंने याशर पार्टी की स्थापना की और इजरायल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई. साल 2026 के चुनावों के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण वह प्रधानमंत्री पद की दावेदारी में प्रमुख रूप से उभरे. 6 नवंबर 2026 को एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें नेतन्याहू के मुकाबले अधिक सांसदों का समर्थन मिला था. हालांकि, प्रधानमंत्री पद के लिए अंतिम निर्णय इजरायल में सरकार गठन की प्रक्रिया पर निर्भर था.
उनका जन्म 19 मई 1960 को इजरायल के तिबेरियास शहर में हुआ था. उनके माता-पिता मोरक्को से इजरायल आए थे. आईजेनकोट ने अपने करियर की शुरुआत सेना से की और करीब चार दशक तक इजरायल की सैन्य सेवाओं में रहे.
आईजेनकोट ने 1978 में इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) की गोलानी ब्रिगेड में भर्ती होकर सैन्य जीवन की शुरुआत की. उन्होंने सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. 16 फरवरी 2015 को उन्हें इजरायल रक्षा बल का 21वां चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया. उन्होंने जनवरी 2019 तक इस पद पर काम किया. इस दौरान उन्होंने इजरायल की सुरक्षा और सैन्य रणनीति से जुड़े कई अहम फैसलों में भूमिका निभाई.
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद आईजेनकोट ने राजनीति में कदम रखा. वर्ष 2022 में वह बेनी गैंट्ज की नेशनल यूनिटी पार्टी से जुड़े और इजरायल की संसद नेसेट के सदस्य बने. 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आपातकालीन युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए. हालांकि, जून 2024 में उन्होंने सरकार से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने युद्ध को लेकर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए थे.
आईजेनकोट के निजी जीवन में गाजा युद्ध के दौरान बड़ा दुख आया. उनके बेटे गाल आईजेनकोट की दिसंबर 2023 में गाजा में सैन्य अभियान के दौरान मौत हो गई थी. उनके दो भतीजे भी युद्ध में मारे गए.
पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे हैं. 67 सांसदों ने आइजनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की है, जबकि 46 सांसद नेतन्याहू के समर्थन में हैं. हमास को आतंकी संगठन मानने की शर्त पर आइजनकोट और संभावित सहयोगी राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास के बीच मतभेद भी सामने आया है.
इजरायल में 67 सांसदों ने गादी आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन दिया, जबकि बेंजामिन नेतन्याहू को 46 सांसदों का साथ मिला. रविवार को सरकार बनाने का जिम्मा मिलने की संभावना के बीच बहुमत का रास्ता अरब और यहूदी नेतृत्व वाले दलों की साझेदारी पर टिका है.