जंग के दौरान ईरान में गिरे एक F-15 लड़ाकू विमान के क्रू मेंबर को बचाने को लेकर खबरें सामने आई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के दौरान विमान क्षतिग्रस्त हुआ और पायलट ने इजेक्ट किया. इसके बाद अमेरिकी सेना ने सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, जिससे पायलट को सुरक्षित निकाला जा सके.
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रू मेंबर को बचाने की कहानी बताते हुए, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों को शुरू में डर था कि फंसे हुए अधिकारी का रेडियो मैसेज एक ईरानी जाल का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद अमेरिकी सेना को किसी घात में फंसाना था. यह चिंता उस तीन शब्दों के मैसेज से पैदा हुई, 'God is good', जिसे फंसे हुए वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर ने ईरान के ऊपर विमान से बाहर निकलने (Eject) के बाद भेजा था.
इस मैसेज ने कुछ वक्त के लिए यह शक पैदा कर दिया था कि कहीं ईरानी सेना जाल बिछाने के लिए झूठे संकेतों का इस्तेमाल तो नहीं कर रही है.
200 सैनिकों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
घायल वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर पहाड़ी इलाके में 24 घंटे से ज़्यादा वक्त तक जिंदा रहा, जिसके बाद उसे एक बहुत जोखिम के बीच रात के वक्त स्पेशल फोर्सेज मिशन के ज़रिए बाहर निकाला गया. इस मिशन में करीब 200 सैनिक शामिल थे.
ट्रंप के मुताबिक, पायलट एक पहाड़ी दरार में छिपा रहा, जबकि 'हज़ारों' ईरानी सैनिक और स्थानीय नागरिक उसे ढूंढ रहे थे. कथित तौर पर तेहरान ने उसे पकड़ने वालों के लिए इनाम का भी ऐलान किया था. अमेरिकी निगरानी तकनीक ने आखिरकार उसकी लोकेशन का पता लगा लिया.
लेकिन इस बीच एक असामान्य रेडियो मैसेज चर्चा का विषय बन गया. इसे शुरू में 'Power be to God' के रूप में सुना गया था और बाद में रक्षा अधिकारियों ने कहा कि यह मैसेज 'God is good' था. इस मैसेज से कुछ वक्त के लिए यह चिंता पैदा कर दी थी कि कहीं वह पकड़ा तो नहीं गया है और कहीं ईरानी सेना झूठे इशारे तो नहीं भेज रही है. अधिकारियों ने बाद में कहा कि अधिकारी जिंदा था और अभी भी पकड़े जाने से बच रहा था.
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यूएस का यह रेस्क्यू ऑपरेशन F-15 पायलट को निकालने के लिए दिन के वक्त चलाए गए एक पहले के ऑपरेशन के बाद हुआ. पायलट विमान से बाहर निकलने के बाद कई मील दूर उतरा था. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पहले रेस्क्यू ऑपरेशन को ईरानी गोलाबारी के बीच एक 'साहसी और कम वक्त में बचाव' बताया, जबकि दूसरा मिशन रात के वक्त चलाया गया, जब अमेरिकी सेना ने ईरानी क्षेत्र के अंदर एक अस्थायी बेस स्थापित कर लिया था. इलाके में भीषण लड़ाई के बावजूद, दोनों क्रू मेंबर्स को आखिरकार सुरक्षित बचा लिया गया.
ट्रंप ने Axios के साथ बातचीत में बताया, "इस ऑपरेशन के दौरान इज़रायल ने सीमित सहायता प्रदान की थी."
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इज़रायली खुफिया एजेंसी ने लापता अधिकारी का पता लगाने में सीधे तौर पर मदद नहीं की, लेकिन उसने ईरानी सैनिकों की गतिविधियों के बारे में स्थिति की जानकारी ज़रूर दी.इसके अलावा, कथित तौर पर इज़रायली वायु सेना ने रेस्क्यू एरिया की ओर बढ़ रहे ईरानी सैनिकों को धीमा करने के लिए एक हमला भी किया था. इस साझेदारी को मज़बूत बताते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों सहयोगी देशों ने इस ऑपरेशन के दौरान मिलकर काम किया था.