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Ground Report: खामेनेई के आवास से गांधी हॉस्पिटल तक... तेहरान में अब भी ताजा हैं जंग के जख्म

ईरान की राजधानी तेहरान में गांधी हॉस्पिटल और आसपास के इलाकों में 40 दिन की जंग के निशान अब भी बरकरार हैं. खामेनेई के आवास के पास लोग अब भी एकजुटता दिखाने के लिए पहुंच रहे हैं.

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ईरान की राजधानी तेहरान से आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट (Photo: ITG)
ईरान की राजधानी तेहरान से आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट (Photo: ITG)

पिछले दिनों अमेरिका-इजरायल से 40 दिनों की जंग के बाद तेहरान में तबाही के निशान अब भी साफ दिखाई देते हैं. आज तक गांधी हॉस्पिटल तक पहुंचा, जहां हमले के बाद बच्चों के इस अस्पताल और आसपास के रिहायशी इलाके में हुई भारी तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं.

पिछले 127 दिनों से लगातार ईरानी नागरिक अपने सुप्रीम लीडर और देश को एकजुट दिखाने के लिए अली खामेनेई के आवास के पास इकट्टा होते हैं. खास बात यह है कि इन 127 दिनों से यहां पर ईरानी के राष्ट्रीय झंडे को नीचे नहीं किया गया. कोई न कोई इस झंडे को पकड़कर रखता है, जिसमें ज्यादातर महिलाएं होती हैं.

40 दिनों की जंग के दौरान ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा था, लेकिन सबसे ज्यादा सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और हॉस्पिटल को टारगेट किया गया था.

गांधी हॉस्पिटल की हालत कैसी?

राजधानी तेहरान में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर एक हॉस्पिटल है, जिसका नाम है- गांधी हॉस्पिटल. जंग के दौरान इजरायल ने इस हॉस्पिटल को भी टारगेट किया गया था. इस इलाके में मौजूद पूरी स्ट्रीट का नाम भी गांधी स्ट्रीट रखा गया है. जंग के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज में एक नर्स बहादुरी से छोटे बच्चों को बचाती हुई नजर आ रही थी. 

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gandhi hospital
हमले के बाद गांधी हॉस्पिटल की हालत (Photo: AP)

मौजूदा वक्त में हॉस्पिटल की हालत जर्जर है. ये एक तरीके का प्राइवेट सेमी प्राइवेट हॉस्पिटल था, लेकिन यहां पर बहुत ज्यादा बर्बादी हुई. 

gandhi hospital
(Photo: AP)

ईरान में सिर्फ तेहरान के अंदर 430 से ज्यादा अस्पतालों को टारगेट किया गया था, जिसमें गांधी हॉस्पिटल सबसे प्रमुख हॉस्पिटल था. इसे बच्चों का स्पेशलाइज्ड हॉस्पिटल भी कहा जाता है. इस पर कई एंगल से हमले किए गए. हॉस्पिटल के आस-पास कुछ रिहायशी इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा था, जिनको ठीक करने का काम चल रहा है.

gandhi hospital
(Photo: AP)

जंग के दौरान अमेरिका और इजरायल ने सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूलों और कॉलेजों को नुकसान पहुंचाया था. शायद यही वजह है कि अमेरिका और इजरायल पर इस जंग को रोकने का बहुत ज्यादा प्रेशर था, क्योंकि वो लगातार वार क्राइम्स का उल्लंघन कर रहे हैं. वो लगातार ईरान के सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किए, जहां रिहायशी इलाकों में मौजूद थे.

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