आजतक डिजिटल ग्राउंड रिपोर्ट्स (Aajtak Digital Ground Reports) के जरिए हम देश-दुनिया से जुड़ी खबरों को विस्तार से पेश करते हैं. आजतक डिजिटल टीम के पत्रकार ग्राउंड पर जाकर ख़बरों के पीछे की असल कहानी जानने की कोशिश करते हैं, जिससे पाठक 360 डिग्री कवरेज से रूबरू होते हैं. आजतक डिजिटल की पैनी नज़र देश-दुनिया में हो रहे हर घटनाक्रम पर होती है. खबरों के पीछे की असली खबर जानने के लिए पढ़ते रहें आजतक डिजिटल की ग्राउंड रिपोर्ट्स (Aajtak Digital Ground Reports).
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में पान किसानों के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं. किसानों की मांग है कि पान की खेती को कृषि का दर्जा मिले, जिससे गेहूं-धान से जुड़े किसानों की तरह हमें भी नुक़सान का मुआवजा मिल सके.
इजरायल के हाइफा शहर में अंडरग्राउंड कमांड सेंटर से 24 घंटे सुरक्षा और इमरजेंसी सिस्टम चलाया जा रहा है. लगातार मिसाइल हमलों के बीच शहर हाई अलर्ट पर है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.
लेबनान की बेका घाटी में इजरायली हमलों के कारण हालात गंभीर हो गए हैं. लगातार बमबारी से लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं. स्कूल और कम्युनिटी सेंटर शरणस्थल बन गए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी से मानवीय संकट गहराता जा रहा है. सरकार से मिल रही राहत काफी नहीं पड़ रही है.
जयपुर के सुशीलपुरा इलाके में पिछले एक हफ्ते से गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क खुदाई के दौरान सीवर का पानी पीने की पाइपलाइन में मिल गया, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ.
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा, सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं से हालात बदल चुके हैं. हिंसा की जगह विकास और नॉर्मल लाइफ पटरी पर लौट रही है.
मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने कई जिंदगियों को तबाह कर दिया है. लोग बेघर हो चुके हैं और टूटी छत के नीचे गुजारा करने को मजबूर हैं. युद्ध के कारण लोगों को अपनी पहचान खोने का खतरा महसूस हो रहा है.
दक्षिण लेबनान और बेरूत से लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं, लेकिन इस संकट की घड़ी में लेबनान का समाज धार्मिक दीवारों को तोड़कर एकजुट खड़ा नजर आ रहा है.
ईरान की जंग हजारों किलोमीटर दूर है, लेकिन उसका धुआं दिल्ली की रसोई तक महसूस होने लगा है. शास्त्री पार्क के गोदाम के बाहर खड़ी लंबी कतारें बता रही हैं कि संकट सिर्फ सिलेंडर का नहीं, भरोसे का भी है. लोग इंतजार और जुगाड़ के बीच झूल रहे हैं कि अगली सुबह चूल्हा जलेगा या नहीं.
दक्षिणी दिल्ली में हुमायूं के मकबरे के पास स्थित सुंदर नर्सरी ऐतिहासिक विरासत और हरियाली का अनोखा संगम है. 90 एकड़ में फैला यह हेरिटेज पार्क सुकून, बायोडायवर्सिटी और प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा ठिकाना है.
Iran National Day के मौके पर तेहरान में भारी भीड़ और हाई सिक्योरिटी. AajTak ground report में जानिए US–Iran tension और regime change के बीच हालात.
दरभंगा के अलीनगर हेल्थ सेंटर की Aaj Tak ground report में खुली हकीकत. MBBS doctor गायब, जर्जर भवन और सीमित इलाज—मैथिली ठाकुर के दावे कई मामलों में सही पाए गए.
पुराने-दान में मिले कपड़े, जो साइज में कई गुना बड़े या छोटे हों...उलझकर जूट बन चुके बाल... पैसे या खाना देते हुए हिकारत-घुली-दया... और अनाथ का पुछल्ला...यही मेरी पहचान थी. कालका जी मंदिर के आगे पली-बढ़ी. बचपन में मुझे बस भूख और सर्दी-गर्मी समझ आती थी. उम्र बढ़ी तो इसमें डर शामिल हो गया. रात का. लोगों का. अनचाहे चली आई नींद का.
'इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से बच्चों संग दिल्ली आई, तो दिल में अरमान था. खोया हुआ शौहर मिल जाएगा और हम घर लौट आएंगे. सुनहरे फ्रेम में जड़ी मुस्कुराती पिक्चर. वो 2014 था. दस साल गुजरे. अब दूर गांव में घर तो बाकी है, लेकिन लौटने की हूक नहीं बची.'
दिल्ली-एनसीआर का मौसम अब भी सर्द बना हुआ है. धूप की चमक बीते इश्क की कसक जितनी चुभन-भरी. परतदार कपड़ों के बीच भी हवा किसी घुसपैठिए के अंदाज में भीतर चली आती है. इसी शहर का एक और चेहरा भी है. फ्लाईओवरों की आड़ में सोता. सड़क किनारे छिपता. इनमें औरतें भी मिलेंगी. अधपेट...अधढंकी...अधसोई...और अधजिंदा!
अंजलि के बाद दूसरी बेटी अशिका भी चली गई. इसी पंखे, जिसके नीचे हम बैठे हैं, यहीं उसने फांसी लगा ली. रात सोओ, तो फंदे पर झूलता उसका शरीर याद आता है. गोली खाती हूं, तब जाकर सो पाती हूं. लोगों के लिए नया साल खुशियां लाता है, हमारे तो पुराने जख्म उधेड़ जाता है.
जहां नदी में हीरे बहते हैं, जहां ठोकर मारते ही जमीन हीरा उगलती है, उसी पन्ना जिले का एक गांव है मनौर. पत्थर खदानों में काम करते यहां के ज्यादातर पुरुष कम उम्र में ही खत्म होने लगे. तब से मनौर विधवाओं का गांव हो गया. सांझ के झुटपुटे में यहां मिली एक महिला कहती है- ‘चाहे जितना पुराना हो जाए, दुख नहीं बिसरता’.
पन्ना की हीरा खदानों में कहानियां ऐसे अटकी हैं, जैसे पुराने कुएं में दोपहरी की गूंज. उस तरफ पैर मत रखना, वरना हीरा रूठ जाएगा. फलां दिन देवता को मनाओ तो बिगड़ी संभल जाएगी. धूप जलाओ. सिर नवाओ. तकदीर को जगाने के अलग-अलग टोटके. विश्वासों की पोटली में एक यकीन ये भी कि अंधेरे में स्त्री-पुरुष मिलन हो तो हीरा खुद भागकर हाथों में आ गिरेगा.
पन्ना के हीरों को हाल में जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिला. अब घर से लेकर सरहद पार तक उसकी पूछ-परख और बढ़ेगी. लेकिन हीरा खदानों में काम करते मजदूर वहीं अटके रहेंगे. कुदाल-फावड़े चलाते, हाथ-पांव जख्मी करते, पत्थरों के पहाड़ में हीरे की कनी खोजते और मिलने पर धड़धड़ाती छाती से उसे खदान मालिक के हवाले करते हुए!
पन्ना के हीरा खदानों की हकीकत—मोटी कमाई नहीं, दर्द, अवैध माइनिंग, सिलिकोसिस, अंधविश्वास और मजदूरों की किस्मत का खेल. GI टैग मिला, पर हालात नहीं बदले.
GI टैग के बाद दुनिया पन्ना के डायमंड देख रही है, लेकिन मजदूर आज भी भूख, गरीबी और उम्मीद में खदानों में जिंदगी खपा रहे हैं.
Dehli Blast Updates: दिल्ली ब्लास्ट के बाद ऐतिहासिक इलाक़ों- चांदनी चौक, मीना बाज़ार, जामा मस्जिद और खारी बावली में दहशत और मायूसी छाई हुई है. कारोबार ठप है, स्टॉल्स पर ग्राहक नहीं आ रहे. दुकानदारों और रिक्शा चालकों की कमाई बुरी तरह प्रभावित हुई है.