आजतक डिजिटल ग्राउंड रिपोर्ट्स (Aajtak Digital Ground Reports) के जरिए हम देश-दुनिया से जुड़ी खबरों को विस्तार से पेश करते हैं. आजतक डिजिटल टीम के पत्रकार ग्राउंड पर जाकर ख़बरों के पीछे की असल कहानी जानने की कोशिश करते हैं, जिससे पाठक 360 डिग्री कवरेज से रूबरू होते हैं. आजतक डिजिटल की पैनी नज़र देश-दुनिया में हो रहे हर घटनाक्रम पर होती है. खबरों के पीछे की असली खबर जानने के लिए पढ़ते रहें आजतक डिजिटल की ग्राउंड रिपोर्ट्स (Aajtak Digital Ground Reports).
दक्षिण लेबनान और बेरूत से लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं, लेकिन इस संकट की घड़ी में लेबनान का समाज धार्मिक दीवारों को तोड़कर एकजुट खड़ा नजर आ रहा है.
ईरान की जंग हजारों किलोमीटर दूर है, लेकिन उसका धुआं दिल्ली की रसोई तक महसूस होने लगा है. शास्त्री पार्क के गोदाम के बाहर खड़ी लंबी कतारें बता रही हैं कि संकट सिर्फ सिलेंडर का नहीं, भरोसे का भी है. लोग इंतजार और जुगाड़ के बीच झूल रहे हैं कि अगली सुबह चूल्हा जलेगा या नहीं.
दक्षिणी दिल्ली में हुमायूं के मकबरे के पास स्थित सुंदर नर्सरी ऐतिहासिक विरासत और हरियाली का अनोखा संगम है. 90 एकड़ में फैला यह हेरिटेज पार्क सुकून, बायोडायवर्सिटी और प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा ठिकाना है.
Iran National Day के मौके पर तेहरान में भारी भीड़ और हाई सिक्योरिटी. AajTak ground report में जानिए US–Iran tension और regime change के बीच हालात.
दरभंगा के अलीनगर हेल्थ सेंटर की Aaj Tak ground report में खुली हकीकत. MBBS doctor गायब, जर्जर भवन और सीमित इलाज—मैथिली ठाकुर के दावे कई मामलों में सही पाए गए.
पुराने-दान में मिले कपड़े, जो साइज में कई गुना बड़े या छोटे हों...उलझकर जूट बन चुके बाल... पैसे या खाना देते हुए हिकारत-घुली-दया... और अनाथ का पुछल्ला...यही मेरी पहचान थी. कालका जी मंदिर के आगे पली-बढ़ी. बचपन में मुझे बस भूख और सर्दी-गर्मी समझ आती थी. उम्र बढ़ी तो इसमें डर शामिल हो गया. रात का. लोगों का. अनचाहे चली आई नींद का.
'इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से बच्चों संग दिल्ली आई, तो दिल में अरमान था. खोया हुआ शौहर मिल जाएगा और हम घर लौट आएंगे. सुनहरे फ्रेम में जड़ी मुस्कुराती पिक्चर. वो 2014 था. दस साल गुजरे. अब दूर गांव में घर तो बाकी है, लेकिन लौटने की हूक नहीं बची.'
दिल्ली-एनसीआर का मौसम अब भी सर्द बना हुआ है. धूप की चमक बीते इश्क की कसक जितनी चुभन-भरी. परतदार कपड़ों के बीच भी हवा किसी घुसपैठिए के अंदाज में भीतर चली आती है. इसी शहर का एक और चेहरा भी है. फ्लाईओवरों की आड़ में सोता. सड़क किनारे छिपता. इनमें औरतें भी मिलेंगी. अधपेट...अधढंकी...अधसोई...और अधजिंदा!
अंजलि के बाद दूसरी बेटी अशिका भी चली गई. इसी पंखे, जिसके नीचे हम बैठे हैं, यहीं उसने फांसी लगा ली. रात सोओ, तो फंदे पर झूलता उसका शरीर याद आता है. गोली खाती हूं, तब जाकर सो पाती हूं. लोगों के लिए नया साल खुशियां लाता है, हमारे तो पुराने जख्म उधेड़ जाता है.
जहां नदी में हीरे बहते हैं, जहां ठोकर मारते ही जमीन हीरा उगलती है, उसी पन्ना जिले का एक गांव है मनौर. पत्थर खदानों में काम करते यहां के ज्यादातर पुरुष कम उम्र में ही खत्म होने लगे. तब से मनौर विधवाओं का गांव हो गया. सांझ के झुटपुटे में यहां मिली एक महिला कहती है- ‘चाहे जितना पुराना हो जाए, दुख नहीं बिसरता’.
पन्ना की हीरा खदानों में कहानियां ऐसे अटकी हैं, जैसे पुराने कुएं में दोपहरी की गूंज. उस तरफ पैर मत रखना, वरना हीरा रूठ जाएगा. फलां दिन देवता को मनाओ तो बिगड़ी संभल जाएगी. धूप जलाओ. सिर नवाओ. तकदीर को जगाने के अलग-अलग टोटके. विश्वासों की पोटली में एक यकीन ये भी कि अंधेरे में स्त्री-पुरुष मिलन हो तो हीरा खुद भागकर हाथों में आ गिरेगा.
पन्ना के हीरों को हाल में जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिला. अब घर से लेकर सरहद पार तक उसकी पूछ-परख और बढ़ेगी. लेकिन हीरा खदानों में काम करते मजदूर वहीं अटके रहेंगे. कुदाल-फावड़े चलाते, हाथ-पांव जख्मी करते, पत्थरों के पहाड़ में हीरे की कनी खोजते और मिलने पर धड़धड़ाती छाती से उसे खदान मालिक के हवाले करते हुए!
पन्ना के हीरा खदानों की हकीकत—मोटी कमाई नहीं, दर्द, अवैध माइनिंग, सिलिकोसिस, अंधविश्वास और मजदूरों की किस्मत का खेल. GI टैग मिला, पर हालात नहीं बदले.
GI टैग के बाद दुनिया पन्ना के डायमंड देख रही है, लेकिन मजदूर आज भी भूख, गरीबी और उम्मीद में खदानों में जिंदगी खपा रहे हैं.
Dehli Blast Updates: दिल्ली ब्लास्ट के बाद ऐतिहासिक इलाक़ों- चांदनी चौक, मीना बाज़ार, जामा मस्जिद और खारी बावली में दहशत और मायूसी छाई हुई है. कारोबार ठप है, स्टॉल्स पर ग्राहक नहीं आ रहे. दुकानदारों और रिक्शा चालकों की कमाई बुरी तरह प्रभावित हुई है.
दिल्ली ब्लास्ट के बाद चांदनी चौक, मीना बाज़ार, जामा मस्जिद और खारी बावली जैसे ऐतिहासिक इलाकों में सन्नाटा पसरा है. दुकानदार और रिक्शा चालक दहशत और मंदी से जूझ रहे हैं. Old Delhi की गलियां अब मायूसी की गवाह बनी हुई हैं.
दिल्ली की रावण मंडी, यानी तितारपुर, पूरी तरह सज चुकी है. छोटे-बड़े, रंग-बिरंगे, धमाकेदार रावण पुतलों की भरमार. दो फुट से लेकर 70 फुट तक के रावण- कोई जाएगा रामलीला मैदान की रौनक बनने, तो कोई किसी सोसाइटी के लॉन में खड़ा होकर लोगों की आंखों में डर और तारीफ दोनों भरने.
विटामिन-सी से भरपूर फल आंवले को बिना पूंजी का व्यवसाय माना जाता है लेकिन मौजूदा हालात ये हैं कि बड़े स्तर पर खेती करने वाले कई किसानों ने आंवले के सैकड़ों पेड़ कटवा दिए. प्रतापगढ़ के आंवला किसानों की ज़मीनी हक़ीक़त चिंता पैदा करती है.
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में स्थित Red Apple homez प्रोजेक्ट में करीब 800 खरीदारों ने सालों पहले फ्लैट बुक किया था, लेकिन 13 साल गुजरने के बाद भी लोगों को घर नहीं मिला हैं. पिछले कई सालों से काम भी बंद पड़ा है. लोगों का आरोप है कि पहले बिल्डर ने काम बंद किया तो लोग कोर्ट गए और खुद एक दूसरे बिल्डर के साथ अधूरा फ्लैट बनाने का फैसला किया, लेकिन अभी तक मामला कोर्ट में चल रहा है और उनकी उम्मीद धीरे- धीरे टूटती जा रही हैं.
जब मैं अपने भांजे सुमीत के बारे में सोचता, तो मेरे लिए वो अपना बच्चा था. मेहनती. मासूम. मैं उसे दुनिया की तरह नहीं देखता था- जवान, बाल-बच्चेदार आदमी जो परिवार की बजाए नशे में डूबा था. काश मैं कैलेंडर में उस वक्त को लौटा सकता, जब उसने पहली बार ड्रग्स ली थी. या नशा छुड़वाने के लिए जब उसे ‘उस’ सेंटर भेजा था!
खेतों, खेलों और खुशहाली से भरा हरियाणा बीते कुछ सालों में एकदम-से बदल गया. अब खेतों की जगह ऊंची इमारतें हैं. खेल खत्म हो चुके. और खुशहाली की जगह खालीपन बस गया. हरे-भरे नक्शे पर जगह-जगह खरोंच हैं- नशे की, डिप्रेशन की…और शर्म की! शर्म - नशा करने की…शर्म- नशा छोड़ने की! aajtak.in ने हरियाणा और उससे सटे राजस्थान बॉर्डर पर नशा और नशा मुक्ति केंद्रों को देखा.