ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि उनका देश दुश्मनों के साथ 'ऑल-आउट' यानी हर मोर्चे पर जंग लड़ रहा है. इसमें सिर्फ लड़ाई नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव भी शामिल है. अमेरिकी पाबंदियों के बीच उन्होंने कहा कि ईरान मुश्किल हालात में भी डटा हुआ है. वहीं, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने डोनाल्ड ट्रंप की पाबंदियों को पुराना तरीका बताया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान से सम्मान के साथ बात करनी चाहिए.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पेजेश्कियान ने रविवार को टीवी पर दिए भाषण में कहा कि अमेरिका के दबाव के बावजूद ईरान अपने लोगों के लिए काम कर रहा है. सरकार महंगाई कम करने की कोशिश कर रही है. लोगों की आर्थिक परेशानियां दूर करना भी उसके एजेंडे में है. उन्होंने मौजूदा हालात को आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा से जुड़ी 'ऑल-आउट जंग' बताया. यानी ईरान को लगता है कि उस पर एक साथ कई तरह का दबाव बनाया जा रहा है.
अमेरिका की पाबंदियों पर ईरान का जवाब
वहीं, अब्बास अराघची ने अमेरिका की नई पाबंदियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अमेरिका फिर वही पुराना पैंतरा आजमा रहा है. ओबामा के दौर के प्रतिबंध रहे हों या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति, नाम भले बदलते रहे लेकिन दबाव बनाने की नीयत वही रही. ईरान इस तरह के दबाव पहले भी देख चुका है, इसलिए उसे अच्छी तरह पता है कि इनसे कैसे निपटना है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अराघची ने कहा कि अमेरिका पहले सैन्य हमले की धमकी दे रहा था, लेकिन अब पुराने आर्थिक हथकंडों पर उतर आया है. इससे साफ है कि ईरान से निपटने के लिए वाशिंगटन के पास कोई नया रास्ता नहीं बचा है. उन्होंने दो टूक कहा कि अगर किसी मसले का हल निकालना है, तो अमेरिका को ईरानी जनता से बराबरी और सम्मान के साथ बात करनी होगी.
ट्रंप ने भी दी थी आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान की मदद करने वाले देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था. सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' बताते हुए बड़े स्तर का आर्थिक युद्ध करार दिया था. इसी बयान के बाद अब ईरान का यह तीखा पलटवार सामने आया है.
ईरान और अमेरिका ने 18 जून को इलाके में युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते पर दस्तखत किए थे. इसके तहत दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर किसी अंतिम नतीजे तक पहुंचने के लिए बातचीत करनी थी. यह तय समयसीमा सोमवार को पूरी हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच उपजे तनाव के बाद अब इस बातचीत का भविष्य अधर में लटक गया है.