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हॉर्मुज के बीच नया फ्लैशपॉइंट... खार्ग आइलैंड पर ईरान ने किलेबंदी बढ़ाई, अमेरिकी जमीनी हमले की आशंका के बीच बड़ी तैयारी

ईरान ने खार्ग आइलैंड की सुरक्षा को लेकर बड़े कदम उठाए हैं, जहां से उसके करीब 90 फीसदी तेल निर्यात होता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के संभावित ग्राउंड ऑपरेशन की आशंका में ईरान ने द्वीप पर एक्स्ट्रा सैनिक, एयर डिफेंस सिस्टम और माइंस तैनात कर दी हैं. यह कदम होर्मुज संकट के बीच उठाया गया है.

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ईरान ने खार्ग आइलैंड पर एयर डिफेंस और माइंस तैनात किए (Photo: Reuters and NASA Science)
ईरान ने खार्ग आइलैंड पर एयर डिफेंस और माइंस तैनात किए (Photo: Reuters and NASA Science)

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव अभी भी बहुत ज्यादा है. खास बात ये है कि ईरान ने अपना एक छोटा-सा लेकिन बहुत महत्वपूर्ण द्वीप “खार्ग द्वीप” को मजबूत बनाने में जुट गया है. ये द्वीप फारस की खाड़ी में है और ईरान के लिए जैसे जान है. क्योंकि इस द्वीप से ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल दुनिया भर में निर्यात होता है. 

मतलब ये ईरान की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत है. अगर इस द्वीप पर कुछ हो गया तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगेगा.

अमेरिकी की टेलीवजन नेटवर्क CNN की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ हफ्तों से ईरान इस द्वीप पर काफी तैयारी कर रहा है. ईरान ने वहां एक्स्ट्रा सैनिक भेजे हैं, हवाई हमले से बचाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम बढ़ाए हैं और खासतौर पर किनारे पर माइन्स (बम) बिछा रहा है.

ये माइन्स दो तरह के हैं. एक तो पैदल सैनिकों के लिए और दूसरे टैंकों या गाड़ियों के लिए. खासकर उस जगह पर माइन्स लगाए गए हैं जहां से अमेरिकी सैनिक अगर समुद्र से उतरकर हमला करें तो सीधे फंस जाएं.

ईरान ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि उसे डर है कि अमेरिका इस द्वीप पर जमीन से हमला करके कब्जा करने की कोशिश कर सकता है. ट्रंप प्रशासन इस ऑप्शन पर विचार कर रहा है. उनका प्लान ये है कि अगर हम खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लें तो ईरान पर बहुत दबाव पड़ेगा और वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खोल देगा. ये रास्ता दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण तेल का रास्ता है. ईरान ने इसे बंद करके दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित कर रखी है.

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यह भी पढ़ें: ‘NO, Thank You...’, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान ने सुप्रीम लीडर बनने का दिया था ऑफर, मैंने ठुकराया

लेकिन अमेरिका के अपने अधिकारी और सैन्य एक्सपर्ट कह रहे हैं कि ये काम आसान नहीं है. द्वीप पर पहले से ही कई लेयर की सुरक्षा है. ईरान ने हाल ही में MANPADs नाम के छोटे-छोटे कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले मिसाइल सिस्टम भी वहां भेज दिए हैं, जो हेलिकॉप्टर या कम उड़ान वाले प्लेन को आसानी से मार सकते हैं. अगर अमेरिकी सैनिक वहां उतरते हैं तो भारी नुकसान हो सकता है. मतलब अमेरिका के कई सैनिक शहीद हो सकते हैं.

ट्रंप के कुछ करीबी सहयोगी भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस द्वीप पर हमला करना सच में जरूरी है. उनका कहना है कि सिर्फ द्वीप ले लेने से होर्मुज का पूरा मुद्दा हल नहीं होगा और ईरान का तेल बाजार पर कंट्रोल भी नहीं टूटेगा. जोखिम बहुत ज्यादा है और फायदा उतना साफ नहीं है.

अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान की इन गतिविधियों पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. पिछले दिनों अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर हवाई हमले भी किए थे, जिसमें 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था, लेकिन तेल की सुविधाओं को बचाया गया था. अब ईरान डर के मारे अपना बचाव और मजबूत कर रहा है.

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