अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब हर गुजरते दिन के साथ और भी खौफनाक होती जा रही है. इसी तनाव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को ईरान पर तीखा हमला बोला. उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि तेहरान की मिसाइलें अब सिर्फ इजरायल के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोप और पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं. यह बयान उन्होंने इजरायल के दक्षिणी शहर अराद का दौरा करते हुए दिया, जहां शनिवार शाम को ईरानी मिसाइलों ने भारी तबाही मचाई थी.
नेतन्याहू ने डिएगो गार्सिया पर हुए हालिया हमले का जिक्र करते हुए दुनिया को आगाह किया. उन्होंने बताया कि ईरान ने 4,000 किलोमीटर दूर तक मार करने वाली मिसाइल दागी है. उनके मुताबिक, वह लंबे समय से यह कह रहे थे कि ईरान के पास अब यूरोप के काफी अंदर तक तबाही मचाने की ताकत है. वे साइप्रस जैसे यूरोपीय देशों को पहले ही निशाना बना चुके हैं और अब उनकी नजर हर किसी पर है. उन्होंने दो टूक कहा कि पिछले 48 घंटों में ईरान ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है. उनका मकसद सिर्फ हमला करना नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर नरसंहार करना था. यह तो गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, वरना मंजर और भी भयावह हो सकता था.
इतना ही नहीं, नेतन्याहू ने यरूशलेम के उन पवित्र स्थलों का मुद्दा भी उठाया जिन्हें दुनिया भर में आस्था का केंद्र माना जाता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने उन जगहों पर मिसाइलें दागीं जो यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों धर्मों के लिए बेहद खास हैं. वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया. मिसाइलों के टुकड़े इन धार्मिक स्थलों के बिल्कुल करीब जाकर गिरे थे, जिससे एक बड़ी त्रासदी हो सकती थी.
ट्रंप की अपील का किया समर्थन
इसी कड़ी में, इजरायली पीएम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील का पुरजोर समर्थन किया, जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस कट्टरपंथी शासन के खिलाफ एकजुट होने को कहा था. नेतन्याहू ने कहा कि 'इजरायल और अमेरिका मिलकर पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं.' उनके अनुसार, ईरान समुद्री रास्तों और ऊर्जा सप्लाई को रोककर पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने साफ किया कि अब वक्त आ गया है जब दुनिया को इस सिस्टम के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए.
अंत में, पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने दो मुख्य लक्ष्य भी साफ किए. पहला मकसद ईरान के परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह तहस-नहस करना है. वहीं दूसरा लक्ष्य ऐसी परिस्थितियां बनाना है जिससे वहां की जनता खुद इस तानाशाही को उखाड़ फेंके. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कार्रवाई ईरानी जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि उस हुकूमत के खिलाफ है जिसने सबकी नाक में दम कर रखा है. इजरायली अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को हुए इन हमलों में कुल 175 लोग घायल हुए हैं. अकेले अराद शहर में ही 115 लोग जख्मी हुए, जिनमें से 9 की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है. वहीं, डिमोना में भी 60 लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है.