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ईरान ने मिडिल-ईस्ट के 5 देशों से मांगा मुआवजा, जंग में शामिल होने का लगाया आरोप

ईरान ने मिडिल-ईस्ट के पांच बड़े देशों बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन से युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा है. ईरान का आरोप है कि ये देश अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल थे.

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ईरान ने जंग में हुए नुकसान की भरपाई की मांग की. (Photo: AP)
ईरान ने जंग में हुए नुकसान की भरपाई की मांग की. (Photo: AP)

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद तीनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. ईरान शुरू से सीजफायर के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है. अब खबर है कि ईरान ने मिडिल-ईस्ट के पांच बड़े देशों से युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा है.

ईरान ने जिन देशों को कठघरे में खड़ा किया है, उनमें बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन शामिल हैं. ईरान का दावा है कि इन देशों ने युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल का सहयोग किया है.

ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने आरोप लगाया है कि ये देश सीधे तौर पर या पर्दे के पीछे से ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हमलों में हिस्सा रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि आमिर-सईद इरवानी ने इस मुद्दे पर ईरान का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने दावा किया कि इन पांचों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है. इरवानी के मुताबिक, इन देशों की वजह से ईरान को जान-माल और संपत्ति का भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसकी भरपाई अब इन देशों को ही करनी होगी.

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ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA ने इस मांग को लेकर सारी डिटेल्स दी है. अमीर-सईद इरवानी ने कहा कि इन देशों को इस्लामी गणराज्य ईरान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी. इसमें मैटेरियल डैमेज शामिल है और इसके साथ ही ईरान ने सभी अंतरराष्ट्रीय उल्लंघनों से हुए नैतिक नुकसान के लिए भी मुआवजे के भुगतान की मांग की गई है.

यह भी पढ़ें: 'भारतीय जहाजों से नहीं वसूला पैसा, अपनी सरकार से पूछ लें', होर्मुज टोल पर ईरान की सफाई

शांति वार्ता फेल, नाकेबंदी शुरू

बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई थी. हालांकि बातचीत की ये कोशिश बेनतीजा रही. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी शुरू कर दी है. अमेरिका ने कई देशों से भी इसमें सहयोग के लिए कहा था, हालांकि ब्रिटेन ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है.

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