ईरान और अमेरिका के बीच शुक्रवार को होने वाली परमाणु वार्ता रद्द कर दी गई है. कहा जा रहा है कि ईरान ने पहले से बनी सहमतियों से पीछे हटते हुए बातचीत की शर्तों में बदलाव की कोशिश की, जिसके बाद यह फैसला लिया गया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने बातचीत का स्थान तुर्की से बदलकर ओमान करने और अन्य देशों को बातचीत से बाहर रखने की मांग रखी थी. वेन्यू में बदलाव भी किया गया लेकिन खाड़ी के अन्य देशों को बैठक का हिस्सा नहीं बनाने की मांग खारिज कर दी गई.
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि समझौते के लिए समझौता करने की कोशिश की गई, लेकिन ईरान ने उसे भी मानने से इनकार कर दिया. दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से एक इजरायली मीडिया ने यह जानकारी दी. ईरान की विपक्ष समर्थित न्यूज एजेंसी ईरान इंटरनेशनल ने भी इस बारे में जानकारी दी है कि अब दोनों मुल्क शुक्रवार को कोई वार्ता नहीं करेंगे.
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रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ईरान को लेकर किसी भ्रम में नहीं है. अगर वास्तविक और गंभीर बातचीत होती है तो अमेरिका उसमें शामिल होगा, लेकिन समय की बर्बादी नहीं करेगा. इसी वजह से इस सप्ताह बातचीत पूरी तरह रद्द होने की संभावना जताई गई है.
बातचीत को लेकर ईरान की क्या मांग थी?
रॉयटर्स ने इससे पहले एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया था कि ओमान में होने वाली बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहने वाली थी और ईरान का मिसाइल कार्यक्रम इसमें शामिल नहीं होना था. हालांकि, अमेरिका का रुख इससे अलग रहा है.
अमेरिका चाहता है ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल पर रोक
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ कहा कि अगर बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकालना है, तो उसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्र में आतंकी संगठनों को समर्थन, परमाणु गतिविधियां और अपने नागरिकों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दे शामिल होने चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल परमाणु मुद्दे तक बातचीत सीमित रखना अमेरिका को स्वीकार नहीं है.
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अमेरिकी नौसेना ने ईरानी ड्रोन को मार गिराया
इसी बीच क्षेत्र में सैन्य तनाव भी बढ़ गया है. मंगलवार, 3 फरवरी को अमेरिकी नौसेना के एक एफ-35सी फाइटर जेट ने अरब सागर में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया. अमेरिकी बयान के अनुसार यह ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन की ओर आक्रामक तरीके से बढ़ रहा था. मार गिराया गया ड्रोन ईरान का शाहेद-139 बताया गया है, जो दिखने में अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन जैसा था. इस घटना ने ईरान-अमेरिका तनाव को और गहरा कर दिया है और कूटनीतिक बातचीत की राह और मुश्किल होती दिख रही है.