अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर नजर आ रहा है. एक तरफ अरब सागर और होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य घटनाएं सामने आ रही हैं, तो दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच परमाणु बातचीत की तैयारी भी जारी है. अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी ड्रोन गिराए जाने और तेल टैंकरों को लेकर हुई तनातनी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है.
इसी बीच कूटनीतिक स्तर पर हलचल भी तेज है. अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता का स्थान बदला गया है, जबकि ईरान साफ कर चुका है कि वह बातचीत को केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रखना चाहता है. मौजूदा हालात में सैन्य शक्ति प्रदर्शन और कूटनीति, दोनों साथ-साथ चल रहे हैं.
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1. सैन्य घटनाओं के बावजूद अमेरिका-ईरान बातचीत की तैयारी
अरब सागर और फारस की खाड़ी में बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते बातचीत होने की संभावना बनी हुई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया सैन्य घटनाओं के बाद भी दोनों देश डिप्लोमैटिक चैनल खुले रखना चाहते हैं. माना जा रहा है कि सैन्य दबाव और कूटनीतिक संवाद, दोनों एक साथ चल रहे हैं.
2. परमाणु वार्ता का वेन्यू बदला, अब ओमान में होगी बैठक
रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अहम परमाणु वार्ता अब शुक्रवार को ओमान में होगी. पहले यह बातचीत तुर्की में प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान ने वेन्यू बदलने की मांग की. ईरान का मकसद बातचीत को केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित रखना है, ताकि मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे विषय एजेंडे से बाहर रहें. इनके अलावा ईरान की तरफ से यह भी मांग की गई कि इस बातचीत में क्षेत्र के कोई और देश शामिल नहीं होने चाहिए, जिसको लेकर कतर की तरफ से विरोध भी दर्ज किया गया.
3. सिर्फ न्यूक्लियर फाइल पर बात करने की ईरान की शर्त
एक्सियोस की रिपोर्ट बताती है कि ईरान अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत में मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय सहयोगी गुटों पर चर्चा नहीं चाहता. तेहरान की मांग है कि वार्ता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहे. इसी कारण ईरान ने द्विपक्षीय बातचीत पर जोर दिया और व्यापक एजेंडे का विरोध किया.
4. सभी मुद्दों और देशों को किया जाए शामिल, कतर का रुख
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान से बातचीत में सभी मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए और किसी भी देश को बाहर नहीं रखा जाना चाहिए. उनका बयान ईरान की उस मांग के विपरीत है, जिसमें उसने केवल अमेरिका के साथ सीमित बातचीत की बात कही है. कतर का मानना है कि तमाम मुद्दों पर बातचीत ही समाधान का रास्ता है.
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5. अमेरिकी फाइटर जेट ने ईरानी ड्रोन को मार गिराया
अमेरिकी सेना ने जानकारी दी है कि उसके एफ-35सी फाइटर जेट ने ईरान के शहीद-139 ड्रोन को मार गिराया. यह घटना मंगलवार शाम कोई हुई, जब अमेरिका के मुताबिक ईरानी ड्रोन उसके एयरक्राफ्ट कैरियर की तरफ बढ़ रहा था. यह ड्रोन अरब सागर में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के बेहद करीब आ गया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ड्रोन का व्यवहार आक्रामक था, जिसके बाद कार्रवाई की गई.
6. होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर से टकराव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गनबोट्स और एक ड्रोन ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी झंडे वाले तेल टैंकर स्टेना इम्पेरेटिव को परेशान किया. टैंकर ने अपनी रफ्तार बढ़ाई, जिसके बाद एक अमेरिकी डेस्ट्रॉयर ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला.
7. ऑस्ट्रेलिया ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है. इन प्रतिबंधों में आईआरजीसी से जुड़े 20 लोगों और तीन संस्थाओं को निशाना बनाया गया है. इनमें ईरान के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख का नाम भी शामिल है. ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ये लोग प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के लिए जिम्मेदार हैं.
8. अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से बिगड़ेगा हालात, अरब लीग की चेतावनी
अरब लीग के सहायक महासचिव होसाम जकी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य साहसिक कदम के गंभीर नतीजे हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्र पहले ही संघर्षों से थका हुआ है और अब शांति और स्थिरता की ओर बढ़ना चाहता है. जकी ने जोर दिया कि अरब देश किसी नए युद्ध या तनाव के पक्ष में नहीं हैं और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है.
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9. अमेरिकी हमले पर ईरान की चेतावनी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर हुसैन दाघीकी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो जवाबी कार्रवाई में सबसे पहला निशाना इजरायल होगा. लेबनान के अल मायादीन टीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य नीति प्रतिरोध और रक्षा पर आधारित है, लेकिन युद्ध की स्थिति में प्रतिक्रिया इतनी तीव्र और घातक होगी कि दुश्मन उसके असर का अंदाजा नहीं लगा पाएगा और संघर्ष का दायरा काफी फैल जाएगा.
10. क्षेत्रीय हालात पर कूटनीतिक बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कुवैत, कतर, तुर्की और ओमान के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग फोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्र के ताजा हालात पर विचार-विमर्श किया. इस दौरान अराघची ने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए ओमान की कोशिशों की सराहना की और साझा और सामूहिक हितों को सुरक्षित करने के लिए मित्र देशों के बीच करीबी सहयोग और समन्वय की ज़रूरत पर जोर दिया.